आत्मा की शक्ति को जाने और आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ जाएं- मुनि वीरभद्र जी

आत्मा की शक्ति को जाने और आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ जाएं- मुनि वीरभद्र जी

राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 21 जुलाई। प्रख्यात जैन संत एवं मुनि विनय कुशल जी के सुशिष्य मुनि वीरभद्र (विराग ) जी ने कहा कि आत्मा अनंत शक्तिशाली है। हमने आत्मा की शक्ति को जाना ही नहीं है, उसकी ताकत को नहीं समझा है। यदि समझ गए तो आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ने से हमें कोई नहीं रोक सकता।
जैन बगीचे के नए हाल में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि आज भी ऐसे संत विद्यमान है जो उच्च साधना वाले हैं। उन्होंने कहा कि जब इच्छा समाप्त हो जाए तो साधना के मार्ग में आगे बढ़ जाए, ऐसे जीव को फिर शरीर का मोह नहीं होता। भौतिक सुविधाएं उसे तुच्छ लगने लगती है और वह सिर्फ आत्मा को जागृत करने के लिए प्रयासरत रहता है। आत्मा को जगाने के लिए वह तपस्या में लीन रहता है।
मुनि श्री वीरभद्र ( विराग )ने कहा कि तप की ताकत और आत्मा की अनंत शक्ति को हमने समझा ही नहीं है, जाना ही नहीं है। इस सूक्ष्म शक्ति को जाने बिना हम आत्म कल्याण के मार्ग में अग्रसर नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि भक्ति का कोई मूल्य नहीं होता। इसी तरह आराधना का भी कोई मूल्य नहीं होता।

आज की दुनिया में हमने चकाचौध को ही भक्ति मान ली है। जबकि भक्ति इससे काफी अलग शांत व गूढ है। उन्होंने कहा कि हमें आत्मा की शक्ति को जानने के लिए आराधना की जरूरत होगी और हम इसके रहस्य को जान पाएंगे।

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