पर्व दसलक्षण पर्व के छठवें दिन “उत्तम संयम” दिवस… धार्मिक कार्यक्रमों की कड़ी मे 8 कर्मो के बारे मे नाट्य मंचन

पर्व दसलक्षण पर्व के छठवें दिन “उत्तम संयम” दिवस… धार्मिक कार्यक्रमों की कड़ी मे 8 कर्मो के बारे मे नाट्य मंचन

बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 21 सितंबर । दिगम्बर जैन समाज के सबसे बड़े पर्व दसलक्षण पर्व के छठवें दिन “उत्तम संयम” धर्म के दिन धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में कई धार्मिक प्रतियोगिता धर्म के गणितज्ञ का आयोजन किया गया। पर्युषण पर्व धार्मिक कार्यक्रमों की कड़ी मे 8 कर्मो के बारे मे नाट्य मंचन हुवा। पूज्य 105 अकम्पमति माता जी एवं अचलमति माता जी के सानिध्य में धार्मिक कार्यक्रम एवं प्रवचन संपन्न हो रहे।

“प्रवचन”
जैन धर्म के पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व छठवें दिवस “उत्तम संयम धर्म” के दिन पूज्य 105 अकम्पमति माता जी एवं अचलमति माता जी के सानिध्य में हो रहे धार्मिक आयोजन मे आयोजित धर्म सभा में इस धर्म की व्याख्या करते हुए कहा प्राणी-रक्षण और इन्द्रिय दमन करना संयम है। स्पर्शन, रसना, घ्राण, नेत्र, कर्ण और मन पर नियंत्रण करना इन्द्रिय-संयम है। पृथ्वीकाय, जलकाय, अग्निकाय, वायुकाय, वनस्पतिकाय और त्रसकाय जीवों की रक्षा करना प्राणी संयम है। इन दोनों संयमों में इन्द्रिय संयम मुख्य है क्योंकि इन्द्रिय संयम प्राणी संयम का कारण है, इन्द्रिय संयम होने पर ही प्राणी संयम होता हैं, बिना इन्द्रिय संयम के प्राणी संयम नहीं हो सकता।

तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन
पर्व के छठवें दिन “उत्तम संयम” पर तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन रंजना जैन, उषा जैन, शकुन जैन, निधि जैन, शालिनी जैन, कामना जैन, सरिता जैन, सुनीता जैन, संध्या जैन, सुलेखा जैन ने किया। वाचन से पूर्व सभी ने अभिषेक शांति धारा किया।

8 कर्मो का नाट्य मंचन
पर्युषण पर्व धार्मिक कार्यक्रमों की कड़ी मे 8 कर्मो के बारे मे नाट्य मंचन किया गया। कार्यक्रम के संचालन एवं निर्देशन सुप्रीत जैन एवं श्रुति जैन ने किया। उन्होंने 8 कर्मो के बारे बताया कि क्या आप जानना चाहते हैं हमारे आ कर्म जिसमें किसी को एक बार में सब याद हो जाता है किसी को कई बार में भी समझ नहीं आता, किसी के पास खूब धन है और कोई प्रयास करने के बाद भी काम नहीं प रहा, कोई कुछ भी कार्य करे सफल होता है कोई हर बार विफल या अड़चन का सामना करता है, कोई उच्च कुल तो कोई नीच में क्यों जन्म लेता है, कोई सालों तक जिंदा रहता है और कोई बचपन में ही मर जाता है, किसी से बहुत स्नेह और किसी से बहुत द्वेष होता है, कोई देख नहीं सकता, अपंग विकलांग या रोग ग्रसित होता है तो कोई पूर्ण स्वस्थ रहता है ।

इन 8 कर्मो को बहुत एकदम सरल शब्दों में विद्यासागर भवन, क्रांतिकार में नाट्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। नाट्य के माध्यम से 8 कर्मो का किरदार सुप्रीत जैन, श्रुति जैन, सपना जैन, प्रीति जैन, अमृता जैन, एकता जैन, प्रिया जैन, अर्पणा जैन, सोनम जैन, दीक्षा, बच्चों में अणिमा जैन, आर्या जैन, प्रत्युष जैन, परीशा जैन, भव्य जैन, आरवी जैन, अरणनेश जैन, अनवी जैन ने निभाया ।

“द्वारिका दहन और कृष्ण का मरण” की प्रस्तुति आज
धार्मिक कार्यक्रमों मे मंगलवार को क्रांति नगर जैन भवन में रात्रि में लेखन और निर्देशन में मंगला जैन द्वारा “द्वारिका दहन और कृष्ण का मरण” पर एक प्रस्तुति जैनत्व ग्रुप द्वारा किया जाएगा।

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