बिलासपुर। जैनों का पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व 2026 का मंगलवार को पहला दिवस था। सुबह से ही समाज के सभी श्रावक एवं श्राविकाएं, बालक एवं बालिकाएं बड़े हिस्सा से इस महापर्व के स्वागत के लिए तैयार थे। सभी ने बहुत ही उत्साह के साथ इस पर्व के आगमन पर तेरापंथी समाज का वैशाली नगर मे प्रवचन एवं धर्म चर्चा, श्वेतांबर समाज नेहरू नगर में कल्प सूत्र का वाचन एवं धार्मिक प्रतियोगिता, स्थानक वासी समाज टिकरापारा में भक्तांबर स्तुति एवं तपस्वियों की सेवा कार्यक्रम संपन्न हुआ । साथ ही पर्युषण महापर्व तप और त्याग का, अहिंसा और प्यार का, सेवा और सहयोग का, पाप कर्म का नाश करने का, आध्यात्म से मोक्ष प्राप्त करने का पर्व माना जाता है।

श्वेतांबर समाज – नेहरू नगर
जैन समाज के प्रचार प्रसार प्रभारी अमरेश जैन ने बताया कि पर्युषण महापर्व के पहले दिन नेहरू नगर निवासी विमल चोपड़ा के घर के पास अस्थायी मंदिर जी में भगवान को विराजमान कर पूजन वेशभूषा में पाठ कर शुद्धि का कार्यक्रम संपन्न हुवा । विधि विधान से पूजा अर्चना कर भगवान जी को स्थापित की गई । पश्चात पक्षाल पूजा, प्रार्थना आरंभ हुई । सामूहिक जाप, दादा गुरुदेव इकतीसा का पाठ एवं अंत में विशेष आरती हुई । इसके पश्चात समाज की श्रीमती ज्योति चोपड़ा एवं श्रीमती शोभा मेहता द्वारा कल्प सूत्र का वाचन किया गया ।

रात्रि में समाज के सदस्यों ने मिलजुल कर भक्ति, वंदना, स्तवन का गायन किया । धार्मिक संगीत संध्या संपन्न हुई । जिसमें समाज के सदस्य सभी भक्ति में शामिल हुवे । चातुर्मास लगते ही जैन समाज के घरों में तप तपस्या का क्रम चालू हो जाता है जो कि पर्यूषण पर्व के दौरान उससे कई गुना ज्यादा तपस्वीओं की संख्या में बढ़ोतरी होती है । छोटे से लेकर बड़े तक अपने शक्तिनुसार आहार, संयम का पालन कर अपने आत्म शुद्धि के लिए सरल एवं कठिन तप तपस्या करते हैं । इन आठ दिनों में हरी सब्जी, जमीकंद का त्याग, सूर्यास्त पश्चात भोजन का त्याग रहता हैं ।

इस अवसर पर संरक्षक विमल चोपड़ा, नरेंद्र मेहता, अध्यक्ष सुभाष श्रीश्रीमाल, रुपेश गोलछा, जितेन्द्र जंदानी, अमित मेहता, संजय छाजेड़, अमित गोलछा, संगीता चोपड़ा, प्रमिला चोपड़ा, ममता डाकलिया, मीना मेहता, किरन चोपड़ा, भावना चोपड़ा, निशी चोपड़ा, मंजू गोलछा, प्रवीण गोलछा, अभिनव डाकलिया एवं सदस्य उपस्थित थे ।
जैन भवन टिकरापारा
समाज के लोगों द्वारा तप और साधना के इस पर्व पर अहमदाबाद से मीना बेन, राजू बेन, मिशी बेन के द्वारा कई धार्मिक आयोजन संपन कराए जा रहे। पर्युषण महापर्व का आज प्रथम दिवस बहुत ही धूमधाम से मनाया गया जिसमें समाज के सभी सम्माननीय श्रावक श्राविका बालक बालिका मिलकर सुबह भक्तांबर स्रोत का पाठन किया गया । उसके बाद अहमदाबाद से आई हुई बहनों ने भगवान के गुना के आधार पर व्याख्यान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म ही पाना बहुत ही दुर्लभ है और इससे भी अति दुर्लभ है मनुष्य योनि में जैन धर्म में जन्म होना। एक अरब जीव जंतु रोज जन्म लेते हैं।

जिसमें पशु पक्षी कीड़े मकोड़े के साथ-साथ मानव से सम्मिलित होता है तो इस एक अरब में मनुष्य जन्म पूरी दुनिया में 1000 मात्र होते हैं और इस 1000 मनुष्य में भी एक व्यक्ति ही जैन धर्म में जन्म लेता है अतः हम यह कह सकते हैं कि मनुष्य के अच्छे कर्मों के कारण ही जैन धर्म में जन्म मिलता है। और जब इतना सुंदर जैन धर्म हमें मिला है तो हम दुनिया की सुख सुविधाओं में खो चुके हैं और अपने आराध्य देव 24 तीर्थंकर को भूल चुके हैं जैन धर्म के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और अनगिनत पाप में विलुप्त हो रहे हैं। और इन पापों की निर्जरा करने के लिए ही पर्यूषण महापर्व आया है जिसमें हम सब को मिलकर आज ज्यादा से ज्यादा धर्म आराधना करना चाहिए। क्यूंकि मृत्यु का कोई भरोसा नहीं है किसी भी क्षण मृत्यु आ सकती है इसलिए रोज सुबह उठकर भगवान का उपकार मानना चाहिए।
और भगवान को धन्यवाद देवे।

वैशाली नगर – श्री जैन तेरापंथ समाज
वैशाली नगर निवासी हुल्लास चंद गोलछा के निवास में मंगलवार से पर्वाधिराज महापर्व पर्यूषण प्रारंभ हुआ।, आराधना विधिवत करने उपासिका बहन लक्ष्मी मेहता एवं भाग्यश्री सूर्या काआगमन हुआ है। समाज के लोगों ने दोनों उपासिकाओ का स्वागत किया। मंगलवार को ख़ाध्य-संयम दिवस है अतः आहार-संयम की प्रेरणा दी। इस महापर्व में अपनी शक्ति के अनुसार आध्यात्मिक साधना कर के मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ा जा सकता है। भगवान महावीर ने सधना के अनेक रास्ते बताए हैं अतः अपनी रुचि के अनुसार साधना करते हुए मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ें। पर्युषण में आए हुए उपासकों का ज़्यादा से ज़्यादा लाभ लें और ज़्यादा से ज़्यादा व्यक्तियों को प्रेरणा देकर प्रवचन आदि दैनिक कार्यक्रमों में जोड़ें।
खाद्य संयम दिवस
मंगलवार को खाद्य संयम दिवस के रूप में मनाया गया। जैन परिवारों के घर में तप तपस्या जिसमें चौविहार उपवास, उपवास, एकाशन, कम से कम द्रव्यों का भोग , 9 से ज्यादा द्रव्य का उपयोग नहीं किया।


