पूना महाराष्ट्र (अमर छत्तीसगढ़) 5 जुलाई। महाराष्ट्र की पावनधरा पर पूज्य दादा गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के शिष्य, मरूधरा भूषण, शासन गौरव, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री सुकन मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा. आदि ठाणा 5 का पहली बार चातुर्मासिक मंगलप्रवेश शनिवार को श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ,बिबवेवाड़ी पूना के तत्वावधान में हुआ।
मुनिवृन्द ने भव्य गरिमापूर्ण जुलूस के साथ श्रीमान रसिकलाल एम.धारीवाल स्थानक भवन में चातुर्मासिक मंगलप्रवेश किया।

पिछले वर्ष गुजरात के अंबाजी में एतिहासिक सफल चातुर्मास सम्पन्न करने के बाद पूज्य मुकेशमुनिजी म.सा.,सेवारत्न हरीशमुनिजी म.सा., युवा रत्न नानेश मुनिजी म.सा, प्रज्ञा रत्न हितेशमुनिजी म.सा., प्रार्थनार्थी सचिन मुनिजी म.सा. आदि ठाणा के चातुर्मासिक मंगलप्रवेश जुलूस प्रमोदजी माणिकचंदजी दुग्गड़ पुष्प मंगल कार्यालय से शुरू होकर बिबवेवाड़ी जैन स्थानक पहुंचा।
मंगल प्रवेश के अवसर पर देशभर से गुरू भक्त पूना पहुंचे। मुनिवृन्द के पहली बार महाराष्ट्र में आगमन से मरूधर केसरी के प्रति असीम आस्थावान श्रावक-श्राविकाओं में उत्साह का माहौल रहा।
मंगलप्रवेश के अवसर पर मरूधरा मणि महासाध्वी श्रीजैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या मरूधरा ज्योति वात्सल्यमूर्ति महासाध्वी इन्दुप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा एवं महासाध्वी चैतन्यश्रीजी म.सा. आदि ठाणा का सानिध्य मिलने से चतुर्विद संघ का समागम हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के मंत्री दत्तात्रयजी भारणे, पूर्व आयकर आयुक्त धर्मारामजी पारख, माजी आमदार मोहनजी जोशी, माजी नगरसेवक अभयजी छाजेड़, नगर सेवक बाळासाहब ओसवाल थे।

समारोह की अध्यक्षता जैन कॉन्फ्रेंस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नेमीचंदजी चौपड़ा, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अविनाशजी चौरड़िया, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंदराजजी छल्लानी, जैन कॉन्फ्रेंस के पूर्व महामंत्री विमलचंदजी धारीवाल,पारसमल छाजेड़, जैन कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौतमचंदजी गुगलिया, वरिष्ठ मार्गदर्शक बाबूसेठ बोहरा,कांतिलालजी दुग्गड़ ने की।
विशिष्ट अतिथि श्री रूप रजत फाउण्डेशन मारवाड जंक्शन के चेयरमैन शांतिलालजी सुराणा, फाउण्डेशन के अध्यक्ष सुरेशचन्द्रजी गुन्देचा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हनुमानचंदजी खिंवेसरा,कोषाध्यक्ष पारसमलजी बोहरा, उपाध्यक्ष मिश्रीलालजी कटारिया, रमेशकुमारजी बोहरा, उत्तमचंदजी भलगट, गणेशजी गुगलिया थे।

समारोह में युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा ने कहा कि चातुर्मासिक प्रवेश होना सामान्य बात है लेकिन इसे एतिहासिक बनाने के लिए जरूरी है अधिकाधिक धर्म साधना, स्वाध्याय व तपस्या की जाए।
इनसे कर्मो की निर्जरा होने के साथ जिनशासन की प्रभावना भी होती है। चातुर्मास का समय जीवन के आत्मकल्याण की लक्ष्य प्राप्ति के लिए स्वर्णिम अवसर होता है। इस लक्ष्य की प्राप्ति जप,तप व साधना के माध्यम से की जा सकती है।
सेवारत्न श्री हरीशमुनिजी म.सा. ने कहा कि चातुर्मास धर्म की गंगा प्रवाहित करने का समय है। हमारी दैनिक दिनचर्या में धर्मसाधना के लिए समय निकाले और जिनशासन की आराधना करें। मंगल प्रवेश से पूर्व यहां के श्रावक-श्राविकाओं का जो समपर्ण व जुड़ाव देखने को मिला है उससे लगता है धर्मसाधना की दृष्टि से यह चातुर्मास एतिहासिक साबित होगा।

युवा रत्न श्री नानेश मुनिजी म.सा. ने कहा कि चातुर्मास तभी सफल कहलाएगा जब हम इससे जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगे। हमे पतन की ओर ले जाने वाले व्यसनों का त्याग करने के साथ भगवान महावीर के ज्ञान, दर्शन और चारित्र के अनुरूप अपना जीवन जीना होगा।
मधुर व्याख्यानी श्री हितेश मुनिजी म.सा. ने कहा कि चातुर्मास में हम त्याग, तपस्या, साधना जो भी कर सकते उसे अवश्य करें। जीवन में पुण्यार्जन का समय चातुर्मासकाल होता है। प्रार्थनार्थी श्री सचिन मुनिजी म.सा. ने भगवान की प्रार्थना से शुरूआत करते हुए धर्मसंदेश में कहा कि चातुर्मास हमारे जीवन ओर सोच में बदलाव का माध्यम बने।
भौतिक सुखों से आगे बढ़कर आध्यात्मिक सुख पाने का मार्ग चातुर्मास है। महासाध्वी चैतन्यश्रीजी म.सा. एवं रोचक व्याख्यानी प्रबुद्ध चिन्तिका डॉ. दर्शनप्रभाजी म.सा. ने चातुर्मासिक सफलता की मंगलकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि यह चातुर्मास तप,त्याग, धर्मसाधना से परिपूर्ण रहेगा।
विद्याभिलाषी साध्वी श्री हिरलप्रभाजी म.सा.ने भजन की प्रस्तुति दी। अतिथियों का स्वागत श्रीसंघ के चेयरमैन शोभाताई धारीवाल, अध्यक्ष पोपटलाल ओस्तवाल ने किया। संचालन श्रीसंघ के उपाध्यक्ष माणिक दुगड़ एवं महामंत्री गणेश ओसवाल ने किया।

इस अवसर पर श्रीसंघ के उपाध्यक्ष रमेशलाल गुगले, पन्नालाल पितलिया, सह मंत्री अविनाश कोठारी, कोषाध्यक्ष लालचंद कर्नावट,कार्यकारिणी सदस्य सुभाष बाफना,बाळासाहब कोयाळीकर,संपतलाल भटेवरा, विजय समदड़िया,रमणलाल लुंकड़,चंपालाल नहार, प्रवीण चोरबेले,कीर्तिराज दुग्गड़,चन्द्रकांत सुराणा, रामलाल संचेती,चन्द्रकांत लुंकड़, सुनील बलाई, संजय श्रीश्रीमाल, रविन्द्र दुग्गड़, सुनील दुग्गड़, अशोक नहार,दिलीप रायसोनी सहित सभी ट्रस्टी, पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद थे।

मंगल प्रवेश जुलूस में गूंजते रहे भगवान महावीर के जयकारे
तपस्वी पूज्य श्री मुकेश मुनिजी म.सा.,सेवारत्न श्री हरीश मुनिजी म.सा आदि ठाणा 5 का बिबवेवाड़ी श्रीसंघ के तत्वावधान में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश जुलूस सुबह प्रमोदजी माणिकचंदजी दुग्गड़ के पुष्प मंगल कार्यालय से शुरू होकर विभिन्न मार्गो से होते हुए बिबवेवाड़ी जैन स्थानक पहुंचा।
मंगलप्रवेश जुलूस में भगवान महावीर व जैन धर्म के जयकारों के साथ आचार्य सम्राट आनंदऋषिजी म.सा.,मरूधरी केसरी मिश्रीमलजी म.सा., शेरे राजस्थान रूपचंदजी म.सा., प्रवर्तक पूज्य सुकून मुनिजी म.सा. आदि के जयकारे भी गूंजायमान होते रहे।
मार्ग में जगह-जगह स्थानीय निवासियों ने भी चातुर्मास पर हर्ष जताते हुए मुनिवृन्द का वंदन-अभिनंदन किया। मंगल प्रवेश जुलूस में बिबेववाड़ी श्रीसंघ के साथ सत्य साधना महिला मण्डल, श्रुत बहु मण्डल, जय आत्मानंद ग्रुप, श्री तिलोक आनंद जैन पाठशाला के पदाधिकारियों व सदस्यों ने उत्साह से सहभागिता निभाई।

मंगल प्रवेश कराने देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे गुरूभक्त
पूज्य मुकेशमुनिजी म.सा. आदि ठाणा के चातुर्मासिक मंगलप्रवेश के अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से गुरू भक्त पहुंचे। मंगल प्रवेश कार्यक्रम में चैन्नई, बेंगलौर, हुबली,धारवाड़,सिकन्दराबाद, अहमदनगर,मुंबई, नासिक, धुलिया, मालेगांव रत्नागिरी, हैदराबाद सहित राजस्थान के पाली, भीलवाड़ा,ब्यावर, उदयपुर आदि स्थानों से श्रावक-श्राविकाएं पहुंचे थे। मुंबई से राजूभाई भण्डारी, जयंतिलाल छाजेड़, राजूभाई अंबावत,मनोज भाई आदि श्रावक आए थे। हैदराबाद से कृष्णानगर संघ के अध्यक्ष चंदनमलजी चाणोदिया,पूर्व अध्यक्ष शांतिलालजी गुगलिया, मंत्री विमल पितलिया, शांतिलाल गांधी आदि पधारे थे।
चातुर्मास में हर गुरूवार श्री गुरू गौतम एकासन अनुष्ठान
चातुर्मास में प्रतिदिन सूर्योदय के समय प्रार्थना के बाद सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक मुनिवृन्दों के प्रवचन होंगे। प्रतिदिन दोपहर 3 से 5 बजे तक का समय धर्मचर्चा के लिए रहेगा। सूर्यास्त के बाद प्रतिक्रमण होगा। भाईयों के लिए रात्रि धर्म चर्चा का समय रात 8 बजे से रहेगा।
पूना में पहली बार चातुर्मास में प्रत्येक गुरूवार को श्री गुरू गौतम एकासन अनुष्ठान होगा। एकासन अनुष्ठान विधि प्रज्ञारत्न श्री हितेशमुनिजी म.सा. सम्पन्न कराएंगे। चातुर्मास में इस दौरान 14 एकासन का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक एकासन सम्पूर्ण विधि,जाप एवं स्वाध्याय के साथ होगा।
चातुर्मास में पूज्य मुकेशमुनिजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में 3 अगस्त रविवार को पूज्य दादा गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. की 135वीं एवं लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. की 98वीं जयंति के उपलक्ष्य में जन्म जयंति समारोह गुणानुवाद करते हुए मनाया जाएगा।
गुरू द्वय जयंति समारोह एक से 9 अगस्त तक होंगे लेकिन मुख्य समारोह 3 अगस्त को होगा। प्रत्येक रविवार को दोपहर 2.30 से 4 बजे तक बच्चों के लिए धार्मिक शिविर का आयोजन होगा।
( निलेश कांठेड़)
अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन

