रायपुर (अमर छत्तीसगढ़) 31 जुलाई। शासन दिपिका साध्वी मंजुला श्री जी आत्मा को जागृत कराते हुए धर्म सभा में कहा- हम आप सभी भाग्यशाली हैं। जिन्हें इस कलयुग में भी परमात्मा महावीर की जिनवाणी सुनने को मिल रही है। जगत के समस्त प्राणियों की रक्षा और दया के लिये ही परमात्मा महावीर ने धर्म देशना देकर हम सभी पर महान-महान उपकार किया है।
परमात्मा महावीर की जिनवाणी का प्रचार-प्रसार करना प्राणी मात्र की रक्षा एवं दया के लिये कार्य करते रहना इससे अधिक श्रेष्ठ विश्वकल्याण का अन्य कोई कार्य नहीं हो सकता।
हे भव्य उपासकों आत्मा का मूलबीज है- आत्म जिज्ञासा अहिंसा का आधार आत्मा है। आत्मा को बोध होने पर ही अहिंसा, संयम, तप की आराधना हो सकती है। हे भव्य उपासकों बंधे कर्म ही इस संसार में परिभ्रमण कराता रहता है।
इससे मुक्ति पाने के लिये परमात्मा महावीर ने शोध कर बताया क्रिया का स्वरूप जानना और त्याग करना नितांत आवश्यक है।
हे भव्य उपासकों परमात्मा महावीर की जिनवाणी कह रही है हमें जीवन में जो यह पांच इन्द्रियां मिली है उसे तप, त्याग, संयम में लगाकर कार्य करते रहोगे तो जीवन सफल बना लोगे जीवन को मर्यादित बनना बहुत जरूरी है।
आज के इस कलयुग में इन्द्रियों को कंट्रोल करना बड़ा कठिन होता जा रहा है? हमारी आंखे की इन्द्रियां आज के नये-नये विज्ञान प्रयोग और पूरा संसार भ्रमण में लगा हुआ है।
इस संसार सुख को पाने में सुंदर-सुंदर रूप एवं अश्लील चीजों आदि को देखते-देखते कई महापुरूष एवं संसार के प्राणी भटक गये, भटकते जा रहे हैं। ज्ञानिजन कहते है ये सब पुदगल है आते रहेंगे, जाते रहेंगे।
परमात्मा महावीर की जिनवाणी कह रही है- हे भव्य आत्मा तु संसार परिभ्रमण मत कर। तु आत्मा को परमात्मा की करूणा, दया, मैत्री से जीवन को जोड़ ले तो तेरी आंखें भी पवित्र हो जायेगी और आत्मा भी।
हे भव्य उपासकों परमात्मा के वचन है जहां-जहां का मोहल्ला, गांव, शहर आदि खराब है गलत कार्य होते है वहां कभी भी नहीं रहना नही तो पूरा जीवन सभी का बर्बाद हो जाएगा। इसका बहुत ही सुन्दर वर्णन एक साधु के जीवन
चारित्र से धर्म सभा को बताया। ऐसे जगहों से परमात्मा की दी 5 इन्द्रियों को और आत्मा को बचा कर रखों। इन्द्रियों का स्वभाव है मन को बस में नही रखना है। इस पर कन्द्रोल कर सफलता पा ली तो मन की इन्द्रियों पर कंट्रोल हो गया जीवन सफल हो गया।
हे भव्य उपासकों धन्नाशाली भद्र के पिताजी ने तीनो बेटों को राजा के जंगल, महल आदि की उदाहरण देकर समझाया ईर्ष्या से उसकी कैसे मृत्यु हुई पर तीनो बेटे कहे पिताजी आपको धन्ना ही धन्ना दिखता है वह तो दोनो बार गलत कार्य से पैसा कमाया है। वह ईमानदारी से कमायेगा तभी हम मानेंगे। पिताजी अब तीसरी परीक्षा कैसे लेते है इसे आगे जानेंगे क्रमशः ।

