आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ने के लिए पुरुषार्थ करना होगा- मुनि वीरभद्र

आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ने के लिए पुरुषार्थ करना होगा- मुनि वीरभद्र

आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ने के लिए पुरुषार्थ करना होगा- मुनि वीरभद्र

  • माता-पिता दुनिया के श्रेष्ठतम पात्र, उनका सदैव सम्मान करें

जैन बगीचे में चातुर्मासिक प्रवचन

राजनांदगांव (अमर छत्तीसगढ) 5 अगस्त। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि हम आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ सकते हैं किंतु उसके लिए हमें पुरुषार्थ करना होगा, सद्गुरु ढूंढना होगा और उन पर पूरा विश्वास करना होगा।
जैन बगीचे के नए हाल में अपने प्रवचन के दौरान संत श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि राग-द्वेष का त्याग करें और मोक्ष मार्ग में बढ़ने के लिए सद्गुरु को खोजना शुरू करें। सद्गुरु से संपर्क हो जाए तो उन पर पूरा विश्वास करें और अहो भाव से उनकी आज्ञा का पालन करें।

संसार में कोई भी कार्य अटकने वाला नहीं होता और ना ही किसी के बिना कोई कार्य अटकता ही है।अपने को अपनी आराधना पर विश्वास होना चाहिए।
जैन मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि मेरा जगत में कोई बिगाड़ नहीं सकता, यदि कोई बिगाड़ सकता है तो वह मैं स्वयं हूं। यदि मैं अपने अंदर की परिणीति को निर्मल बना लेता हूं तो मैं आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ जाऊंगा।

उन्होंने कहा कि आत्म कल्याण का एकमात्र लक्ष्य लेकर मन को निर्मल बनाएं, अपनी क्रियाओं के प्रति आदर भाव बनाएं और एकमात्र आत्म कल्याण के लक्ष्य से क्रिया करें। वचन और काया को इस क्रिया में लाएं।


मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि इस जगत में माता-पिता श्रेष्ठतम पात्र है, उनका सदैव सम्मान करें। माता-पिता का आशीर्वाद सदैव फलता है। जहां मन से प्रार्थना निकलती तो वह प्रार्थना स्वीकार होती ही है।

उन्होंने कहा कि अपने कर्तव्यों को पालन करते हुए, अपनी क्रियाओं के माध्यम से आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ें, जीवन अवश्य सफल होगा।यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी।

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