ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 10 सितंबर।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज पयुर्षण पर्व के दुसरे दिन खचाखच भरे समोशरण मे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए। आज का विषय प्रदर्शन का प्रदुषण पर बताया हमे प्रदर्शन नहीं करके दर्शन में जीना होगा तभी हम सम्यक दर्शन का महामार्ग खोल पायेंगे। दर्शन एक प्रदर्शन है हमको दर्शन में जीना चाहिए यानि देखना श्रद्धा होता है स्वार्थ में नहीं देखकर आत्मा के दर्शन में रहना हैं।
(हर चीज में प्रदर्शन से टांडव होता)
म सा ने बताया जहां हर चीज में प्रदर्शन वहां हींसा का तांडव रहेगा, क्योंकि आज लोग प्रदर्शन के लिए फैशन में सड़को पर अकड़ कर चलते है फैशन का पिटारा सबसे बडी गंदगी से भरा होता है,यह विरासता का जंतु है,बाहरी प्रदर्शन करना धोका देने वाला है,भरा घडा़ आवाज नहीं करता आधा खाली डोलने लगता है यही प्रदर्शन का अधुरापन दरबार में दिखावा करता है और अंदर की शक्तियों को खोखला करके भीतर से लोभ मान माया का प्रदुषण बढाता जा रहा है।
(जितना प्रदर्शन उतनी समस्या)
म सा ने कहा प्रदर्शन हेतु साधु के वेश में रावण आ सकता है अपनी अपनी सीता को संभाल कर रखना है,जितना प्रदर्शन होगा उतनी समस्या तनाव बढ़ता जायेगा यही विचार हींसा तांडव कर देता है। निरंतर प्रदर्शन की भुख बढ़ती जा रही उसे निकालना होगा, जैसे सम्यक व्यक्ति स्थानक जाने से पहले जूते चप्पल के साथ साथ अहंकार को भी बाहर छोड़कर अंदर आता है।
आज व्यक्ति हर दरबार में मान सम्मान चाहता है,मंच माइक माला मिल गई समझो परमात्मा मिल गया। जनाना खजाना को छिपा कर रखें नहीं तो कभी भी खतरे की घंटी बज जायेगी।अपनी बुद्धि को गिरवी रख कर दुसरे की बुद्धि काम में नहीं लेवें।
(घर में भक्ति होने से संतों के चरण पड़ते)
म सा ने कहा नो तत्वों के जानकार प्रदर्शन प्रदुषण से दुर रहता है,जिस घर में प्रभु भक्ति हरि भक्ति नहीं साधु संतों के चरण नहीं पड़ते उस घर में राक्षस का निवास हो जाता है,भजन से कहा महावीर जैसों मुनिवर आंगन आयो है,सुमिरन करते करते किस रुप में भगवान मुझे मिल जाए उन्ही के दर्शन में मुझे जिना है,इस संसार से जाने से पहले अपनी विशेषता छोड कर जाये जिसे दुनिया याद रखें। प्रतिदिन कम होने वाली आयु होती है और प्रतिदिन बढ़ने वाली ईष्र्या होती है, साधना करने से अधुरापन समाप्त होगा।
(धन्य वो क्षण जब वैराग होगा)
इससे पहले श्री दिव्यदर्शन जी म सा ने भजन से कहा कांटों पर चलकर परमानंद पाना रे, शाश्वत सुख की कामना प्रत्येक व्यक्ति करता है,पर कुछ लोग ही सुख को प्राप्त कर लेते हैं, भगवान की वाणी अहसास कराती है कुछ पाना या कुछ छोड़ना तभी सयंम ले सकेंगे। संसार का विषय दुखी बनाता है,सुखी वो ही बन सकता जिसमें अनासक्ति के भाव हो।धन्य है वो क्षण कब भीतर में वैराग आये।आज पिता को दुखी देखकर बेटा पास नहीं जाता।
(वंदना आध्यात्मिक लाभ देती है।)
इससे पहले साध्वी श्री प्रखर श्रीजी म सा ने कहा भटकते भटकते यहां आ गये मेरे गुरुवर के चरण पा गये,हमारा जीवन घड़ी के समान है जो जन्म मरण का चक्र इनके कांटों की तरह चलता जा रहा है, मजा और सजा का महत्व समझे जन्म मरण की सजा को कम करके घंटा सकेंगे।पहले स्थानक सदैव श्रावको से भरा रहता था आज सिर्फ प्रवचन व पर्युषण पर ही भरता है,वंदना करना शरीर के साथ आध्यात्मिक लाभ देती है,त्याग करने से शरीर की इन्द्रियों से बाहर निकल सकते हैं।
संचालन अध्यक्ष गोतम चंद चौधरी व महामंत्री धर्मीचंद ओस्तवाल ने करते हुए बताया रविवार को दया व्रत का कार्य क्रम आनंद भवन मेवाड़ी गेट पर होगा,आज संजय श्रीश्रीमाल ने 27 के प्रत्याखान लिए और कई लोगों ने चार, तेला,बेला, उपवास के लिए गये।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

