चार वर्षीय विशाल ने सुनाया नवकार महामंत्र, नवकार धाम ने किया सम्मानित — धर्म, संस्कार, परिवार और सेवा का अनूठा संगम बना पर्युषण

चार वर्षीय विशाल ने सुनाया नवकार महामंत्र, नवकार धाम ने किया सम्मानित — धर्म, संस्कार, परिवार और सेवा का अनूठा संगम बना पर्युषण

जोधपुर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 9 सितंबर । पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के पावन अवसर पर नवकार धाम, जोधपुर में इस वर्ष धर्म और संस्कार का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिल रहा है, जो नई पीढ़ी को आध्यात्मिकता से जोड़ने की दिशा में प्रेरणादायी पहल बन गया है। यहां पर्युषण के आठों दिनों को केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रखते हुए आत्मशुद्धि, पारिवारिक एकता, सेवा और संस्कार निर्माण का माध्यम बनाया गया है।

प्रातःकाल से लेकर दोपहर तक नवकार धाम का वातावरण भक्ति, मंत्र साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहता है। प्रतिदिन प्रातः 9 से 11 बजे तक परमात्मा की अष्ट प्रकारी पूजा एवं स्नात्र महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु परिवार सहित सहभागी होकर परमात्मा की आराधना, स्तुति एवं पूजा के माध्यम से पर्युषण की मूल भावना—संयम, साधना और आत्मचिंतन—से जुड़ रहे हैं।

जब नवकार महामंत्र की गूंज में शामिल हुए जैनत्तर बच्चे

पर्युषण महापर्व की सबसे विशेष एवं अभिनव पहल दोपहर 2 से 4 बजे तक होने वाला सामूहिक नवकार महामंत्र जाप है। इसकी खास बात यह है कि अनेक जैनत्तर परिवार भी अपने बच्चों के साथ इस आध्यात्मिक साधना में सहभागी हो रहे हैं।

दो घंटे तक जब बड़ी संख्या में बच्चे, युवा और श्रद्धालु एक साथ नवकार महामंत्र का जाप करते हैं, तो नवकार धाम का पूरा वातावरण मंत्रमय हो उठता है। बच्चों की मासूम आवाजों में गूंजता नवकार महामंत्र केवल वातावरण को भक्तिमय नहीं बनाता, बल्कि नई पीढ़ी के मन में एकाग्रता, शांति और संस्कारों के बीज भी रोप रहा है।

चार वर्षीय विशाल ने सुनाया नवकार महामंत्र, सभी हुए भाव-विभोर

सामूहिक नवकार महामंत्र जाप के दौरान चार वर्षीय बालक विशाल ने जिस सुंदर, स्पष्ट और भावपूर्ण ढंग से नवकार महामंत्र सुनाया, उसने उपस्थित श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इतनी कम उम्र में विशाल द्वारा नवकार महामंत्र का उत्कृष्ट उच्चारण सुनकर उपस्थित जन भाव-विभोर हो उठे।

विशाल की इस प्रतिभा और आध्यात्मिक रुचि को प्रोत्साहित करते हुए नवकार धाम की ओर से उसे सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने बालक की सराहना करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।

विशाल का यह प्रसंग पर्युषण महापर्व की उस भावना को और मजबूत करता है, जिसमें संस्कार उम्र के मोहताज नहीं होते। परिवार और समाज का सकारात्मक वातावरण मिले तो छोटी उम्र में भी बच्चे धर्म, मंत्र और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ सकते हैं।

डिजिटल दौर में संस्कारों का सुंदर अभियान

आज के डिजिटल युग में जब बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल, इंटरनेट और विभिन्न डिजिटल माध्यमों में व्यतीत हो रहा है, ऐसे समय में उन्हें परिवार के साथ बैठाकर नवकार महामंत्र की साधना से जोड़ना अपने आप में एक संस्कार अभियान है।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों पर धर्म थोपना नहीं, बल्कि उन्हें धर्म को समझने, महसूस करने और आध्यात्मिक वातावरण से स्वाभाविक रूप से जुड़ने का अवसर देना है।

धर्म के साथ उपयोगिता और सेवा की प्रभावना

नवकार धाम की इस पहल का एक और विशिष्ट पक्ष श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्रतिदिन नवकार महामंत्र जाप के पश्चात उपस्थित परिवारों एवं बच्चों को घरेलू उपयोग की उपयोगी वस्तुएं प्रभावना स्वरूप प्रदान की जा रही हैं।

धार्मिक आयोजन में सेवा और उपयोगिता का यह समावेश प्रभावना को एक नया अर्थ देता है। दैनिक जीवन में उपयोगी वस्तुओं के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि धर्म केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को उपयोगी और दूसरों के लिए सहायक बनाने का नाम भी है।

बच्चों के लिए यह पहल एक सहज सीख भी बन रही है—सच्ची धार्मिकता वहीं है, जहां भक्ति के साथ सेवा और संवेदना भी जुड़ी हो।

“नई पीढ़ी को धर्म से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता”

इस अवसर पर मुनि लाभ रुचि जी महाराज साहेब ने कहा कि पर्युषण केवल आठ दिनों का धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झांकने, जीवन को बेहतर बनाने और संस्कारों को मजबूत करने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने के लिए केवल उन्हें धर्म के बारे में बताना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को परिवार के साथ धर्म जीने का अवसर देना होगा।

मुनिश्री ने कहा कि नवकार महामंत्र का सामूहिक जाप मन को एकाग्रता, शांति और सकारात्मकता की ओर ले जाने का माध्यम बन सकता है। बच्चों की इसमें सहभागिता भविष्य के लिए एक सकारात्मक संस्कार निवेश है।

पूजा… जाप… सेवा—तीन आयामों में साकार हो रहा पर्युषण

नवकार धाम में पर्युषण महापर्व का आयोजन तीन महत्वपूर्ण आयामों को एक साथ लेकर चल रहा है—

प्रातः — परमात्मा की आराधना
दोपहर — नवकार महामंत्र की सामूहिक साधना
इसके पश्चात — सेवा एवं उपयोगी प्रभावना

यानी यहां पर्युषण पूजा से प्रार्थना, प्रार्थना से साधना और साधना से सेवा की ओर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

परिवार के साथ धर्म… संस्कारों की नई परंपरा

इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता बच्चों और युवाओं की सहभागिता है। जब पूरा परिवार एक साथ धार्मिक आयोजन में सहभागी होता है, तो धर्म केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं रहता, बल्कि पारिवारिक संस्कार बन जाता है।

नवकार धाम की यह पहल पर्युषण की मूल भावना—आत्मशुद्धि, संयम, अहिंसा, क्षमा, करुणा और आध्यात्मिक उन्नयन—को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास है।

नवकार धाम में प्रतिदिन बन रहा यह आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के लिए केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि मन को शांत करने, परिवार को जोड़ने, बच्चों को संस्कारित करने और जीवन को धर्ममय बनाने का अवसर बन रहा है।

धर्म जब परिवार के साथ जिया जाए, संस्कार जब बच्चों तक पहुंचे और साधना जब सेवा से जुड़े—तभी पर्व वास्तव में महापर्व बनता है।

नवकार धाम में मनाया जा रहा यह पर्युषण महापर्व इसी विचार को साकार करता हुआ धर्म और संस्कार की एक ऐसी नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें पूजा के साथ परिवार, साधना के साथ सेवा और परंपरा के साथ नई पीढ़ी का सुंदर जुड़ाव दिखाई दे रहा है।

चार वर्षीय विशाल का नवकार महामंत्र का भावपूर्ण उच्चारण और उसका सम्मान इस पूरे आयोजन की सबसे प्रेरक तस्वीर बनकर सामने आया—जहां एक नन्ही आवाज में परंपरा की गूंज और आने वाली पीढ़ी के संस्कारों की झलक दिखाई दी।

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