नगपुरा दुर्ग (अमर छत्तीसगढ) 29 जुलाई ।. श्री उवसगहरं पार्श्व तीर्थ नगपुरा में चातुर्मासिक आराधना क्रम में आज श्रावण सुदी पंचमी को श्री नेमिनाथ प्रभु का जन्म कल्याणक एवं व्याख्यान वाचस्पति, कविकुल किरीट पूज्यपाद आचार्य देव श्री लब्धि सूरीश्वर जी महाराजा की 64 वीं पुण्यतिथि भक्ति समर माहौल में उत्साह, उल्लास, उमंग और आस्था श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक मनाया गया।

इस अवसर पर गुणानुवाद सभा का आयोजन हुआ, जिसमें तपस्विनी साध्वी श्री लक्ष्ययशा श्रीजी ,व्याख्यात्री साध्वी श्री लब्धियशा श्रीजी एवं कार्यदक्ष साध्वी श्री आज्ञायशाश्रीजी मसा ने श्री लब्धि सूरीदेव के जीवनवृत पर प्रकाश डालते हुए अनेक घटनाओं का उल्लेख किया।

साध्वीवृंद ने सूरिदेव रचित स्तवन, सझ्झाय और प्रेरक स्तुतियों से सभा को अवगत किया। श्री लब्धिसूरीदेव का महान जैनाचार्यो,साधु-साध्वी भगवंतों के साथ ही सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन, राजर्षि पुरुषोत्तम टंडन, भरूच के तत्वज्ञानी श्रावक अनोपचंद, कविश्रेष्ठ रामधारी सिंह दिनकर के साथ सम्बन्धों का मार्मिक विवेचना किया गया।
श्री लब्धि सूरीदेव के गुणानुवाद में यह भी बतलाया गया कि पूज्य गुरुदेव ने सदैव गुणों का सम्मान करने की हितशिक्षा दिए। ‘गुणी बनों- गुणानुरागी बनों । गुरुदेव का मंत्रवाक्य था।

उन्होंने अपने दैनिक डायरी में लिखा कि ‘मुझे याद नहीं है कि कभी भी मैंने अपनी जिव्हा’ से किसी का निंदा किया हो! अर्थात् गुरुदेव जीवनपर्यंत किसी भी व्यक्ति का निंदा नहीं किए ।
गुणानुवाद सभा के पूर्व उज्जवला बेन गाँधी , गौरव गाँधी नागपुर , उषाबेन बागमार, सुरेश बागमार रायपुर, मयूरभाई सेठ भरूच ने श्री नेमिनाथ प्रभु एवं श्री लब्धि सूरीजी महाराज के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर मंत्रोच्चार के साथ पुष्पांजलि विधान किए।

गुणानुवाद सभा में धर्मेश भाई कारावाड़िया संगीत कार ने अपने सहयोगी आयुष एवं मोहित एवं खेमलाल, रोमलाल के साथ कविकुल किरीट रचित ‘स्तवनों का भाववाही प्रस्तुति दी।

