ज्ञान प्राप्त होने पर हो जाएगी संसार से विरक्ति- संयमप्रभाजी…. आत्मा का मर्म जो समझ जाए वहीं सम्यक दृष्टि जीव-शशिप्रभाजी

ज्ञान प्राप्त होने पर हो जाएगी संसार से विरक्ति- संयमप्रभाजी…. आत्मा का मर्म जो समझ जाए वहीं सम्यक दृष्टि जीव-शशिप्रभाजी

सूरत गुजरात (अमर छत्तीसगढ़) ,22 जुलाई। जीवन में ज्ञान का फल सदा मीठा होता है ओर ज्ञान प्राप्ति होने पर ही संसार से विरक्ति होने लगती है। ज्ञानी व्यक्ति कभी भेदभाव की बात नहीं करता। ज्ञानवान व्यक्ति सदा सम्यक दृष्टि से सोचता है ओर सबके लिए हितकारी कार्य करने का प्रयास करता है। ज्ञान होने पर हमे भले ओर बुरे का भेद भी समझ जाते है।

ये विचार श्रमण संघीय आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनिजी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी एवं राजस्थान प्रवर्तिनी साध्वी शिरोमणी परम पूज्या सद्गुरूवर्या श्री यशकंवरजी म.सा.,आध्यात्म साधिका समतामूर्ति परम पूज्या सद्गुरूवर्या श्री सिद्धकंवरजी म.सा. की सुशिष्या संयम साधिका श्री संयम प्रभाजी म.सा. ने मंगलवार को श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गोड़ादरा के तत्वावधान में महावीर भवन में आयोजित चातुर्मास ‘‘शुद्धता से सिद्धालय की ओर’ के तहत प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आत्मा में मोक्ष वैराग्य के भाव जागृत होने पर सांसारिक प्रप्रंचों से मुक्ति मिल जाएगी।

जिनवाणी सुनने से ही आत्मजागृति होगी ओर हमने अपनी आत्मा के स्वरूप को पहचान लिया तो मुक्ति का मार्ग समझ में आ जाएगा। अभी हम आत्मा को नहीं पहचान बाहरी शरीर से मोह रखते जिस कारण संसार में भटकना पड़ रहा है। उन्होंने प्रवचन के दौरान मधुर भजन ‘‘अरिहन्त बनना है,मुझे सिद्ध बनना है’’की भी प्रस्तुति दी।

धर्मसभा में मधुर व्याख्यानी श्री शशिप्रभाजी म.सा. ने कहा कि जो जीव सम्यक दृष्टि पर श्रद्धा रखता है वह कर्ममल से रहित हो जाता है। अहिंसा ओर तप की आराधना करने वाला जीव धर्म को समझ जाता है ओर पाप से डरने लगता है। जिसके मन में यह बैठ जाए कि मैं आत्मा हूं वही सम्यक दृष्टि जीव होता है।

उन्होंने आठ मद के विषय में भी समझाते हुए कहा कि सम्यक दृष्टि जीव अपने कर्म पर विश्वास करता है ओर वह अरिहन्त परमात्मा के अलावा किसी के भी आगे झुकता नहीं है। कर्म निर्जरा के लिए हमे कषाय मुक्त होकर धर्म का पोषण करना है। कषाय हमारे कर्म बंध का कार्य करते है ओर हमारे मुक्ति की राह में बाधक है।

धर्मसभा में स्वाध्यायशीला साध्वी श्री किरणप्रभाजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। पूज्य महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में गुरू वेणी अंबेश दरबार में निरन्तर तप त्याग व धर्म ध्यान की गंगा प्रवाहित हो रही है। एकासन,आयम्बिल,उपवास की लड़ी निरन्तर चल रही है।

धर्मसभा में चलथान एवं व्यारा से महिला मण्डल भी मौजूद रहा। अतिथियों का स्वागत बहुमान गोड़ादरा श्रीसंघ द्वारा किया गया। प्रश्नोत्तरी, लक्की ड्रॉ एवं प्रभावना का लाभ गोड़दरा श्रीसंघ ने लिया। संचालन श्रीसंघ के उपाध्यक्ष गौतमजी संचेती ने किया।

प्रस्तुति– अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन,

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