रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 21 जुलाई। शासन दिपिका साध्वी मंजुला श्री जी वर्षावास में नित्य आत्म जागृति के लिये धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा हैं- हे भव्य उपासकों अरिहंत परमात्मा महावीर कह रहे है धर्म अहिंसा, संयम, तप पर ही टिका है। तप का महत्व बताते हुए कहा- आचार्य श्री रामलाल जी एवं उपाध्याय प्रवर राजेश मुनिजी बेले बेले का तप काफी संयम से निरंतर कर रहे है।
ऐसे ही आचार्य श्री हुक्मी चंद जी ने अपने जीवन में बेले-विगह का मीठे आदि का त्याग करते-करते महान तपस्वी बन गये जीवन को सफल बना दिया। जो अहिंसा, संयम, तप की आराधना करता है उन्हे देवी-देवता भी नमस्कार करते है।
हे भव्य उपासकों- परमात्मा की जिनवाणी यह इस वर्षावास में सभी को संदेश दे रही है अपने जीवन में छोटे से छोटे तप से शुरूवात करें तो इस अभ्यास से बड़े-बड़े तप हो जायेंगे। श्री साधुमार्गी जैन संघ रायपुर महान संघ है जो गुरू के ईशारे पर अनेक तपों में आगे बढ़ रहा है।
55 के अधिक तेला-19, 9, 10, 8 आदि से तप चल रहा है। काफी भाई-बहन निरंतर वर्षों से तप रेगुलर रखे हुए हैं और 20/07/2025 को एक साथ 250 लोग एक साथ तप करने वाले थे लेकिन यह संख्या 350 + हो गई हैं। इसमें आयंबील, निवी, एकलथाना, चरम पच्चखान आदि के तप हो गये।
हे भव्य उपासकों परमात्मा महावीर ने 12 वर्ष 6 माह की तपस्या मे 349 दिन ही पारणा किया। आज के युग में भी निरंतर अनेक तपस्याएँ हो रही हैं। यह तपस्या ही मोक्ष जाने का द्वार हैं हम खाने-पीने में सम भाव के साथ खाना खाएँ ज्यादा सामग्री आई तो उसमें त्याग कर खाना खायें। तो यह त्याग धीरे-धीरे आपकी आत्मा का दरवाजा खोल देगा।
मन-वचन-काया से कभी भी किसी का अहित नही करना। ये परमात्मा की जिनवाणी यही संदेश दे रही है।
हे भव्य उपासकों धन्नाशाली भद्र पिताजी से मिली 30 सौनया लेकर बंजारे जिधर से आ रहे थे चल पड़ा। बंजारे को देख कर वह रूक गया और बंजारे धन्ना को देखकर प्रभावित हुए। उससे चर्चा की। सारी बात जानकर बंजारे ने पूरी लाई सामग्री दे दी।
इधर ईश्वर सेठ अपने मुनिम नौकर को बंजारे से समान लाने भेजा वे पहुँचे। बंजारो ने कहा हमने पूरा माल धन्ना को दे दिया। वे चिंता में पड़ गए। ईश्वर सेठ को यह बात नहीं बतानी है हम धन्ना से खरीदी कर यह माल ले लेते है। वे वहां पहुंचे और एक लाख नफा दे पूरा माल ले लिया।
हे भव्य उपासकों- धन्ना 30 सौनया और एक लाख का नफा रूपयों के साथ पहुंचा। 10 हजार रूपयों से भोजन सभी गांव वालो को कराया। 90 हजार से तीनो भाई के लिये आभूषण, वस्त्र आदि लिये घर में पूरा परिवार खुश था। इधर तीनो भाई के मन में शंका हो गई जो आगे-जानेंगे।
साध्वी श्री मंजुला श्री जी ने अपनी इच्छा का तप जो जरूरत से ज्यादा है उसका का त्याग करने कहा- जो काफी लोगो ने अपनी-अपनी इच्छानुसार त्याग का संकल्प लिया।

