नगपुरा में चातुर्मास प्रवेशोत्सव… आत्म के कल्याण हेतु महापर्व है चातुर्मास- साध्वी लब्धियशा

नगपुरा में चातुर्मास प्रवेशोत्सव… आत्म के कल्याण हेतु महापर्व है चातुर्मास- साध्वी लब्धियशा

नगपुरा (अमर छत्तीसगढ) 6 जुलाई। श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ नगपुरा में रविवार प्रात: 9 बजे देशभर से आए श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति में पपू साध्वी श्री लक्ष्ययशा श्रीजी, साध्वी श्री लब्धियशाश्री जी, साध्वी श्री आज्ञायशा श्री जी मसा सहित लगभग 200 आराधकों का विधिवत् चातुर्मास प्रवेश हुआ।


प्रातः 5 बजे महाप्रभाविक भक्तामर स्तव, सामूहिक चैत्यवंदन, तीर्थपति की 108 वासक्षेप पूजा, श्री वर्धमान शक्रस्तव स्तोत्र के साथ महाभिषेक पूजा अर्चना पश्चात् प्रवेशोत्सव का वरघोड़ा प्रारम्भ हुआ। श्री गौतम-लब्धि भक्ति मंडप से परमात्मा के रथ, बग्गी, बैड, अश्वदल, वाद्ययंत्र, अनेक मंगल द्रव्य, अष्टमंगल, घोषदल के साथ प्रवेश जुलूस में सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे।

तीर्थ प्रवेशद्वार पर ट्रस्ट मंडल के अध्यक्ष गजराज पगारिया, मैनेजिंग ट्रस्टी पुखराज दुगड़ सहित सभी ट्रस्टीयों ने पूज्य गुरु भगवतों एवं चातुर्मास आराधकों का गुहुली कर स्वागत किया। परमात्मा के दर्शन पश्चात श्री हीरसूरिजी प्रवचन मंडप में धर्म सभा आयोजित हुई। गुरू भगवंतो को वंदन करते हुए श्री जगद् गुरु हीर सूरीश्वरजी अहिंसा संगठन हैद्राबाद ने गुरुपूजा का लाभ लिया ।


विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी लब्धियशाश्रीजी ने कहा कि चातुर्मास चतुर लोगों के मास है! चातुर्मास के इन चार महीनों में चतुर लोग आत्म कल्याण का पुरूषार्थ कर लेते हैं! जो पदार्थ में नहीं बल्कि परमात्मा में अनुरक्त होते हैं, वे चतुर कहलाते हैं I


चातुर्मास पर से स्व में, ममता से समता में, राग से विराग में आने का महापर्व है! आत्मा में वास का अवसर ही चातुर्मास होता है I बाहर से छूटने पर ही भीतर से जुड़ा जा सकता है ! चातुर्मास प्रवेश का यह अवसर हम सभी के लिए आत्मा के शुद्ध स्वरूप में प्रवेश का अवसर बनना चाहिए।


इस चातुर्मास का नाम श्री उवसग्गहरं उत्सव चातुर्मास रखा गया है, क्योंकि महाप्रभावशाली श्री उवसग्गहरं पार्श्व प्रभु की छत्रछाया में रहकर साधना करना ही सबसे बड़ा उत्सव है! इस चातुर्मास के भव्य आयोजन मे देशभर के 44 से अधिक पुण्यशाली परिवारो को लाभार्थी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है I

श्री उवसग्गहरं पार्श्व प्रभु एवं तपागच्छाधिपति, बादशाह अकबर प्रतिबोधक पूज्य जगद्गुरु श्री हीरसूरीश्वरजी की दिव्य कृपा असंभव को संभव बना देती हैं! पूज्य दादागुरुदेव लब्धिसूरीश्वरजी एवं पूज्य तीर्थप्रभावक गुरुदेव विक्रमसूरीश्वरजी का असीम अनुग्रह इस चातुर्मासिक आयोजन का मूलाधार है।

श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ के प्रतिष्ठाचार्य पूज्य गच्छाधिपति गुरुदेव राजयशसूरीश्वरजी एवं पूज्य प्रवर्तिनी गुरुवर्या वाचंयमाश्रीजी बेन म.सा के आज्ञा एवं आशीर्वाद से ही यह चातुर्मास मंगल – कल्याण की साधना द्वारा आत्मशुद्धि के लक्ष्य को साकार करेगा।


चातुर्मास प्रवेश के पावन अवसर पर हैदराबाद, नागपुर, मुंबई, ,पूना,वर्धा,इंदौर, कर्नूल,अहमदाबाद, भरूच, वडोदरा, सूरत, बैंगलोर, सुरेंद्रनगर , लखनऊ, कलकत्ता के सैकड़ों गुरू भक्त रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग,भिलाई, धमतरी, जगदलपुर,बालोद, खैरागढ़, सहित छत्तीसगढ़ अंचल अनेक स्थानों से विशाल संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे I

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