श्री गिरनार तप पारणा उत्सव और मेहंदी सांझी 16-17 अगस्त को…. संसार से मुक्ति चाहिए तो बंधनों में बंध जाओ: साध्वी हंसकीर्ति श्रीजी

श्री गिरनार तप पारणा उत्सव और मेहंदी सांझी 16-17 अगस्त को…. संसार से मुक्ति चाहिए तो बंधनों में बंध जाओ: साध्वी हंसकीर्ति श्रीजी

रायपुर(अमर छत्तीसगढ) 15 अगस्त। आत्मोत्थान चातुर्मास 2025 के अंतर्गत शुक्रवार को दादाबाड़ी में आयोजित प्रवचन में परम पूज्य हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. ने कहा कि यदि संसार से मुक्ति चाहिए, तो सही बंधनों में बंधना सीखो। जैसे मंदिर के घेरे आस्था की रक्षा करते हैं, सांप पिटारे में सुरक्षित रहता है, बिजली के तार आवरण से घिरे होते हैं और धन को हम लॉकर में बंद कर सुरक्षित रखते हैं—वैसे ही आध्यात्मिक जीवन में भी बंधन सुरक्षा का साधन बन सकते हैं।

साध्वी जी ने एक प्रेरक प्रसंग सुनाया— एक गाय चरवाहे के बंधन में बंधी रहती है। आवारा पशु हमेशा भय में जीते हैं कि कहीं कोई सड़क पर डंडा न मार दे, लेकिन गाय जानती है कि उसका मालिक शाम को उसे घर अवश्य ले जाएगा। इसलिए वह सांझ ढलते ही अपने खूंटे के पास लौट आती है और मालिक के आते ही सिर झुका देती है, ताकि आसानी से खूंटे से बंध सके।

एक दिन, विचरण करते-करते वही गाय जंगल में पहुंच गई। अचानक सामने शेर आ गया। शेर ने उसे दौड़ाया। डर से भागती गाय एक तालाब तक पहुंची और उसमें कूदकर दूसरी ओर निकलने लगी। लेकिन किनारे पर दलदल था—गाय उसमें फंस गई, और पीछा करता शेर भी उसी दलदल में फंस गया।

दोनों एक-दूसरे को देखने लगे। गाय ने शेर से पूछा— “क्या तुम्हारा कोई मालिक नहीं है?”

शेर गर्व से बोला— “मैं जंगल का राजा हूं, मेरा कोई मालिक नहीं।” गाय ने शांत भाव से कहा— “मेरा मालिक है, वह मुझे ढूंढता हुआ आएगा और बचा लेगा।”

और सच में, कुछ देर बाद मालिक वहां पहुंचा और गाय को दलदल से बाहर निकाल लिया। शेर को भी बचाने का विचार उसके मन में आया, लेकिन उसने सोचा—”अगर इसे बचा लिया, तो यह तुरंत मेरा शिकार कर देगा।” इसलिए शेर को वहीं छोड़ दिया।

इस प्रसंग में गाय आत्मा है, शेर अहंकार है, और मालिक सद्गुरु हैं। आत्मा जो सद्गुरु के बंधन में बंधी है, वह सुरक्षित है; जबकि अहंकार, चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः अपने ही अभिमान में फंसकर नष्ट हो जाता है।

श्री गिरनार तप पारणा उत्सव और मेहंदी सांझी का दिव्य संगम

जैन संस्कृति और भक्ति की गूंज से गूंजने वाली धर्मनगरी रायपुर एक बार फिर पावन अवसर की साक्षी बनने जा रही है। श्री जिनकुशलसूरी दादाबाड़ी के पावन धाम पर 16 और 17 अगस्त 2025 को श्री गिरनार तप के पारणा उत्सव का भव्य आयोजन होगा। परम पूज्य साध्वी श्री हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में यह आयोजन तप, भक्ति और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहेगा।

मेहंदी सांझी और मंगल गीत – 16 अगस्त 2025

तप की मधुरता और संस्कृति की सुगंध को एक साथ महसूस कराने के लिए 16 अगस्त, शनिवार को दोपहर 2 बजे से श्री जिनकुशलसूरी भवन में “मेहंदी सांझी” और “मंगल गीत” का आयोजन होगा। गीत-संगीत और पारंपरिक रंगोलियों से सजे इस कार्यक्रम के पश्चात हाई टी की भी व्यवस्था रहेगी। इस अवसर पर श्रीमती नीलिमा जी निमाणी एवं उनकी टीम अपनी मनमोहक प्रस्तुति से सभी को आनंदित करेंगी।

तपस्या अनुमोदनार्थ कार्यक्रम – 16 अगस्त 2025

सुबह 9:00 बजे – प्रवचन का आयोजन, जिसमें धर्म और तप का महत्व प्रतिपादित किया जाएगा।

दोपहर 2:00 बजे – मेहंदी सांझी एवं मंगल गीत का सांस्कृतिक संगम।

रात्रि 8:30 बजे – प्रभुभक्ति से ओतप्रोत “जय जय गरवो गिरनार” का संगीतमय आयोजन।

पारणा उत्सव– 17 अगस्त 2025

रविवार, 17 अगस्त को सुबह 9:00 बजे तपस्वियों का भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित होगा। यह क्षण, तप की विजय और आत्मशुद्धि का प्रतीक होगा। इसके पश्चात 11:45 बजे साधर्मिक वात्सल्य के माध्यम से सभी उपस्थित जन आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करेंगे।

विशेष आकर्षण और धार्मिक महत्व

इस अवसर पर मुंबई के सुप्रसिद्ध संगीतकारों द्वारा दर्शनार्थ गिरनारजी और नाकोड़ा जी के भक्ति भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी, जो वातावरण को भक्ति रस से भर देगी। तप अभिनंदन उत्सव के मुख्य सूत्रधार डॉ. विपिन बागरेचा, नागदा (मप्र) होंगे।

लाभार्थी और स्मृति

यह आयोजन नीमाला (माया) धर्मपत्नी मितल झाबक के मानसक्षेत्र तप की पूर्णाहुति एवं स्व. श्रीमती तेजुबाई सोनारराज जी की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है।

साथ ही जीवनचंद, जैनल, महेंद्र, पारस, निनाल, निवान, विवाना झाबक परिवार, भाटागांव रायपुर तथा मितल पीयूषजी कोचर परिवार के विशेष सहयोग से यह कार्यक्रम भव्य रूप ले रहा है।

ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली तथा आत्मोत्थान चातुर्मास समिति 2025 के अध्यक्ष अमित मुणोत ने जानकारी दी कि दादाबाड़ी में प्रतिदिन सुबह 8:45 से 9:45 बजे तक साध्वीजी के प्रवचन का आयोजन भी हो रहा है। समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर जिनवाणी का लाभ लें।

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