आचरण के लिए ज्ञान का होना जरूरी- साध्वी  लब्धियशाश्री

आचरण के लिए ज्ञान का होना जरूरी- साध्वी लब्धियशाश्री

नगपुरा दुर्ग (अमर छत्तीसगढ़) 14 जुलाई। आचरण के लिए ज्ञान का होना जरूरी है। ज्ञान और क्रिया एक सिक्के के दो पहलू हैं। ज्ञान की प्राप्ति के लिए समर्पण भाव अनिवार्य है। उक्त उद्गार श्री आचारांग सूत्र व्याख्यान श्रृंखला में साध्वी श्री लब्धियशाश्रीजी ने व्यक्त किए।


श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ -नगपुरा में चातुर्मास आराधकों को संबोधित करते उन्होंने ने कहा कि जो परमात्मा की आज्ञा का अनुसरण करता है,वह मेधावी है।


जिस तरह रोटी बनाने के लिए आटा-पानी और अग्नि तीनों की आवश्यकता होती है वैसी ही शाश्वत सुख की प्राप्ति के लिए सम्यक दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र तीनों जरूरी है। इसके लिए परमात्मा के द्वारा बताये मार्ग, सिद्धांत पर हमें श्रद्धा और समर्पण रखना होगा। समर्पण के अभाव में हमें अपने वास्तविकता का बोध नहीं होता है। परिस्थिति जैसी भी हो, मनःस्थिति मजबूत होनी चाहिए।


प्रतिकूलताओं को सहर्ष स्वीकार करना,संयम है।
स्वस्थ शरीर के लिए रोग की निदान जरूरी है वैसे ही निज स्वरूप को जानने के लिए अज्ञान रूपी रोग को दूर भगाना होगा, । कुछ पाने के लिए झुकना होता है।

आध्यात्मिक क्षेत्र में विकसित होना है तो परमात्मा के बताए मार्ग का श्रद्धापूर्वक अनुसरण जरूरी है, , जिनवाणी के प्रति श्रद्धा,विनय की भावना, हमारे आचरण में शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। भावना के साथ पुरुषार्थ आवश्यक है बिना पुरुषार्थ भावना फलीभूत नही हो सकती। ज्ञान के लिए पुरुषार्थ जरूरी है। ज्ञान के साथ किया हुआ क्रिया ही फलित होती है।

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