पूना महाराष्ट्र (अमर छत्तीसगढ़) ,4 जुलाई। राष्ट्रसंत आचार्य सम्राट श्री आनंदऋषिजी म.सा. की पावन भूमि पूना में शुक्रवार को आस्था ओर भक्ति का नजारा था। पूना के कात्रज दत्त नगर आनंद दरबार श्रीसंघ के तत्वावधान में आगम पर्व-2025 के लिए मरूधरा मणि महासाध्वी जैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या सरलमना जिनशासन प्रभाविका वात्सल्यमूर्ति इन्दुप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा ने भव्य गरिमापूर्ण मंगलप्रवेश किया। इस अवसर पर मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के शिष्य, मरूधरा भूषण, शासन गौरव, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री सुकन मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा. एवं सेवा रत्न श्री हरीशमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त होने से चतुर्विद संघ का समागम भी हो गया।
संयम साधना जीवन के 44 वर्ष में पहली बार महाराष्ट्र की पावन धरा पर वर्षावास करने जा रहे वात्सल्यमूर्ति इन्दुप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा ने भगवान महावीर व जिनशासन के जयकारों की गूंज के बीच आनंद दरबार में मंगल प्रवेश किया।
महासाध्वी मण्डल की आगवानी व अभिनंदन आनंद दरबार श्रीसंघ के अध्यक्ष श्री बाळासाहेब धोका, आगम पर्व समिति अध्यक्ष उम्मेद धोका के नेतृत्व में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ आनंद दरबार के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ महिला मण्डल, बहु मण्डल, युवा मण्डल के सदस्यों ने किया।
मंगलप्रवेश के बाद सुमनताई हनमंराव देशमुख सांस्कृतिक भवन का उद्घाटन मुख्य अतिथि दानवीर भामाशाह प्रकाशजी धारीवाल, समारोह के गौरव बालचंदजी संचेती,दत्तात्रयजी देशमुख एवं राजश्री सुनीलजी पारख ने किया। इस भवन का निर्माण श्रीमती सुमन ताई, दत्तात्रयजी, सुरेशजी,मनोजजी देशमुख परिवार के सहयोग से हुआ।

मंगल प्रवेश कार्यक्रम में सेवारत्न हरीशमुनिजी म.सा. ने चातुर्मास तप त्याग से परिपूर्ण रहे ऐसी मंगलकामनाएं करते हुए वरिष्ठ प्रवर्तक गुरूदेव रूपचंदजी म.सा. के परमभक्त समाजसेवी रसिकलालजी धारीवाल की सेवाभक्ति की सराहना करते हुए कहा कि उनकी भावना घोड़नदी में गुरूदेव का चातुर्मास कराने की थी लेकिन वह पूरी नहीं हो पाई पर अब गुरूदेव के शिष्य महाराष्ट्र में जन-जन तक उनका मानव सेवा व जीवदया का संदेश पहुंचा रहे है।
महासाध्वी इन्दुप्रभाजी ने कहा कि हमारी काया एक खेत के समान है ओर मन किसान है। इसमें पुण्य ओर धर्म रूपी बीज बोने है। जिनवाणी श्रवण करने के साथ सभी को धर्म साधना के प्रति समर्पित होकर इस चातुर्मास को सफल बनाना है।

रोचक व्याख्यानी प्रबुद्ध चिन्तिका डॉ. दर्शनप्रभाजी म.सा., ने कहा कि महाराष्ट्र महान संतों की पावन भूमि है। यहां जलगांव में खादीधारी गणेशमुनिजी म.सा. की समाधि है तो घोड़नदी त्रिलोकऋषि म.सा. की जन्मभूमि है
जिन्होंने ओर रत्नऋषिजी म.सा. ने श्रमण संघ को आंनदऋषिजी म.सा. जैसे शिष्य के रूप में महान जिनशासन आराधक संत प्रदान किए। इसी तरह धुलिया रचनाकार अमोलकऋषिजी म.सा. की भूमि रही जिन्होंने आगम का हिंदी अर्थ किया। ये तीनो संत ब्रह्ा,विष्णु, महेश जैसे हो गए जिन्होंने महाराष्ट्र सहित पूरे देश में धर्म प्रभावना की।
तत्वचिन्तिका आगम रसिका डॉ. समीक्षाप्रभाजी म.सा. ने प्रवेश का अर्थ समझाते हुए कहा कि प्र का मतलब प्रार्थना,प्रवचन, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान से है। इसी तरह वे का मतलब वेश से है यानि सामायिक की वेशभूषा में रहना है। श का अर्थ आनंद बाबा के आराधक बन धर्म की शरण लेने से है।

उन्होंने चार माह अधिकाधिक धर्म ध्यान करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि इस अवधि में जो प्रतिक्रमण कंठस्थ कर लेगा उसका श्रीसंघ द्वारा सम्मान किया जाएगा। समारोह में विद्याभिलाषी हिरलप्रभाजी म.सा. ने भजन की प्रस्तुति दी। सेवाभावी दीप्तिप्रभाजी म.सा.का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।
युवा तपस्वी मुकेशमुनिजी म.सा. ने मांगलिक प्रदान करते हुए चातुर्मासिक सफलता के लिए मंगलभावनाएं व्यक्त की। समारोह में आनंद दरबार श्रीसंघ के अध्यक्ष बाळासाहेब धोका ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सभी का इस चातुर्मास को सफल बनाने में मिल रहे सहयोग के लिए आभार जताया।

उन्होंने बताया कि श्रमण संघीय आचार्य सम्राट पूज्य आनंदऋषिजी म.सा.के पगलिए जो 14 चिन्हों से सम्पन्न है उन पगलियों की 10 से 17 जुलाई तक पूना के विभिन्न क्षेत्रों में पालकी निकाली जाएगी। इसके बाद 18 जुलाई को इन्हें पूर्ण आस्था ओर विधि विधान के साथ महोत्सव आयोजित कर आनंद दरबार में स्थापित किया जाएगा।
वरिष्ठ समाजसेवी प्रकाशजी धारीवाल ने चातुर्मासिक सफलता की शुभकामनाएं देते हुए पूज्य गुरूदेव रूपचंदजी म.सा. के प्रेरणादायी जीवन के बारे में चर्चा की ओर कहा कि ऐसे महान संतों का जीवन हमारे लिए आदर्श है।

समारोह में बिबेववाड़ी श्रीसंघ के अध्यक्ष पोपटलाल ओस्तवाल, सुनील पारख, दिलीप रायसोनी, अनिल नाहर, नितिन चौरड़िया,सुमतिलाल लोढ़ा,गणेश ओस्तवाल, फूलचंद बांठिया,प्रकाश बोरा, अशोक सालेचा सहित पूना जैन समाज के कई गणमान्यजन मौजूद थे। आगम पर्व समिति अध्यक्ष श्री उम्मेद धोका ने आगम पर्व-2025 के तहत होने वाले धर्म ध्यान से परिपूर्ण आयोजनों के बारे में बताया।
कार्यक्रम का संचालन सौरभ धोका ने किया। अतिथियों का स्वागत श्रीसंघ द्वारा किया गया। समारोह में मुंबई,नंदुरबार,झिंटिया, सिन्नर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रावक-श्राविकाएं भी मौजूद रहे ओर आनंद दरबार संघ को चातुर्मासिक सफलता की शुभकामनाएं दी।

मंगल प्रवेश यात्रा में गूंजते रहे जयकारे
सरलमना जिनशासन प्रभाविका वात्सल्यमूर्ति इन्दुप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा के आगम पर्व-2025 के लिए मंगल प्रवेश यात्रा में भगवान महावीर के साथ जिनशासन एवं जैन धर्म के जयकारों की गूंज रही। मंगल प्रवेश जुलूस में सबसे आगे हाथों में मंगल कलश लिए श्राविकाएं चल रही थी। महासाध्वी मण्डल के पीछे हाथों में जैन धर्म ध्वजा लहराते हुए एवं जयकारे लगाते हुए श्रावक चल रहे थे। युवक मण्डल,महिला मण्डल एवं बहु मण्डल के सदस्य भी उत्साह के साथ शोभायात्रा में सहभागिता निभा रहे थे।

साध्वी इन्दुप्रभाजी का महाराष्ट्र में पहली बार वर्षावास
संयम साधना जीवन के 44 वर्ष पूर्ण कर चुके महासाध्वी इन्दुप्रभाजी म.सा. का यह महाराष्ट्र क्षेत्र में पहला वर्षावास हो रहा है। वर्ष 1981 में पाली में पहला चातुर्मास करने वाली महासाध्वी इन्दुप्रभाजी म.सा. ने अब तक राजस्थान से बाहर मात्र एक चातुर्मास हरियाणा में ओर एक पिछले वर्ष गुजरात के सूरत में किया है।
महाराष्ट्र क्षेत्र विशेषकर पूना के श्रावक-श्राविकाएं लंबे समय से महासाध्वी इन्दुप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा की सेवा में चातुर्मास की विनती लेकर प्रस्तुत हो रहे थे। वर्ष 2025 का वर्षावास मिलने से पूना के श्रावक-श्राविकाओं की भावना फलीभूत हुई है।
( निलेश कांठेड़ )

