नगपुरा दुर्ग (अमर छत्तीसगढ) 7 अगस्त – व्यक्ति का व्यवहार उनके जीवन का झलक होता है । प्रत्येक मनुष्य का विचार और आचार अलग होता है। इस कारण अनेक प्रसंग पर विचारों की टकराहट होती है। इससे वैमनस्य और कटुता का बीजारोपण हो जाता है।
व्यक्ति को चाहिए कि दूसरों के विचारों को नकारने के बजाय स्वयं में सकारात्मक विचारों का बीजारोपण करें। इससे वैमनस्य और कटुता को उत्पन्न होने से पहले ही भगाया जा सकता है।
सकारात्मक सोच जीवन को उर्ध्वगति की ओर ले जाता है। नकारात्मक विचार हमें मन से ही नहीं अपितु तन से भी कमजोर कर देता है।

श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ नगपुरा में चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला में साध्वी श्री लब्धियशाश्रीजी म सा ने उक्त उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा हम आसपास के वातावरण को देखकर उसको बदल नहीं सकते, लेकिन अपनी सकारात्मक सोच से वातावरण में फैले दुर्गणों से स्वयं को बचा सकते हैं।
सामान्य व्यवहार में सकारात्मक सोच महत्वपूर्ण तो है ही, कर्म के सिद्धांत में भी सकारात्मक सोच का महत्वपूर्ण स्थान है। सकारात्मक विचारों के कारण हम दूसरों में सद्गुण देखेंगे, उनके दुर्गुणों की ओर ध्यान नहीं जाएगा। हम सद् व्यवहार को देखेंगे दुर्व्यवहार की ओर दृष्टि नहीं करेंगे।

सकारात्मक सोच जादुई शक्ति से कम नहीं
उन्होंने कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण जीवन में जादुई शक्ति का काम करता है। जिनकी दृष्टिकोण सकारात्मक है, उन्हें हरकदम पर सफलता मिलती है। हमे दृष्टि के साथ दृष्टिकोण को, चित्र के साथ चरित्र को, साधन के साथ साधनाओं को और नजर के साथ नजरिये को सुंदर बनाना चाहिए।
नकारात्मकता से खुशियां खत्म
पेड़ के तने से लाखों तीलियां बनती हैं, लेकिन एक तीली लाखों पेड़ों को जला सकती है। वैसे ही नकारात्मक नजरिया जिन्दगी की लाखों खुशियों को खत्म कर सकता है। व्यक्ति में भूल सुधारने के लिए दिमाग के साथ भूल स्वीकारने का दिल होना चाहिए। स्वीकारने का भाव होगा तभी सुधरने का प्रयास होगा।

विशिष्ट अनुष्ठान
रविवार दि 10 अगस्त को प्रातः 9 बजे से 108 सजोड़े के साथ महाप्रभाविक श्री पार्श्व-पद्मावती महापूजन आयोजित है। शुक्रवार को श्री पद्मावती माता को चुनरी समर्पण का अनुष्ठान सम्पन्न होगा।

