रायपुर(अमर छत्तीसगढ) 29 जुलाई। आत्मोत्थान चातुर्मास 2025 के अंतर्गत श्री जिनकुशल सूरी दादाबाड़ी, रायपुर में चल रही प्रवचन माला में परम पूज्य श्री हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. द्वारा ‘धर्मरत्न प्रकरण’ ग्रंथ का सविनय पठन एवं गहन भावार्थ प्रस्तुत किया जा रहा है।

मंगलवार को अपने प्रभावशाली प्रवचन में उन्होंने कहा कि चातुर्मास मात्र एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक अनुपम अवसर है। यह काल संयम, भक्ति, साधना और आत्मचिंतन का श्रेष्ठतम समय है, जो जीवन में आध्यात्मिक जागृति लाता है।

साधना का मार्ग अपनाएं — शनि भी बन सकते हैं शुभकारी
पूज्य श्री ने बताया कि आज का मानव जीवन ग्रहदोषों, विशेषतः शनि की साढ़ेसाती जैसी कठिनाइयों से प्रभावित है। लेकिन यदि हम मुनि सुव्रत स्वामी जैसे शनि भक्तों की तरह श्रद्धा, साधना और आराधना का मार्ग अपनाएं, तो वही शनि ग्रह जीवन में शुभता और समृद्धि का कारण बन सकते हैं। परमात्मा के उपकारों का स्मरण और भक्ति, मानसिक शांति और जीवन के संतुलन का स्रोत है।

गिरनार तीर्थ की तर्ज पर प्रभु नेमीनाथ की प्रतिकृति स्थापित
प्रवचन के उपरांत दादाबाड़ी परिसर में गिरनार तीर्थ की तर्ज पर प्रभु नेमीनाथ की भव्य प्रतिकृति की स्थापना मंत्रोच्चार, विधिविधान और पूजा-अर्चना के साथ की गई। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने प्रभु की भक्ति में लीन होकर इस पावन अनुष्ठान का लाभ प्राप्त किया। पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से सराबोर हो उठा।

धूमधाम से मनाया गया गिरनारी नेमिनाथ जन्मकल्याणक महोत्सव
दादाबाड़ी में 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान के जन्मकल्याणक अवसर पर विशेष गिरनारी नेमि जन्मकल्याणक महोत्सव का आयोजन किया गया। सुबह 9 बजे भगवान का अष्टोत्तर शतक अभिषेक नासिक के सुप्रसिद्ध संगीतकार हर्ष शाह की संगीतमयी प्रस्तुति के साथ विधिकारक राकेशभाई पंडितजी के निर्देशन में विधिपूर्वक संपन्न हुआ।
रात्रि 8:30 बजे गिरनार से भव पार भक्ति संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें फिर से हर्ष शाह की मधुर प्रस्तुति रही और संचालन संकेत गांधी द्वारा किया गया। इस विशेष दिन एकसना की व्यवस्था भी श्रद्धालुओं के लिए की गई थी।

अजमेर दादाबाड़ी के जीर्णोद्धार हेतु रायपुर से कलश यात्रा
अजमेर स्थित प्राचीन दादाबाड़ी के जीर्णोद्धार के लिए रायपुर नगर से विशेष कलश यात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने स्वेच्छा से सोना, चांदी, जेवरात एवं नगद राशि इस कलश में समर्पित की। पूज्य श्री ने बताया कि प्राचीन परंपरा के अनुसार मंदिरों के गुप्त कोनों में धन संग्रह किया जाता था ताकि आपदा या आक्रमण के समय मंदिर का पुनर्निर्माण किया जा सके। रायपुर नगर का यह प्रयास उसी परंपरा की पुनर्प्रस्तुति है।

श्रद्धा, सेवा और समर्पण से होगा आत्मोत्थान
अपने प्रवचन के अंतिम चरण में पूज्य श्री हंसकीर्ति म.सा. ने कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा के उपकारों को स्मरण करता है, उसके जीवन में आनंद और संतोष की अनुभूति सहज रूप से होती है। चातुर्मास का यह काल संयम, सेवा, साधना और समर्पण के माध्यम से आत्मोत्थान की दिशा में बढ़ने का स्वर्णिम अवसर है।
दैनिक प्रवचन का लाभ लें: समिति का निवेदन
श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली एवं आत्मोत्थान चातुर्मास समिति 2025 के अध्यक्ष अमित मुणोत ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि प्रत्येक प्रातः 8:45 से 9:45 तक साध्वीजी के प्रवचन का अधिक से अधिक लाभ लें और जिनवाणी के सत्संग में सहभागी बने।

