‎स्वयं को जानने के लिए सिर्फ  पांच मिनट दो-मौलिकप्रभ जी

‎स्वयं को जानने के लिए सिर्फ  पांच मिनट दो-मौलिकप्रभ जी


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‎राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 30 अक्टूबर । ” किसी भी कार्य की कहीं ना कहीं से शुरुआत करनी ही होती है। अपने को भी जानने का प्रयास करो। पुरुषार्थ करो और सिर्फ पांच मिनट अपने आप को जानने के लिए दो। “उक्त उदगार खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य मौलिकप्रभ सागर जी ने  व्यक्त किए।
‎              मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में आज मुनि श्री मौलिकप्रभ सागर जी ने फरमाया कि इस दुनिया में हम आए हैं तो कुछ न कुछ हमें करना ही है। हम स्वयं को जाने कि हम इस दुनिया में क्यों आए हैं?और उसी हिसाब से कार्य करें ताकि हमारा यहां आना सफल हो सके । उन्होंने कहा कि हम सब कहते हैं कि यह मेरा है – यह मेरा है किंतु ऐसा कुछ भी नहीं है।इस दुनिया में मेरा कुछ भी नहीं है।
‎                मुनि श्री मौलिकप्रभ सागर जी ने कहा कि हमारे अंदर भावनाएं भरी पड़ी है, कषाय भरे पड़े हैं। हमें अपने स्वभाव को पहचानने की जरूरत है और स्वभाव को पहचान कर कषायों को दूर करना है। केवल पांच मिनट का समय अपने लिए दो और चिंतन करो। अपने कषायों को दूर करो और अंतर की दुनिया में खो जाओ। आप जिस लिए इस दुनिया में आए हो उस कारण को पूरा करो।
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