मन की शुद्धि के लिए विचारों को शुद्ध बनावें- महासती श्री पराग श्री जी

मन की शुद्धि के लिए विचारों को शुद्ध बनावें- महासती श्री पराग श्री जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 17 जुलाई।
आचार्य श्री रामेश व उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म सा की विशेष कृपा से समता भवन मे लगातार नैतिकता पर प्रवचन चल रहा है शासन दीपिका श्री पराग श्री जी म सा ने कहा हमे समय का सदुपयोग कर्मो की निर्जरा कराता है, अपनी आत्मा को सही दीशा मे लगावें। ध्यान पर बताया दिन के रात के चार हिस्से मे किया जाता पहला स्वाध्याय के बाद ध्यान के बाद क्रिया के बाद स्वाध्याय क्रिया मे गोचरी लाना रात मे नींद लेना।


म सा ने कहा पहले अपने विचारों को हटाये नही तो अभिषाप रहेगा, आत्मा की शुद्धि ही शास्वत शुद्धि को प्राप्त करना होता है, संसारो मे मन लगाना एक दिन आत्मा की शास्वत सिद्ध को प्राप्त करना, साधु संतो के दर्शन मात्र से मन की शुद्धि हो जाती है, संसारो मे चलना आत्मा मे बहुत कुछ करना,म सा ने कहा मन की शुद्धि के लिए हमे स्वाध्याय करना आगम पढना प्रवचन सुनना चाहिए।


म सा ने मेल दो प्रकार का होता हे एक मेल होगा तो अच्छा होगा दुसरा मैल यानि गंदगी अपने विचारों मे मैल होगा मन का मेल नही मिलेगा तब तक समस्या हल नही होगी,क्या वजह है हमारा जीवन तनाव मे होता जा रहा है,आत्मा की शुद्धि पर ध्यान नही दे पाते इसके लिए हमे जिनवाणी का मंथन करने पर हमे सिद्धि का मक्खन प्राप्त होगा फिर भटकने की आवश्यकता नही रहेगी।


म सा ने वचन सिद्धि पर कहा हमे वाणी को छान कर बोले जैसे पानी को छानकर पीते,वचन मे छल कपट नही होना चाहिए असत्य भाषा नही हो झूठ बोलने से बचे, तभी वचन सिद्धि शुद्ध होगी, बच्चो के सामने हरगिज़ झूट नही बोले नही तो उनके अंदर गलत संस्कार आ सकते।इस मनुष्य जन्म मे इतनी ऊर्जा होती वो हमे सिद्ध मार्ग पर पंहुचा देती।


इससे पहले साध्वी श्रीप्रखर श्रीजी म सा ने कहा जहां शरीर अपना नही वहां कोई रह नही सकता यह बात मन मे बैठ जाती है जहां पुदगल रह नही सकते। मेरा मेरा ममत्व भाव चलता रहे वही दुखो का कारण है। मेरा भाव नही वहां अपेक्षा नही न ममत्व रहेगा।मेरा हे उसका वियोग होने पर दुखी हो जाते।


म सा ने कहा इस शरीर पर कितना भी खर्च कर लो आखिर मे धोका ही देगा, जो दिख रहा वो मेरा कोई नही मे किसी का नही जो दिख रहा उसका निवेद भाव रखे अपनी आसक्ति को ममत्व को हटाए पुदगल की माया रंग बदलता रहता है।


म सा ने बताया राख से पानी का शुद्धिकरण हो जाता हे जो धोवन पानी बनता है यह हमे विरासत मे मिला हर परिवार मे धोवन पानी होना चाहिए ताकि जीवो को अभय दान दे सके।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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