राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 24 अगस्त। खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने आज यहां कहा कि आप कभी झगड़े की शुरुआत मत करो। इसका मतलब यह नहीं है कि आप गलत का साथ दो। भगवान पर भरोसा रखो। भरोसा टूटा तो आपका खुद पर से विश्वास उठ जाएगा
जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन की श्रृंखला में श्रेयांशप्रभ मुनि ने कहा कि हर आत्मा में परमात्मा का वास है। आप परमात्मा पर विश्वास करें और इस विश्वास को कभी ना तोड़े। व्यक्ति भरोसे पर ही जीता है। हर बड़ी-बड़ी एवं छोटी-छोटी चीजों पर हमें भरोसा होता है।
जिस पर भरोसा होता है उस पर शक नहीं होना चाहिए। यदि शक है तो उस शक को बोलकर या पूछ कर दूर कर लेना चाहिए। गलतफहमी और भरोसे के बीच की यदि कोई कड़ी है तो वह है शक। यदि शक पर हम रहे तो किसी के साथ भी अच्छा नहीं रह सकते। शक को अवश्य दूर करें।
मुनि श्री ने कहा कि जब आप संसार में हो तब तक यह सोचो कि ना किसी के प्रति गलत नहीं सोचूंगा। उन्होंने कहा कि यदि हम गलत सोचते हैं तो यह भी सोचिए कि हम परमात्मा के प्रति भी गलत सोच रहे हैं क्योंकि हर आत्मा में परमात्मा का वास है।
यदि हमने परमात्मा के प्रति बुरा सोच तो फिर हमें बचाने वाला कौन होगा? बच्चों के प्रति शक को बढ़ने मत दो। शक का तत्काल समाधान निकाले और बच्चे से बात कर यह शक दूर करें। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।।

