राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ)1 अगस्त। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि धर्म करने का कोई भी मौका मिले तो मत चुकिए। शरीर की पीड़ा को भी भक्ति बनाकर आराधना कीजिए। आप निश्चित ही मोक्ष मार्ग में आगे बढ़ेंगे।
जैन बगीचे के नए हाल में चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि कुछ घटनाएं ऐसी होती है जिससे कुछ लोगों को आनंद आता है और कुछ लोग दुखी हो जाते हैं।
सुख दुख को ध्यान से हटाकर हमें आराधना की ओर ध्यान देना होगा तभी हमारे भाव मजबूत होंगे। हमें इस भव ( संसार) में ही इतनी साधना कर लेनी है कि हम आत्म कल्याण के मार्ग की ओर आगे बढ़ जाएं।
मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि संयम जीवन में काफी चुस्तता रहती है और चरित्र निर्मल बनता है।
हमारे चरित्र में कोई दोष न लगे, हमें वैसा कार्य करना है। उन्होंने कहा कि धर्म का मूल चरित्र और औचित्य का पालन करना ही है।
मुनि श्री ने कहा कि आज व्यक्ति अपना फायदा देखता है, दूसरे को क्या नुकसान हो रहा है, इससे उसको कोई मतलब नहीं रहता। पड़ोसी के घर तमाशा देखने में लोगों को उत्साह रहता है किंतु जब अपने घर तमाशा होता है तो वह नहीं चाहता कोई उसे देखें।
उन्होंने कहा कि अच्छी खबर फैलने में समय लगता है, जबकि बुरी खबर फैलने में कोई समय नहीं लगता। मुनिश्री ने कहा कि अफवाहों से बचें और अपने आपको ध्यान /साधना में लगाकर आत्म कल्याण के मार्ग की ओर कदम बढ़ाएं। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी।

