पुणे महाराष्ट्र (अमर छत्तीसगढ़) 1 जुलाई।
जीवन में हमेशा डेवलपमेंट (विकास) और करेक्शन (सुधार) — ये दो सूत्र बनाए रखो, तो तुम्हारी जिंदगी का रास्ता तुम्हें तुम्हारे सपनों की मंज़िल तक अवश्य पहुँचाएगा।
तुम्हारा वर्तमान चाहे जैसा भी हो, भूतकाल (पास्ट) चाहे कैसा भी रहा हो — उसमें भी भविष्य का निर्माण संभव है। यह विश्वास अपने मन में रखो। और उस मंज़िल तक पहुँचने के लिए यदि अपने आचरण और व्यवहार में कुछ सुधार (करेक्शन) करने की ज़रूरत हो, तो उसे निश्चित रूप से करो।
ऐसी सोच रखने वाले नरक और तिर्यंच गति के जीव भी एकभवतारी बन सकते हैं — यही मंगलमय संदेश उपाध्याय भगवंत परम पूज्य श्री प्रवीण ऋषिजी म.सा. ने आज परिवर्तन चातुर्मास धर्म जागरण यात्रा के दौरान सुखसागर नगर में उपस्थित श्रद्धालुओं को दिया।
पुणे की यह उपनगरों की विहार यात्रा मेरे लिए सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि तीर्थयात्रा है; क्योंकि भगवान महावीर ने साधु, साध्वी, श्रावक व श्राविकाओं को तीर्थ कहा है।
मेरा यह एक माह से चल रहा तीर्थयात्रा का सफर पुणे आदिनाथ श्री संघ तथा चातुर्मास समिति के कुशल आयोजन में भावपूर्ण रूप से आगे बढ़ रहा है — ऐसे विचार आज उपाध्याय भगवंत ने व्यक्त किए।
✍🏻 प्रकाश कोचेटा — नवकार मीडिया

