पूना महाराष्ट्र (अमर छत्तीसगढ) 23 जुलाई। श्रमण संघीय द्वितीय पट्टधर आचार्य सम्राट पूज्य श्री आंनदऋषिजी म.सा. की 126वीं जयंति के उपलक्ष्य में श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, बिबवेवाड़ी पूना के तत्वावधान में रसिकलाल एम.धारीवाल स्थानक भवन में पांच दिवसीय आयोजन के चौथे दिन बुधवार को पूज्य दादा गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के शिष्य, मरूधरा भूषण, शासन गौरव, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री सुकन मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा के सानिध्य में सुबह प्रवचन से पहले आनंद चालीसा का जाप किया गया।
जाप के माध्यम से पूज्य आनंद बाबा का स्मरण करते हुए सर्व सुख शांति एवं मंगलमय जीवन की कामना की गई। इस दौरान आनंद जाप करने के लिए आस्था से ओतप्रोत श्रद्धावान श्रावक-श्राविका उमड़े।
आचार्य श्री आनंदऋषिजी म.सा. की जयंति पर पांच दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन गुरूवार 24 जुलाई को सामायिक दिवस मनाते हुए 2-2 सामायिक करने के साथ ओम आनंद जाप होगा।
धर्मसभा में सेवारत्न श्री हरीशमुनिजी म.सा. ने पूज्य आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. के प्रति श्रद्धाभाव व्यक्त करते हुए कहा कि जिनके जीवन में ऐसे गुरू मिल जाते है उन शिष्यों व भक्तों का जीवन भी संवर जाता है। गुरू ही होता है जो अपने शिष्य को सुयोग्य बनाता है ओर संसार सागर से पार करने का मार्ग दिखाता है। गुरू के बिना हमारा जीवन अधूरा ही रहेगा।
आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. ने लाखों भक्तों के जीवन से अज्ञान का अंधकार मिटा ज्ञान रूपी प्रकाश की नई किरण फैलाई। युवारत्न श्री नानेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि पूज्य आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. का पूरा जीवन जिनशासन के लिए समर्पित रहा।
उन्होंने मानव सेवा व जीव दया के लिए सदा प्रेरणा प्रदान की। उनकी प्रेरणा ने लाखों लोगों के लिए मार्गदर्शन का कार्य किया ओर लोग धर्म से जुड़ने के लिए प्रेरित हुए। जो एक बार उनके सानिध्य में आया वह उनके गुणों से प्रभावित हुए बिना नहीं रहा।
प्रज्ञा रत्न श्री हितेशमुनिजी म.सा. ने आनंद ऋषिजी म.सा. के जीवन की चर्चा करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन प्रेरणादायी है जिससे बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

जन्मदिन उन महापुरूषों का मनाना सार्थक होता है जो जीवन में रहकर कुछ भलाई व परोपकार के कार्य करके जाए। उन्होंने उपाध्याय, आचार्य जैसे पदों पर रहते हुए जिनशासन व श्रमणसंघ की जो सेवा की उसे कभी नहीं भूला जा सकता। धर्मसभा में प्रार्थनार्थी श्री सचिनमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।
चातुर्मास में श्रावक-श्राविकाओं में लगी तप त्याग की होड़
पूज्य संतप्रवर की प्रेरणा से चातुर्मास में त्याग तपस्याओं का दौर निरन्तर गतिमान है। सुश्राविका रश्मी बिनायकिया,संगीता संजयजी संचेती,श्रद्धाजी बोरा, पूजा प्रितेश रूणवाल, जयश्री गांधी, प्रांजल मुथा, प्रितेश शांतिलालजी रूणवाल, संतोषजी कोठारी, संजयकुमारजी गुगले,चेतनकुमारजी संचेती ने 6-6 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।
तपस्वी श्रावक-श्राविकाओं का श्रीसंघ द्वारा जयकारों के साथ अनुमोदना की गई। कई श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास, एकासन,आयम्बिल, उपवास आदि तप के प्रत्याख्यान भी लिए। चातुर्मास में नियमित प्रवचन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक हो रहे है।
श्रीसंघ सम्पर्क सूत्र-
श्री पोपटलालजी ओस्तवाल, अध्यक्ष
मो. 9823081825
श्री माणिकचंदजी दुग्गड़, उपाध्यक्ष
मो. 9890940941
श्री गणेशलाल ओसवाल,महामंत्री
मो. 9921879613
श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ,बिबवेवाड़ी पूना
प्रस्तुतिः अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन,

