महावीर ने हमें- रात्रि भोजन का त्याग नवकारसी, पोरसी, आयंबिल एवं 5 विगह के त्याग का रास्ता बताया- साध्वी मंजुला श्री

महावीर ने हमें- रात्रि भोजन का त्याग नवकारसी, पोरसी, आयंबिल एवं 5 विगह के त्याग का रास्ता बताया- साध्वी मंजुला श्री

रायपुर (अमर छत्तीसगढ) 23 जुलाई। शासन दिपिका साध्वी मंजुला श्री जी वर्षावास में आत्म जागृति पर निरंतर प्रकाश डालते हुए कहा- हे भव्य उपासकों- परमात्मा महावीर कह रहे है तपस्या से आत्मा, शरीर और मन की शांति देने में लगाओ। शुद्ध आहार, पानी से शरीर की स्वस्थ बनाओ।

सुगर के पेशेन्ट रायपुर में ही नहीं पूरे देश संसार में बढ़ रहे है क्यो? कारण बार-बार खाना और पचता नही है और उसके ऊपर खाना, चाय आदि ले लेते है क्यो? पहले खाया पचा नही ऊपर से और ले लिया शरीर में बारीक-बारीक नसे है इससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और शुगर आदि के मरीज बन जाते है।

परमात्मा महावीर ने हमें- रात्रि भोजन का त्याग नवकारसी, पोरसी, आयंबिल एवं 5 विगह के त्याग का रास्ता बताया है। रोटी लूखी लो, तेल, घी का उपयोग कम करो। ये शरीर की पाचन क्रिया को संतुलित करते है और शरीर स्वस्थ रहता है।

धन्नाशाली के पिताश्री तीनो बेटों से कहा उन्हें समझाया धन्ना के अच्छे काम होने से पूर्वजों व परिवार का नाम रौशन हो रहा है। आप लोग उसकी अच्छाई नहीं देख बुरा ही बुरा साचते है।

वह ईश्वर सेठ का पत्र पढ़कर बुद्धि लगा कमा लिया यह तो उसकी बुद्धि का खेल है तुम लोग सुधरो नहीं तो तुम्हारा तन, मन, जीवन पूरा बर्बाद हो जायेगा। तीनो को तीन मुनि के जीवन द्वारा तीनो बेटो को समझाया जा रहा है।

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