सेवा धर्म परम धर्म, सेवा करना सौभाग्य है, सधर्मी की सेवा में पीछे नहीं रहें- श्री विनय मुनि

सेवा धर्म परम धर्म, सेवा करना सौभाग्य है, सधर्मी की सेवा में पीछे नहीं रहें- श्री विनय मुनि

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 9 सितंबर।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज पयुर्षण पर्व के दुसरे दिन खचाखच भरे समोशरण मे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए आज कर सेवा खा मेवा पर भजन से बताया किसी के काम जो आये उसे इंसान कहते हैं उसे इंसान कहते हैं..जो व्यक्ति सच्ची सेवा करता है वो ही पर भव में मेवा खाता है उसका सौभाग्य होता है।सधर्मी की सेवा में पीछे नहीं रहे,अगर व्यक्ति में सेवा की भावना नहीं है तो पूरी व्यवस्था बिगाड देती है।


( साधुमार्गी के संत सतिंया सेवा में आगे हैं )
म सा ने कहा सेवा की मेवा वो ही खा सकता जिसके अंदर सेवा करने की भावना हो,हमारे पूज्य आचार्य श्री गणेशीलाल जी ने साधुमार्गी जैन संघ मे सुंदर व्यवस्था सेवा करने की कर दी आज वो सेवा की उपजाऊ भूमि बनकर तैयार कर दिया जिसमें कई साधु संत से आज सेवा का वो पौधारोपण करा उसका फल हमारे सामने है,

जो हमें ब्यावर में कांकरिया देलान में शासन दीपिका महासती श्री रोशन कंवर जी म सा की सेवा में पराग श्रीजी म सा जिनका विचरण का समय है सेवा करने में आगे हैं,आज पूरा विश्व सर्वप्रथम सेवा को महत्व देता है,उसमें ईसाई धर्म सबसे आगे हैं उनका धर्म ही सेवा करने के लिए है जैसे आज अस्पताल में क्रियशचन नर्स सबसे आगे रहती है।जैन दर्शन का मूल स्वरूप सेवा करने का होता है।


(सेवा का मेवा खाना ही सेवा का परम धर्म है)
म सा ने इससे पहले कहा जय जय बोलो अनादि मुनि राज की बौधी जगाई मगध महाराज की,यह पर्व अलौकिक है जो आत्मा को हल्की बनाने के लिए आता है,अठारह पापों का त्याग करने पर आत्मा हल्की हो जाती है,सेवा का मेवा खाना है तो सेवा धर्म ही परम धर्म है इसके करने से मेवा जरुर मिलेगा।

आज जैन धर्म के कितने टुकड़े हो गये पर सेवा का गुण वैसा का वैसा है,सेवा का आशीर्वाद पाना ही सच्ची सेवा होती है,इसका प्रकृति का पौधा भी हमें एक दुसरे की सेवा करने का मौका देती है जैसे आंख,कान, हाथ, पैर किडनी एक खराब होने पर दुसरी तैयार हो जाती है।


( आदर्श सबसे बड़ी चीज हैं। )
इससे पहले श्री दिव्यदर्शन जी म सा ने अंतगढ सूत्र का वाचन किया और कहा आदर्श सबसे बड़ी चीज है आदर्श से ही हमारी पहचान है यही हमें मोक्ष मार्ग पर ले जाता है, व्यक्ति का आचरण ही आदर्श से होता है, भगवान का एक वचन आनंद की अनुभूति कराता है।चिंता ही बिमारी का कारण बनता है,आत्म हत्या भव भव में दुख का कारण बनता हैं।अपने बच्चों को धर्म का संस्कार देवें बाहर जाते तो भी धर्म के साथ रहें।


( सयंम नहीं तो बारह व्रत लेवें )
इससे पहले महासती श्री प्रकृति श्री जी म सा ने अंतगढ सूत्र से प्रेरणा लेनी है जो सालो से सुनते आ रहे हैं अभी तक हमने क्या प्रेरणा ली, कृष्ण वासूदेव सयंम नहीं ले सकते पर लोगों को सयंम लेने की प्रेरणा दी,हम सयंम नहीं ले सके तो बारह व्रत अंगीकार करे। धन्य हे वह राजा महाराजा जिसने भगवान महावीर की वाणी सुनी,उनके भावों को समझकर सयंम ले लिया।


संचालन अध्यक्ष गोतम चंद चौधरी विजय औस्तवाल ने करते हुए बताया कल का प्रवचन प्रदर्शन का प्रदुषण व सायंकाल प्रतिक्रमण के बाद अमावस पर स्वाध्याय साधना होगी,रोज दोपहर को समता भवन मे भगवान महावीर का जीवन पर विस्तार से बताया जा रहा है।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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