राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 15 अगस्त। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि हर रोज दो बार प्रतिक्रमण अवश्य करना चाहिए। प्रतिक्रमण से पूर्व हमें यह चिंतन मनन कर लेना चाहिए कि जो भगवान ने मना किया है हमने वैसा कौन कौन सा काम किया है। दरअसल हम वह काम करते हैं जो हमें नहीं करना चाहिए और वह काम नहीं करते हैं जो हमें करना चाहिए।
जैन बगीचे के नए हाल में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में वीरभद ( विराग ) मुनि ने कहा कि श्रावक प्रतिक्रमण के जरिए आत्मा रूपी वस्तु को उज्जवल करता है। हम प्रतिक्रमण करते हैं तो हमारे भीतर परिवर्तन नजर आना चाहिए। हम पदार्थों के बारे में जितना जानेंगे हमारी आसक्ति उतनी कम होगी। मुनिश्री ने कहा कि जो हमारे लिए आवश्यक है, उसे हम करना नहीं चाहते। प्रतिक्रमण से हम दूर भागते हैं जबकि अनिवार्य रूप से हमें नियमित प्रतिक्रमण करना चाहिए।
वीरभद ( विराग ) मुनि ने कहा कि समूह में काम करना चाहिए। समूह में काम करने से सफलता की संभावना ज्यादा रहती है। उन्होंने कहा कि गुरु अंदर से नर्म होता है किंतु बाहर से कठोर होता है। यदि वह ऐसा ना करे तो शिष्यों को सही ढंग से सीख नहीं दे पाएगा। उन्होंने कहा कि रात की अपेक्षा दिन में ज्यादा पाप होते हैं।इसलिए प्रतिदिन कम से कम दो बार प्रतिक्रमण करना चाहिए और अपने आप को पाप से दूर रखने का प्रयास करना चाहिए। प्रतिक्रमण के रास्ते आत्म कल्याण के मार्ग की ओर बढ़ना चाहिए। हमें धर्म पथ पर इतना बढ़ जाना चाहिए कि वह हमें मोक्ष की मार्ग की ओर ले जा सके। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी।

