नगपुरा (अमर छत्तीसगढ) 4 अगस्त। श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ नगपुरा में श्री आचारांग सूत्र प्रवचन माला में साध्वी श्री लब्धियशा श्री जी ने कहा कि श्रमण भगवान महावीर ने फरमाया कि बंध और मोक्ष यहीं पर है।
बंधन और मोक्ष स्वयं की भावनाओं के आधार पर होता है। मन की निर्मलता मोक्ष की ओर ले जाता है। मन की चंचलता संसार भ्रमणा का कारक बनता है।

मन ही मनुष्यों के बंधन और मोक्ष कारण है। मनुष्य की मानसिक स्थिति ही उसे बंधन (जन्म-मृत्यु के चक्र) में रखती है! मानसिक स्थिति ही उसे जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति की ओर ले जाती है।
प्रवचन श्रृंखला में हितोपदेश देते हुए साध्वी श्री लक्ष्ययशा श्री जी म. सा. ने कहा कि शरीर, मन, और आत्मा तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए है, और एक दूसरे को प्रभावित करते है! इन तीनों का संतुलन और सामंजस्य ही आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

शरीर-मन और आत्मा इन तीनों के केन्द्र में हमारा जीवन है। मन संसार केन्द्रित है, इसे आत्म केन्द्रित बनाकर आत्मा का कल्याण कर सकते है।
आत्मकल्याण सतत् प्रक्रिया है जिसमें धैर्य और समर्पण की आवश्यकता है भौतिक सुखों, इच्छाओं में आसक्त मन को, विषयों से विरक्त कर आत्मा से जुड़ने का प्रयास ही आध्यात्मिक यात्रा है।

भक्ति सभर आठ दिवसीय महोत्सव सम्पन्न
तीर्थंकर श्री नेमनाथ प्रभु जन्म-दीक्षा कल्याणक, श्री पार्श्वनाथ प्रभु निर्वाण कल्याणक एवं कविकुल किरीट व्याख्यान वाचस्पति पूज्यपाद आचार्य श्रीमद् विजय लब्धि सूरीश्वर जी म. सा.की 64 वीं पुण्यतिथि निमित्ते श्रावण सुदी तृतीया से श्रावण सुदी नवमी तक “श्री नेम-लब्धि” अष्टान्हिका महोत्सव का आयोजन हुआ ।

जिसमें अनेक महापूजन, भक्ति संध्या का विशिष्ट आयोजन सह संयम संवेदना का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। अष्टान्हिका महोत्सव में कविताबेन दोशी बदलापुर, शा. जांवतराज छोगाजी परिवार साँचोर, उज्जवलाबेन अनिलजी गांधी नागपुर तथा हैद्राबाद के विभिन्न संस्था के प्रमुखगण प्रवीण वोरा, दिलीप श्रीश्रीमाल, अशोक विनायकीया, महेन्द्र सिंघी, बाबूलाल बागरेचा, मोहनलाल बागरेचा, दिनेश धोका, आई. पी. एस. चिराग जैन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक का आगमन हुआ।

ट्रस्ट मंडल की ओर से अध्यक्ष गजराज पगारिया, मैनेजिंग ट्रस्टी पुखराज दुगड़, ट्रस्टी मूलचंद जैन चातुर्मास सहसंयोजक मयूरभाई सेठ ने अतिथियों को तीर्थ पति की प्रतिमा भेंटकर सम्मान किया। देश भर के सैकड़ों श्रद्धालु चातुर्मास आराधना में निमग्न है, तीर्थ परिसर में जप तप अनुष्ठान का अलौकिक वातावरण है।

