दादाबाड़ी में जप, तप और साधना का दौर जारी, 21 उपवास पूर्ण करने पर अशोक सुराना का बहुमान… राग छोड़ने के लिए उसके शाश्वत रहस्य को समझना जरूरी : साध्वी मंजुलाश्रीजी

दादाबाड़ी में जप, तप और साधना का दौर जारी, 21 उपवास पूर्ण करने पर अशोक सुराना का बहुमान… राग छोड़ने के लिए उसके शाश्वत रहस्य को समझना जरूरी : साध्वी मंजुलाश्रीजी

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 3 सितंबर । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशल जैन दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने गुरुवार को राग और उसके स्वरूप पर चिंतन कराया। उन्होंने कहा कि राग को छोड़ना आसान नहीं है, लेकिन उसे मंद करने के लिए लगातार पुरुषार्थ करना जरूरी है। जब व्यक्ति राग के शाश्वत रहस्य को समझने लगता है, तब संसार के प्रति उसका मोह धीरे-धीरे कम होने लगता है।

साध्वीश्री ने कहा कि हम संसार की चीजों और रिश्तों को मजबूती से पकड़कर रखना चाहते हैं, लेकिन संसार की कोई भी वस्तु हमेशा हमारे साथ रहने वाली नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि फूलों का गुलदस्ता चाहे कितनी भी मजबूती से बांधकर रखा जाए, एक दिन उसे टूटना और बिखरना ही है। उसी प्रकार संसार में जिन चीजों को हम अपना मानकर उनसे राग करते हैं, उनका भी एक दिन वियोग होना निश्चित है।

उन्होंने कहा कि शाश्वत को समझने के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। यदि व्यक्ति में रुचि और सीखने की लगन है तो पांच वर्ष का बालक भी गहरी बात को समझ सकता है। वास्तविक समझ उम्र से नहीं, बल्कि चिंतन और रुचि से आती है।

साध्वी मंजुलाश्रीजी ने कहा कि जब व्यक्ति चिंतन के माध्यम से शाश्वत को समझने लगता है तो उसकी संसार को देखने की दृष्टि बदल जाती है। जिस दुनिया को वह पहले बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण समझता था, वही दुनिया धीरे-धीरे छोटी लगने लगती है। राग कम होने के साथ आत्मा की ओर बढ़ने की राह भी स्पष्ट होती जाती है।

इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदूमुथा, राजेंद्र गोलछा एवं उज्ज्वल झाबक तथा आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

दादाबाड़ी में जप, तप और साधना का क्रम जारी, 21 उपवास पूर्ण करने पर अशोक सुराना का श्रीसंघ ने किया बहुमान

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशल जैन दादाबाड़ी में जप, तप और साधना का क्रम लगातार जारी है। प्रतिदिन श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों, पूजन, जाप और तप आराधना के माध्यम से धर्म साधना में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में गुरुवार को 21 उपवास की तपस्या पूर्ण करने पर अशोक जी सुराना का श्रीसंघ की ओर से बहुमान किया गया।

दादाबाड़ी में इन दिनों तप और आराधना का विशेष वातावरण बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपवास, एकासना सहित विभिन्न तप साधनाओं में सहभागी बन रहे हैं। इसके साथ ही प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, जाप, देववंदन और आध्यात्मिक आयोजन हो रही हैं। तपस्वियों के प्रति अनुमोदना और सम्मान के साथ पूरा श्रीसंघ साधना के इस क्रम में अपनी सहभागिता निभा रहा है।

21 उपवास पूर्ण करने वाले अशोक सुराना का बहुमान करते हुए श्रीसंघ ने उनकी तप आराधना की अनुमोदना की। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने तपस्वी के प्रति मंगलभाव व्यक्त करते हुए उनके आत्मकल्याण की कामना की।

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