क्रोध पर नियंत्रण कर लिया तो बन जाएंगे महावीर-संयमप्रभाजी म.सा.कषाय शांत होने पर ही जीवन में हो सकता धर्म का बीजारोपण-शशिप्रभाजी

क्रोध पर नियंत्रण कर लिया तो बन जाएंगे महावीर-संयमप्रभाजी म.सा.कषाय शांत होने पर ही जीवन में हो सकता धर्म का बीजारोपण-शशिप्रभाजी

सूरत गुजरात (अमर छत्तीसगढ़) ,3 अगस्त। संसार में हमारे लिए सब दिन एक जैसे नहीं होते है। संसार का स्वभाव है कभी एक पलड़ा उपर तो कभी एक पलड़ा नीचे होता रहता है। हमे भगवान महावीर जैसा बनना है तो अपने क्रोध पर नियंत्रण करना होगा।

परमात्मा का स्मरण करते समय मन में किसी ओर का विचार नहीं आना चाहिए। परमात्मा तो हमारी आत्मा है जो धर्म की रक्षा करता है। धर्म भी हमारी तभी रक्षा करेगा जब हमारे मन में दीन दुखी को देकर करूणा भाव उत्पन्न हो।

ये विचार श्रमण संघीय आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनिजी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी एवं राजस्थान प्रवर्तिनी साध्वी शिरोमणी परम पूज्या सद्गुरूवर्या श्री यशकंवरजी म.सा.,आध्यात्म साधिका समतामूर्ति परम पूज्या सद्गुरूवर्या श्री सिद्धकंवरजी म.सा. की सुशिष्या संयम साधिका श्री संयम प्रभाजी म.सा. ने रविवार को श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गोड़ादरा के तत्वावधान में महावीर भवन में आयोजित चातुर्मास ‘‘शुद्धता से सिद्धालय की ओर’ के तहत प्रवचन में व्यक्त किए।

उन्होंने जीवन में क्रोध से बचने की सीख देते हुए कहा कि ज्यादा क्रोध करने से शरीर कमजोर हो जाता है ओर नरक गति का बंध भी हो जाता है। गुस्सा आए तो शांत भाव धारण करना जो सीख लेता है उसके लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते है।

उन्होंने प्रवचन के दौरान भजन ‘‘क्रोधी तेरी आत्मा भव-भव में दुख पाएगी’’की भी प्रस्तुति दी। धर्मसभा में मधुर व्याख्यानी श्री शशिप्रभाजी म.सा. ने कहा कि जब तक जीवन में कषाय शांत नहीं होंगे तब तक धर्म का बीजारोपण नहीं हो सकता।

क्रोध से वशीभूत होकर जीव पागल बन जाता है। खुद भी अशांत रहता है ओर दूसरों को भी अशांत कर देता है। उन्होंने कहा कि वीर वहीं होते है जो क्षमा का भाव रखते है। भगवान महावीर के नेत्रों में करूणा झलकती है क्योंकि वह क्षमावान है ओर कभी क्रोध नहीं करते है। किसी के प्रति क्रोध शांत करने पर भी अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्ञान का बल जीवन में प्राप्त होने पर व्यक्ति को सब समझ में आ जाता है।


चातुर्मास में स्वाध्यायशीला साध्वी श्री किरणप्रभाजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हो रहा है।


पूज्य महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में गुरू वेणी अंबेश दरबार में जिनवाणी के साथ निरन्तर तप त्याग व धर्म ध्यान की गंगा प्रवाहित हो रही है। एकासन,आयम्बिल व उपवास की लड़ी निरन्तर चल रही है। महासाध्वी मण्डल ने एकासन सिद्धि तप अनुष्ठान के दूसरे दिन सभी तपस्वियों की अनुमोदना करते हुए मंगलपाठ सुनाया।

कोटा, बारडोली, मोहवा, करंजलिया आदि स्थानों से पधारे अतिथियों का स्वागत बहुमान गोड़ादरा श्रीसंघ द्वारा किया गया। सूरत के वात्सल्यपुरम आश्रम से गीता मैडम के नेतृत्व में आए 25 बच्चों ने भी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। आश्रम के लिए श्रीसंघ एवं भामाशाहों के सहयोग से 20 हजार रूपए की राशि दी गई।

प्रश्नोत्तरी, लक्की ड्रॉ एवं प्रभावना लाभार्थी तेजमल, मनीष कुमार, अंकित कुमार बाबेल के जन्मदिवस पर बाबेल परिवार(खेजड़ी वाले) रहा। संचालन श्रीसंघ के उपाध्यक्ष गौतमचंदजी संचेती ने किया।

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