रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 8 सितंबर । एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी में चल रहे आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के तहत मंगलवार से पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का शुभारंभ हुआ। पर्युषण के पहले दिन साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने प्रवचन में अभयदान, क्षमा और आत्मशुद्धि का महत्व समझाया।
साध्वीश्री ने कहा कि किसी को भय देना और डराकर उसकी जिंदगी को भयावह बनाना उचित नहीं है। यदि हम किसी को अभयदान देंगे तो हमारे जीवन में भी निर्भयता आएगी। कई बार व्यक्ति इस डर से दूसरों की मदद नहीं करता कि कहीं दूसरा उससे आगे न निकल जाए। वह दूसरों को आगे बढ़ाने के बजाय उन्हें डराने और रोकने का प्रयास करता है। ऐसी प्रवृत्ति से सावधान रहने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि यदि हम किसी व्यक्ति को निर्भय होकर आगे बढ़ने का अवसर देते हैं और उसके मार्ग की बाधाएं दूर करने का प्रयास करते हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव हमारे अपने जीवन पर भी पड़ता है। दूसरों को भय से मुक्त करना ही वास्तविक रूप से अभयदान की भावना है।

पर्युषण केवल आठ दिन भक्ति करने का पर्व नहीं
साध्वी मंजुलाश्रीजी ने कहा कि पर्युषण महापर्व केवल आठ दिन पूजा-पाठ और भक्ति करने तक सीमित नहीं है। हमें केवल इन आठ दिनों में नहीं, बल्कि पूरे 365 दिन प्रभु की भक्ति और उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। पर्युषण आत्मचिंतन, क्षमा और अपने भीतर के दोषों को पहचानकर उन्हें दूर करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि हमें अपना हृदय खुला रखना है और अपनी जुबान को भी सही अर्थों में खुला रखना है, ताकि मन में किसी के प्रति वैर, द्वेष और कटुता न रहे। पाप कर्मों की निर्जरा के लिए बाहरी आराधना के साथ भीतर से परिवर्तन भी जरूरी है।
साध्वीश्री ने कहा कि हर व्यक्ति मुक्ति की इच्छा तो रखता है, लेकिन उसके कर्म और व्यवहार कई बार बंधन को मजबूत करने वाले होते हैं। पर्युषण पर्व हमें इसी विरोधाभास को समझने और कर्मबंधन से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देता है। यह पर्व हमें क्षमा, संयम, त्याग और आत्मशुद्धि के माध्यम से अपने जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।

15 सितंबर को संवत्सरी पर्व
पर्युषण महापर्व के समापन अवसर पर 15 सितंबर को संवत्सरी पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान परस्पर क्षमा मांगकर मन में किसी के प्रति रहे राग-द्वेष और कटुता को दूर करने का संदेश दिया जाएगा। साध्वी जी की मांगलिक से मोक्ष तप की क्रिया का प्रारम्भ हुआ इसके अंतर्गत साथ ही एकासना व अंतिम दिन उपवास व देववंदन एवं 20 माला अराधक आराधना करेंगे।
परमात्म भक्ति में गूंजे भक्ति गीत, भजन गायक संभव लुनिया ने बांधा समां
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी, एमजी रोड में 51 दिवसीय परमात्म भक्ति महोत्सव के तहत 8 सितंबर को विशेष परमात्म भक्ति का आयोजन हुआ। रात 8 से 9:30 बजे तक आयोजित इस भक्ति संध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और परमात्मा की भक्ति में लीन रहे।

कार्यक्रम में खैरागढ़ से पहुंचे भजन गायक संभव लुनिया ने अपनी भक्तिमय प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भक्ति गीतों और भजनों के माध्यम से पूरे दादाबाड़ी परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भजनों के साथ परमात्मा के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त की।
यह आयोजन आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के तहत चल रहे 51 दिवसीय परमात्म भक्ति महोत्सव का हिस्सा था। परमात्म भक्ति के बाद लाभार्थी परिवार की ओर से आरती की गई। आयोजन में परमात्मा की भक्ति के साथ चातुर्मास की आराधना और आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक मजबूत करने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम परम पूज्य कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणाश्रीजी म.सा. की विदुषी शिष्याओं एवं प्रवचन प्रभाविका परम पूज्य गुरुवर्या मंजुलाश्रीजी म.सा. की निश्रा में आयोजित हुआ।
आयोजन में श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदूमुथा, राजेंद्र गोलछा और उज्ज्वल झाबक सहित चातुर्मास समिति के पदाधिकारियों का सहयोग रहा। चातुर्मास समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी और कोषाध्यक्ष चिंतन मालू आयोजन से जुड़े रहे। परमात्म भक्ति के संयोजक सुरेश भंसाली एवं टीम ने व्यवस्थाएं संभालीं।


