रायपुर (अमर छत्तीसगढ) 3 जुलाई। शासन दिपिका साध्वी मंजुला श्री जी रोज अपने प्रवचन में आत्मा को जागृत करने का भरपूर प्रयास कर रही हैं। उन्होने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा- हे भव्य उपासकों जीवन में मित्र किसे बनाना चाहिये।
ये सीखे सर्वज्ञसर्वदर्शी केवल ज्ञानि भगवान महावीर से ये परमात्मा महावीर ने संसार पर बड़ा उपकार करके संसार को राह दिखाई है।
हे भव्य उपासकों इस कलयुग में भारत देश को गलत दिशा दिखाई है तो बाहर की पाश्चात्य संस्कृतियों ने। भारत देश में जितने भी त्यौहार मनाये जाते है वे करूणा, दया, मैत्री भाव के होते है। विदेश देशों में ये सब नही मिलेंगे। आज दोस्ती स्वार्थ की व दिखावटी बनती जा रही है।
हे भव्य उपासकों- अमेरिका जो धनाद्य देश है हमारे भारत देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी जी अमेरिका गए उन्हे ट्रंप जी ने गले गलाया। ट्रंप जी ने उनकी कुर्सी सरकाकर उन्हे बैठाया। आज वही ट्रंप भारत ही नही सारे विश्व को टेरिफ व धमकियों से सभी का जीवन बर्बाद करना चाहता है? मानव की मानवता कहा जा रही है? ये कैसी दोस्ती?
हे भव्य उपासकों- परमात्मा महावीर संदेश दे रहे है जीवन में दोस्त उसे बनाओ जो अंतिम क्षण तक तुम्हे साथ दे। आज के युग में लोग पैसा वाले से दोस्ती बनाना पसंद करते है? पैसा तो वैश्या के पास भी है। ऐसी दोस्ती किस काम की।
सच्चा दोस्त वह है जो सभी का हित सोचे जिस दोस्त का चरित्र, विनय, दया एवं राजनैतिक में छल-कपट न कर परोपकार काम में साथ दे वह दोस्त से दोस्ती हमेशा साथ देगी।
हे भव्य उपासकों एक पिता का पुत्र था वह घर में कम रहता बाहर दोस्तो के साथ रोज खाना, पीना, ऐश करता रहता। एक दिन पिताजी ने पूछा बेटा ये दोस्त जैसी दोस्ती मेरे साथ कर लो तुम्हे रोज घुमाउंगा, तुम्हे अच्छा खाना और अच्छी-अच्छी जगह भी ले जाउंगा।
बेटे ने बात मान ली और पिता के दिये सारे संस्कार में वह दल गया और वह टेंशनमुक्त होकर निर्भयवान बन गया। उसे धर्म से भी जोड़ दिया।
एक दिन पिताजी स्कूल छोड़कर घर आये। बाद में मालूम पड़ा स्कूल की बिल्डिंग धाराशायी गई है। पिताजी वहां गये वहां धराशायी बिल्डिंग के पास पुलिसवाले खड़े है।
पिताजी अपने बेटे को आवाज दे पुकार रहे थे। पुलिसवाला पिता को मना किया सब मर गए है। आप यहां से दूर रहो। पिताजी का मन मान नही रहा था। वे आवाज देते रहे। जहां बिल्डिंग गिरी थी
उसके एक हिस्से से मलमा सरक रहा था और उस भाग से आवाज आई। पिताजी बोले ये आवाज सोनू मेरे बेटे की है। वहां पहुंचे कहा तुम ठीक हो तो उसने कहा मैं और मेरे 10 दोस्त बिल्कुल ठीक है थोड़ी खरोंचे आई है।
हमें पिताजी प्यास लगी है। पिताजी ने पुलिस का सहयोग लेकर बच्चों को पानी पिलाया। सोनू बेटे को खुशी हुई कहा मेरे पिता की दोस्ती और संस्कार ये धर्म ही मेरी रक्षा की। उसे विश्वास हो गया धर्म ही जीवन की रक्षा करता है।
हे भव्य उपासकों परमात्मा महावीर संदेश दे रहे है मित्र बनना है तो अपनी आत्मा से बनाओ। भगवान महावीर ने 12 वर्ष घोर तप कर अपनी आत्मा को अपना मित्र बना लिया। जो उनकी आत्मा हमेशा-हमेशा के लिये अजर-अमर बन गयी।
हे भव्य उपासकों आप लोग भी जागो अपनी आत्मा में आत्मा का शोध करो हमने परिवार, व्यापार, दोस्त, रिश्तेदार से कैसी दोस्ती की छल, कपट, बेईमानी की या करूणा, दया, मैत्री व सब के हित की यह आप कमसे कम 10 मिनट आज ध्यान कर जीवन को धीरे-धीरे परिवर्तन कर परमात्मा महावीर के नवतत्वों का ज्ञानार्जन कर अपनी आत्मा को कर्म बंधनो से मुक्त बनाने का प्रयास करे। और सोंचे वह दिन मेरा धन्य होगा जब मैं भी अपनी आत्मा को परमात्मा बना लूंगा।

