पूना महाराष्ट्र (अमर छत्तीसगढ़) ,25 जुलाई। राष्ट्रसंत श्रमण संघ के द्धितीय पट्टधर आचार्य भगवान आनंदऋषिजी म.सा. का 125वां जन्मोत्सव शुक्रवार को मरूधरा मणि महासाध्वी जैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या सरलमना जिनशासन प्रभाविका वात्सल्यमूर्ति इन्दुप्रभाजी म.सा. के सानिध्य में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ कात्रज दत्त नगर आनंद दरबार श्रीसंघ के तत्वावधान में आगम पर्व-2025 के तहत श्रद्धा व आस्था के भावों के साथ मनाया गया। इस दौरान आनंद बाबा के प्रति श्रद्धा से ओतप्रोत भक्त उनके जयकारे भी लगाते रहे।

जन्मोत्सव पर गुणानुवाद करते हुए रोचक व्याख्यानी प्रबुद्ध चिन्तिका डॉ. दर्शनप्रभाजी म.सा. ने कहा कि युगपुरूष आचार्य सम्राट आनंदऋषिजी जैसे महान संतो ंके गुणों को शब्दों में बयां करना बहुत कठिन है। उनके गुणों का जितना गुणगान हो कम होगा। ऐसे महापुरूष का सानिध्य जिन भक्तों व शिष्यों को प्राप्त हो जाता है उनका जीवन संवर ओर निखर जाता है।

उन्होंने आचार्य आंनदऋषिजी म.सा. के जीवन की चर्चा करते हुए कहा कि संत संसार से तिराने वाले होते है। लौकिक गुरू माता पिता व आजीविका के लिए शिक्षा देने वाले शिक्षक होते है पर लोकोत्तर गुरू वह होते है जो धर्मोपदेश देकर दुर्गुणों के बंधन काटने वाले होते है ओर जीवन जीने की कला सिखाते है।
इस कार्य में उनका कोई स्वार्थ नहीं होता है ओर जो भी उनके पास आता है उसका उत्थान,कल्याण एवं विकास की भावना होती है।
महासाध्वी दर्शनप्रभाजी म.सा. ने आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. को जीवन में प्राप्त विभिन्न पदों की चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें जो भी पद मिला उसके अनुरूप पूर्ण समर्पित भाव से कार्य कर आदर्श स्थापित किया। ऐसे महापुरूष के मन में हमेशा सबका भला करने की भावना रही। उनकी सोच बड़ी ओर दिल भी बड़ा था जबकि आज हमारी सोच भी छोटी ओर दिल भी छोटा होता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पूज्य आनंदऋषिजी म.सा. जैसे महान पुरूषों का जीवन सदा हमारा पथ प्रदर्शक रहेगा। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर हम अपने जीवन को सुधार सकते है। उनके जीवन से ज्ञान, अनुशासन, त्याग जैसे गुणों को हम सीख अपने जीवन को दुर्गणों से रहित कर सकते है ओर साधना के पथ पर आगे बढ़ सकते है।

धर्मसभा में तत्वचिन्तिका आगम रसिका डॉ. समीक्षाप्रभाजी म.सा. ने भी पूज्य आचार्य आनंदऋषिजी म.सा. के प्रति श्रद्धाभाव व्यक्त करते हुए उनके जीवन से शिक्षा लेने की प्रेरणा प्रदान की। आयोजन में सेवाभावी दीप्तिप्रभाजी म.सा. एवं विद्याभिलाषी हिरलप्रभाजी म.सा. ने भजनों के माध्यम से पूज्य आनंद गुरू के प्रति श्रद्धा व भक्ति समर्पित की।
आनंद दरबार श्रीसंघ के अध्यक्ष बाळासाहब धोका ने आयोजन में सक्रिय सहभागी बन सफल बनाने वाले सभी श्रावक-श्राविकाओं के प्रति आभार जताया। धर्मसभा का संचालन श्रीसंघ के सौरभ धोका ने किया। समारोह के बाद पूज्य आचार्यश्री आनंदऋषिजी म.सा. के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया।

महासाध्वी मण्डल ने दी 2 अगस्त से सामूहिक तेला तप करने की प्रेरणा
धर्मसभा में महासाध्वी दर्शनप्रभाजी म.सा. ने बताया कि 2 से 8 अगस्त तक गुरू द्धय स्मरण सप्ताह मनाया जाएगा। इसके तहत 2 अगस्त लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. की 98वीं जयंति एवं पुण्यतिथि एवं पूज्य गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. की 135वीं जयंति मनाई जाएगी।

गुरू द्धय स्मरण सप्ताह के तहत 2 से 4 अगस्त तक सामूहिक तेला तप का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान हर घर से एक तेला अवश्य हो इसकी प्रेरणा दी जा रही है। गुरू द्वय जयंति मुख्य समारोह का आयोजन 4 अगस्त को महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में आनंद दरबार श्रीसंघ के तत्वावधान में होगा।
चातुर्मास सम्पर्क सूत्रः
श्री बाळासाहब धोका
संघपति, आनंद दरबार
मो.9822039728
प्रस्तुतिः अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन,

