बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ) 30 जुलाई। भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान पार्श्वनाथ की मोक्ष प्राप्ति की याद में मनाया जाता है। यह पर्व श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन मनाया जाता है।

इस दिन जैन समाज के लोग भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और उन्हें निर्वाण लाडू चढ़ाते हैं। यह पर्व श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन मनाया जाता है। इस अवसर पर बिलासपुर में एक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी, महामुनिराज नवाचार्य 108 श्री समयसागर जी महाराज, आर्यिका श्री 105 आदर्शमति माता जी आर्यिका श्री 105 दृढ़मति माता जी के मंगल आशीर्वाद से बिलासपुर दिगंबर जैन समाज में प्रथम चातुर्मास हेतु आर्यिका श्री 105 अनर्घमति माता जी, आर्यिका श्री 105 स्वाध्यायमति माता जी, आर्यिका श्री समयमति माता जी, आर्यिका श्री 105 साकारमति माता जी, आर्यिका श्री स्वस्थमति माता जी के सानिध्य में सभी कार्यक्रम संपन्न हुवे ।

शोभायात्रा रथ में जीवंत झांकी जिसमें कुबेर इंद्र चौधरी चेतन रागनी जैन, सौधर्म इंद्र विशाल रेशु जैन सारथी सीमा जैन ने भाग लिया।

गुरुवार को भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव के अवसर पर बुधवार को सरकंडा मंदिर में महामस्तकाभिषेक एवं निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा ।

शोभा यात्रा

- शोभा यात्रा की शुरुआत : बैंड, बैनर, पंच रंगा झंडा और पाँच झंडे
- धार्मिक प्रतीक: धर्म चक्र, तीन झाँकी, बड़ा कलश और पाँच महिला कलश सहित
- माता जी और पुरुष वर्ग: माता जी ससंघ, पुरुष वर्ग- अष्ट मंगल, अष्ट प्रतिहार्य, 64 चंवर
- बालिका मंडल और रथ: सात कमल (बालिका मंडल), रथ
- महिला मंडल और सखी ग्रुप: सरकंडा महिला मंडल, सखी ग्रुप, वधु मंडल सहित समाज के लोग उपस्थित थे।
- शोभा यात्रा सरकंडा मंदिर जी से निकली जो नूतन चौक होते हुए वापस सरकंडा मंदिर की पहुंची । शोभायात्रा में बच्चों ने जीवंत झांकी निकाली
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर समाज के बच्चों ने जीवन झांकी में जिसमें कमठ मरुभूति सर्वार्थ वेदार्थ, वज्रघोष हाथी सर्प सात्विक हाथी अनोखी, स्वर्ग नरक शौर्य देव विद्यांशी रक्षिता देवी बनी, निवित्री शुभी संस्कार, अन्वी- नारकी बनी, अग्निवेग अजगर आर्या -अजगर और विराज – मुनिराज बने, भील मुनिराज शुभ -मुनिराज, श्रेयश- भील बने, राजा अरविंद सिंह आस्तिक- मुनिराज, आगम – सिंह बने । पार्श्वनाथ वीर राज कुमार.और नाना- सपूर्वा साधु बने, देव – आदया कमठ -उपसर्ग, धरणेंद्र पद्मावती – इवान, अणिमा बने। पार्श्वनाथ – अतीक्ष -मुनिराज बने ।
महोत्सव के मुख्य आकर्षण:

- निर्वाण लाडू: भगवान पार्श्वनाथ को चढ़ाया जाने वाला निर्वाण लाडू विशेष रूप से बनाया जाता है ।
- पूजा और आराधना: जैन समाज के लोग भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा और आराधना करते हैं, जिसमें शांतिधारा, जलाभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठान शामिल होते हैं ।
- सामूहिक भक्ति: इस अवसर पर जैन समाज के लोग सामूहिक रूप से भक्ति करते हैं और भगवान पार्श्वनाथ के गुणों का गान करते हैं।
महोत्सव का महत्व:

भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान पार्श्वनाथ की मोक्ष प्राप्ति की याद में मनाया जाता है।

यह पर्व जैन समाज के लोगों को भगवान पार्श्वनाथ के जीवन और उनके आदर्शों की याद दिलाता है और उन्हें अपने जीवन में धार्मिक और नैतिक मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से विनोद जैन, सनत जैन, सुकमाल जैन, श्रीकांत जैन, प्रवीण जैन, रेशू जैन, मनोज जैन, संदीप जैन, मनीष जैन, संजय जैन, विजय जैन, अनिल जैन, वीर कुमार जैन, जयकुमार जैन, शकुन जैन, साधना जैन, माधवी जैन, दीपक जैन, रजनीश जैन, विशाल जैन, कमल जैन, अमित जैन, अंशुल जैन, प्रभाष जैन, डॉ प्रकाश वासल, शुभम जैन, सुप्रीत जैन, पराग जैन, सहित बड़ी संख्या में सकल जैन समाज के लोग उपस्थित थे ।


