दादाबाड़ी में भव्यता के साथ हुआ परमात्मा का जन्मवांचन, 14 महास्वप्नों की लगी मंगल बोलियां

दादाबाड़ी में भव्यता के साथ हुआ परमात्मा का जन्मवांचन, 14 महास्वप्नों की लगी मंगल बोलियां

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 12 सितंबर । पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के पावन अवसर पर आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत 12 सितंबर को श्री जिनकुशल सूरि प्रवचन मंडप, दादाबाड़ी, एमजी रोड में परमात्मा का जन्मवांचन भव्य धार्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। सुबह 9 बजे से आयोजित इस विशेष आयोजन में बड़ी संख्या में श्रीसंघ के श्रद्धालु शामिल हुए। परमात्मा के जन्म प्रसंग के वाचन के साथ 14 महास्वप्नों की मंगल बोलियां भी लगाई गईं।

जन्मवांचन के दौरान दादाबाड़ी का वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर रहा। परमात्मा के जन्म प्रसंग का वाचन होते ही श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। वीर प्रभु महावीर के पालना जी को बधाने का परम सौभाग्य श्रीमती कुमकुम, अनुराग, नीति, वंसिका, पृषा एवं एकाग्र बरड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। बरड़िया परिवार ने श्रद्धा और भक्ति के साथ पालना जी बधाकर धर्मलाभ लिया। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी पावन प्रसंग की अनुमोदना की।

जैन परंपरा में तीर्थंकर के जन्म से पूर्व माता को दिखाई देने वाले 14 महास्वप्नों का विशेष महत्व माना गया है। इन महास्वप्नों को तीर्थंकर के असाधारण व्यक्तित्व, आध्यात्मिक सामर्थ्य और लोककल्याणकारी जीवन के शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है।

14 महास्वप्नों में हाथी शक्ति, स्थिरता और दृढ़ता का प्रतीक है, जबकि बैल धर्म, धैर्य, परिश्रम और सहनशीलता का संदेश देता है। सिंह साहस, निर्भयता और नेतृत्व का प्रतीक माना गया है। लक्ष्मी सौभाग्य, समृद्धि और शुभता का संकेत देती हैं। पुष्पमाला यश, सम्मान और सद्गुणों की सुगंध का प्रतीक है।

पूर्ण चंद्रमा शांति, शीतलता और सौम्यता का संदेश देता है, वहीं सूर्य ज्ञान के प्रकाश और अज्ञान के नाश का प्रतीक माना जाता है। ध्वजा विजय, प्रतिष्ठा और धर्म प्रभावना का संकेत है। कलश मंगल, पवित्रता और पूर्णता का प्रतीक है।

कमल सरोवर संसार में रहते हुए भी मोह-माया से निर्लिप्त रहने और वैराग्य की प्रेरणा देता है। क्षीर समुद्र विशालता, गहराई और व्यापक ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। दिव्य विमान उच्च आध्यात्मिक स्थिति और दिव्यता का संकेत है। रत्नों की राशि अनमोल गुणों और आध्यात्मिक संपदा को दर्शाती है, जबकि धूम्ररहित अग्नि शुद्ध तेज, प्रकाश और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।

जन्मवांचन के दौरान श्रद्धालुओं के सामने इन महास्वप्नों के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को रखा गया। इसके साथ ही 14 महास्वप्नों की मंगल बोलियों का लाभ लेने का अवसर भी रहा। समाजजनों ने श्रद्धा और अनुमोदना के साथ बोलियों में सहभागिता की।

कार्यक्रम प. पू. कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणा श्रीजी म.सा. की विदुषी शिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका प. पू. मंजुलाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा के सान्निध्य में संपन्न हुआ।

श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट, रायपुर के अध्यक्ष विजय कांकरिया (कन्नू), कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदूमुथा, राजेंद्र गोलछा (हेमू) और उज्ज्वल झाबक सहित चातुर्मास समिति के पदाधिकारियों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया। भव्य धार्मिक आयोजन के संपन्न होने पर श्रीसंघ में उत्साह और भक्ति का माहौल रहा।

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