कंचन देवी बोथरा एवं सुमित बोथरा के तेला की तपस्या, बड़ी तपस्या की ओर
बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 10 सितंबर । श्री जैन श्वेतांबर श्री संघ समाज का नेहरू नगर, स्थानकवासी उपाश्रय टिकरापारा, वैशाली नगर में तेरापंथ समाज के द्वारा परम पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व 2026 के गुरुवार को सामायिक दिवस के रूप में मनाया गया । सुबह विशेष पूजा, सामायिक, कल्प सूत्र का वाचन मे पांचवा सूत्र जिसमें पुष्पमाला के बारे में बताया गया ।
रात मे प्रतिक्रमण एवं रात्रि में बच्चे, महिलाओं, पुरुषों के द्वारा कई जैन धार्मिक भक्ति गीत प्रस्तुत किया गया। धार्मिक प्रतियोगिताएं भी कराई गई । सभी तपस्वियों की सुख साता पूछी गई ।

पर्युषण महापर्व के गुरुवार को नेहरू नगर स्थित में सुबह पूजन की वेशभूषा धारण कर स्तवन कुलनायक पूजा, मंगल दीपक सहित कई धार्मिक आयोजन संपन्न हुए । समाज की श्रीमती ज्योति चोपड़ा एवं श्रीमती शोभा मेहता द्वारा कल्प सूत्र का वाचन किया गया । पर्युषण पर्व में समाज के प्रत्येक घरों में तपस्या चल रही है। जिसमें एकासना, ब्यासना और भी कई कठिन तप किए जा रहे हैं । सभी तपस्वियों के तप की बहुत-बहुत समाज द्वारा अनुमोदना करते हुये तपस्या की सुख साता पूछी गई और उनके स्वास्थ्य की मंगलकामना सभी ने की । पर्युषण पर्व में प्रतिदिन बोली लगाई जा रही है । जिसमें शांति कलश, आरती, रात्रि में कुल नायक, दादा गुरुदेव एवं मंगल दीपक की आरती की बोली लेकर समाज के कई परिवार लाभ ले रहे ।
इस अवसर पर विमल चोपड़ा, श्रीमति कचरा बाई गोलछा, रूपेश गोलछा, मीनू मेहता, पुष्पा श्रीश्रीमाल, अपेक्षा चोपड़ा, राखी डाकलिया, किरण चोपड़ा, संजय छाजेड़, संगीता चोपड़ा, अमित गोलछा, मौली, पंखुड़ी, प्रखर सहित समाज के लोग उपस्थित थे।
जैन श्वेतांबर तेरापंथ वैशाली नगर
पर्यूषण पर्व पर धर्म विद विशारद तेरापंथ के आचार्य श्री महाश्रमण जी की महती कृपा से श्रीमति भाग्यश्री सूर्या एवं श्रीमती लक्ष्मी मेहता उपासिका बहने पधारी है। और उनके सानिध्य में निर्बाध रूप से हुल्लासचन्द गोलछा के निवास स्थान वैशाली नगर में पर्यूषण पर्व की आराधना हो रही है। पर्युषण महापर्व के अंतर्गत आज सामायिक दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। जैन धर्म में सामायिक का अर्थ है- समभाव में स्थित होकर राग-द्वेष का त्याग करना, आत्मचिंतन करना तथा मन, वचन और काया को संयमित रखना। सामायिक आत्मशुद्धि, अहिंसा, क्षमा और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ साधन है।
जैन परंपरा के अनुसार वर्तमान अवसर्पिणी काल का तीसरा आरा “सुषमा-दुष्षमा” कहलाता है।

यह वह काल था जब सुख और दुःख का मिश्रित स्वरूप विद्यमान था तथा धर्म की प्रभावना व्यापक रूप से होती थी। इसी आरे में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से लेकर तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ तक का अवतरण हुआ। भगवान महावीर स्वामी का जन्म तीसरे आरे के अंतिम चरण में हुआ, जिन्होंने अपने जीवन से अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मकल्याण का अमर संदेश दिया।
सामायिक दिवस हमें प्रेरणा देता है कि बदलते समय में भी समता, संयम, आत्मचिंतन और धर्मसाधना को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाकर व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन को श्रेष्ठ बनाएं।
श्रीमती कंचन देवी बोथरा एवं सुमित बोथरा के तेले (तीन दिन का उपवास) प्रदीप दुगड़, श्रीमती ललिका मालू के उपवास, दर्शना दुगड़ के एकासन की तपस्या है।
इस अवसर पर सुरेन्द्र मालू, चंद्र प्रकाश बोथरा, विनोद लूणीया, प्रदीप दुग्गड़, हनुमान बोथरा, सुमित बोथरा, भीखम दुग्गड़, मेल, रमेश नाहर, रमेश जैन, शीला छल्लानी अंजू गोलछा, लक्ष्मी जैन, ललिका मालू, भावना बोथरा, कुसुम लूणीया, अर्चना नाहर, शांति दुग्गड़, दर्शना दुगड़ कंचन बोथरा, निकिता गोलछा, इत्यादि उपस्थित थे।
स्थानकवासी- टिकरापारा
बिलासपुर श्री दशाश्रीमाणी स्थानकवासी जैन समाज के पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के दौरान प्रवचन में टिकरापारा स्थित उपाश्रय में स्वाध्याय वाचन हेतु अहमदाबाद से पधारी स्वाध्यायी बहनों के द्वारा धर्म आराधना एवं धार्मिक गेम खिलाया गया। जिसमें समाज के सभी वर्ग छोटे-बड़े बच्चे बच्चियों ने बहुत ही उत्साह पूर्वक इस धर्म की गंगा में डुबकी लगाई आज बहनों द्वारा भगवान महावीर के द्वारा लिखित जैन ग्रंथ आगम के बारे में विस्तृत रूप से प्रवचन दिया।

जिसमें कहा गया कि यह ग्रंथ लाखों करोड़ों अरबों रुपयो से भी कीमती है जैसे यदि किसी को मोतियों की माला मिल जाए तो वह यह समझता है कि यह माल का मैं क्या करूं और उसे फेंक देता है लेकिन बाद में जब वही माला किसी जौहरी के हाथ में मिलती है तो वह उसे संभाल कर रखता है क्योंकि उसे मालूम है यह माला लाखों, करोड़ों और अरबो रुपयो से भी महंगी है ठीक है।
इसी प्रकार हम अपने जैन ग्रंथ आगम जो कि भगवान ने हमारे लिए लिख कर रखा है उसे कभी पढ़ते ही नहीं है इसीलिए हमें इसका मूल्य नहीं मालूम है जबकि इस जैन ग्रंथ को हाथ में लेने पर ही और उसे शीश से लगाकर प्रणाम पर ही हमारे कई बुरे कर्मों का नाश हो जाता है ।

तो बताइए हम उसका वाचन करेंगे तो हमें कितना लाभ होगा। इसीलिए सभी से आग्रह किया गया कि आप सभी आगम जैन ग्रंथ का नियमित वचन करें।

प्रवचन में समाज के अध्यक्ष भगवान दास भाई सुतारिया, सचिव गोपाल भाई वेलाणी, प्रदीप दमाणी, योगेंद्र तेजाणी, दीपक गांधी, शरद दोशी, शैलेश तेजाणी, भावना दोशी, वीणा तेजाणी, मीणा तेजाणी, ज्योत्सना तेजाणी, मनीषा कपाड़िया, अर्चना वेलानी, एवं अधिक संख्या में समाज के सभी उपस्थित थे।
