ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 11 सितंबर।
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने पयुर्षण पर्व के दुसरे दिन खचाखच भरे समोहशरण मे समता भवन के प्रवचन हाल मे गुरु भगवंत उपाध्याय प्रवर को वंदन के बाद अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए आज का प्रवचन का सार भाग्य बदलना है तो अन्न दान करें,पहले अथिति को खिलावे फिर खुद खायें क्योंकि मेहमान आते ही भाग्य खुल जाता है।
म सा ने बताया जैसे रुस के सम्राट वाल्टर किंग ने किसान के घर अथिति बनकर रुके उनका आदर सम्मान देखकर उनकी पत्नी को महिला रत्न देकर पूरे नगर के लोगो के सामने सम्मान करके एक उदाहरण प्रस्तुत किया आज हम अपने नोकरो के साथ भेद भाव करके खाना खिलाते हैं।
(अन्नदान से किस्मत बदल जाती हें।)
म सा ने बताया प्रभु महावीर कहते हैं अन्न दान दो सुबह उठते ही अपने बच्चों को दान का संस्कार देवें ताकि वह दान का महत्व समझ सकेगा और बड़ा होकर दान देने की आदत पड़ सकेगी हमें भी उठते ही अन्न दान देने की आदत बना लेनी चाहिए,अन्न दान से किस्मत बदल जाती है जैसे चंदनवाला की बदली वह भगवान महावीर को बासी बाकला बहराने पर किस्मत बदल गयी और पुण्य कमा लिया यह सुपात्र दान का महत्व था।आज हमारी संस्कृति कहां जा रही है पहले एक लोटे से काम चल जाता आज बाल्टी से काम नहीं चलता।
इससे पहले म सा ने कहा जब भी हो गुरुदेव के दर्शन समझो तीर्थ हो गया,हमें भगवान महावीर के सधर्मी बने उनके जयकारे लगाने से काम नहीं चलेगा उनके सिद्धांतों के साथ साथ चलना होगा। भगवान महावीर के एक शिष्य का नियम है था जब तक किसी अथिति को खाना खिलाते बिना नहीं खाऊगां,आज हम पहले पेट पूजा की सोचते हैं पहले पेट पूजा फिर दूजा।
(सुपात्र दान महावीर बनने की नींव है।)
म सा ने समझाया सुपात्र दान पुण्य का होता है, पुण्य खिलाओ सुपात्र दान दो इसी से समकित की प्राप्ति होगी यह महावीर बनने की नींव है,व्यक्ति विकास चाहता जहां जाऊं वहां सम्मान हो जहां जाकर खड़ा हो वही सम्मान मिले,जहां पेर की ठोकर लगे वहां सोना उगलने लगे,आज हम दिन को दो बजे रात को नो बजे खाना खाते हैं आज हमारे विचारों से प्रकृति भी प्रदुषण करती जा रही है।हमें समझाने के लिए ब्यावर में संत आये है, भजन से कहा राम गुरु की कृपा बरसी हम आये है संत प्रवासी।
(आदर सम्मान पुण्य खिलाता है)
म सा ने कहा पुण्य खिलाने वाला होता है,आदर और सम्मान को समझें,आदर सत्कार सम्मान से करें, प्रत्येक व्यक्ति में गुण होना चाहिए,हम खूब खाना इटली डोसा सवंत्सरी को करना पोसा,हमारे भाग्य तभी खुलेंगे जब घर में गुरु राम आयेंगे भजन से कहा मेरी झोपडी के भाग्य आज खुल जायेंगे राम आयेंगे राम आयेंगे यह तभी संभव है जब हम सयंम लेंगे।
(धर्म उत्कृष्ट मंगल है।)
इससे पहले राम सेना के बाल मुनि श्री रामगिरी जी म सा ने भजन से समझाया ओ पुण्य से जिन धर्म मिला ये सौभाग्य हमारा है,करें निरंतर धर्म ध्यान मोनो ऐसा लक्ष्य हमारा है,धन दौलत परिजन से बढ़कर एक ही धर्म प्यारा है। गुरु भगवंतों का उपदेश आत्म कल्याण का होता है, धर्म क्या है? धर्म उत्कृष्ट मंगल है जो धर्म को धारण उसका मंगल है,आत्म समाधि प्राप्त कराता है, आज व्यक्ति धर्म को व्यापार समझने लगे,अहिंसा से अनन्त सुख प्राप्त होता है।
संचालन महामंत्री धर्मीचंद ओस्तवाल ने करते हुए कहा आज संजय श्रीश्रीमाल ने 28 व ज्ञानचंद सोनी ने 8 के प्रत्याखान लिए रविवार को दया व्रत का दिन रहेगा दया का प्रोग्राम आंनद भवन में होगा।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।
पुण्य से जिन धर्म मिला ये सौभाग्य हमारा..
पुण्य कमाओ खाओ और खिलावो तभी भाग्य बदलेगा,सुपात्र दान अन्न दान सबसे पहले करें।
(समता भवन मे शनिवार का प्रवचन वाणी है जन कल्याणी पर होगा )
आचार्य श्री रामेश के अज्ञानुवर्तीय शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज पयुर्षण पर्व के दुसरे दिन खचाखच भरे समोहशरण मे समता भवन के प्रवचन हाल मे गुरु भगवंत उपाध्याय प्रवर को वंदन के बाद अपनी अमृत देशना शुरु करते हुए आज का प्रवचन का सार भाग्य बदलना है तो अन्न दान करें,पहले अथिति को खिलावे फिर खुद खायें क्योंकि मेहमान आते ही भाग्य खुल जाता है।
म सा ने बताया जैसे रुस के सम्राट वाल्टर किंग ने किसान के घर अथिति बनकर रुके उनका आदर सम्मान देखकर उनकी पत्नी को महिला रत्न देकर पूरे नगर के लोगो के सामने सम्मान करके एक उदाहरण प्रस्तुत किया आज हम अपने नोकरो के साथ भेद भाव करके खाना खिलाते हैं।
(अन्नदान से किस्मत बदल जाती हें।)
म सा ने बताया प्रभु महावीर कहते हैं अन्न दान दो सुबह उठते ही अपने बच्चों को दान का संस्कार देवें ताकि वह दान का महत्व समझ सकेगा और बड़ा होकर दान देने की आदत पड़ सकेगी हमें भी उठते ही अन्न दान देने की आदत बना लेनी चाहिए,अन्न दान से किस्मत बदल जाती है जैसे चंदनवाला की बदली वह भगवान महावीर को बासी बाकला बहराने पर किस्मत बदल गयी और पुण्य कमा लिया यह सुपात्र दान का महत्व था।आज हमारी संस्कृति कहां जा रही है पहले एक लोटे से काम चल जाता आज बाल्टी से काम नहीं चलता।
इससे पहले म सा ने कहा जब भी हो गुरुदेव के दर्शन समझो तीर्थ हो गया,हमें भगवान महावीर के सधर्मी बने उनके जयकारे लगाने से काम नहीं चलेगा उनके सिद्धांतों के साथ साथ चलना होगा। भगवान महावीर के एक शिष्य का नियम है था जब तक किसी अथिति को खाना खिलाते बिना नहीं खाऊगां,आज हम पहले पेट पूजा की सोचते हैं पहले पेट पूजा फिर दूजा।
(सुपात्र दान महावीर बनने की नींव है।)
म सा ने समझाया सुपात्र दान पुण्य का होता है, पुण्य खिलाओ सुपात्र दान दो इसी से समकित की प्राप्ति होगी यह महावीर बनने की नींव है,व्यक्ति विकास चाहता जहां जाऊं वहां सम्मान हो जहां जाकर खड़ा हो वही सम्मान मिले,जहां पेर की ठोकर लगे वहां सोना उगलने लगे,आज हम दिन को दो बजे रात को नो बजे खाना खाते हैं आज हमारे विचारों से प्रकृति भी प्रदुषण करती जा रही है।हमें समझाने के लिए ब्यावर में संत आये है, भजन से कहा राम गुरु की कृपा बरसी हम आये है संत प्रवासी।
(आदर सम्मान पुण्य खिलाता है)
म सा ने कहा पुण्य खिलाने वाला होता है,आदर और सम्मान को समझें,आदर सत्कार सम्मान से करें, प्रत्येक व्यक्ति में गुण होना चाहिए,हम खूब खाना इटली डोसा सवंत्सरी को करना पोसा,हमारे भाग्य तभी खुलेंगे जब घर में गुरु राम आयेंगे भजन से कहा मेरी झोपडी के भाग्य आज खुल जायेंगे राम आयेंगे राम आयेंगे यह तभी संभव है जब हम सयंम लेंगे।
(धर्म उत्कृष्ट मंगल है।)
इससे पहले राम सेना के बाल मुनि श्री रामगिरी जी म सा ने भजन से समझाया ओ पुण्य से जिन धर्म मिला ये सौभाग्य हमारा है,करें निरंतर धर्म ध्यान मोनो ऐसा लक्ष्य हमारा है,धन दौलत परिजन से बढ़कर एक ही धर्म प्यारा है। गुरु भगवंतों का उपदेश आत्म कल्याण का होता है, धर्म क्या है? धर्म उत्कृष्ट मंगल है जो धर्म को धारण उसका मंगल है,आत्म समाधि प्राप्त कराता है, आज व्यक्ति धर्म को व्यापार समझने लगे,अहिंसा से अनन्त सुख प्राप्त होता है।
संचालन महामंत्री धर्मीचंद ओस्तवाल ने करते हुए कहा आज संजय श्रीश्रीमाल ने 28 व ज्ञानचंद सोनी ने 8 के प्रत्याखान लिए रविवार को दया व्रत का दिन रहेगा दया का प्रोग्राम आंनद भवन में होगा।
संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

