गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी एवं भारतीय जैन संघठना की संयुक्त पहल “वस्त्र संगम” का शुभारंभ….मुख्य अतिथि वैभव सुरंगे ने बीजेएस की भागीदारी को इस पहल की सफलता की गारंटी बताया….कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने कहा “वस्त्र संगम केवल कपड़ों का दान नहीं, बल्कि गरिमा, संवेदना और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक

गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी एवं भारतीय जैन संघठना की संयुक्त पहल “वस्त्र संगम” का शुभारंभ….मुख्य अतिथि वैभव सुरंगे ने बीजेएस की भागीदारी को इस पहल की सफलता की गारंटी बताया….कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने कहा “वस्त्र संगम केवल कपड़ों का दान नहीं, बल्कि गरिमा, संवेदना और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक

बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ), 16 अगस्त। 79वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (जीजीवी), बिलासपुर में भारतीय जैन संघटना (बीजेएस), बिलासपुर के “वस्त्र संगम” का भव्य शुभारंभ किया। यह दूरदर्शी और मानवीय पहल माननीय कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल की परिकल्पना है, जो “सहयोग से समृद्धि” के मूलमंत्र पर आधारित है।

इस पहल का उद्देश्य केवल वस्त्र दान नहीं बल्कि हर दान को सम्मान, स्नेह और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ जोड़ना है ताकि प्रत्येक कपड़ा गरिमा की कहानी कहे और हर हाथ में आशा का संदेश पहुँचे।

वस्त्र संगम की प्रमुख विशेषताएं
दान किए गए वस्त्रों का नैतिक संग्रह, सावधानीपूर्वक छंटाई और पुनः संवारना। लाभार्थियों के लिए गरिमापूर्ण “मॉल-शैली” वितरण, जहां वे स्वयं पसंद के वस्त्र चुन सकें ।छात्र-नेतृत्व में संचालन, लॉजिस्टिक्स और सामुदायिक जुड़ाव। अनुपयोगी कपड़ों का रचनात्मक अपसाइक्लिंग, जिससे बैग, खिलौने और अन्य उपयोगी वस्तुएं बनाकर सतत उद्यमिता को बढ़ावा।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार, विद्यार्थी, स्वयंसेवक, सामुदायिक सदस्य और सहयोगी संस्थाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। स्वयंसेवकों ने दाताओं और लाभार्थियों के बीच बने मानवीय रिश्तों की प्रेरक कहानियां साझा कीं, जिनमें संवेदना और साझेदारी की गहरी झलक थी।

भविष्य की सतत दृष्टिः वस्त्र संगम के तहत एक वस्त्र बैंक स्थापित करने की योजना है, जो विशेष अवसरों पर किफायती किराये पर वस्त्र उपलब्ध कराएगा, सतत फैशन को बढ़ावा देगा और अपसाइक्लिंग उत्पादों की बिक्री से सूक्ष्म उद्यमिता के अवसर पैदा करेगा। यह कम लागत वाला, पुनरुत्पादक मॉडल देशभर के विश्वविद्यालयों और समुदायों में लागू कर सजग दान और पर्यावरण न्याय का राष्ट्रीय आंदोलन बन सकता है।

मुख्य अतिथि वैभव सुरंगे, वरिष्ठ वनवासी समाजसेवी, ने प्रो. चक्रवाल की दृष्टि और मिशन की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि “जब संस्थाएं और समुदाय एक साथ आते हैं तो बदलाव की लहर और गहरी होती है।” उन्होंने बीजेएस की भागीदारी को इस पहल की सफलता की गारंटी बताया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. नीलांबरी दवे ने कहा कि हमें “शेयरिंग और केयरिंग” की संस्कृति को अपनाना होगा, क्योंकि यही स्थायी विकास और सामाजिक सौहार्द की नींव है। उन्होंने वस्त्र संगम के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।

‘दान से आगे एक आंदोलन’-अपने प्रेरक संबोधन में कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल ने कहा, “वस्त्र संगम केवल कपड़ों का दान नहीं, बल्कि गरिमा, संवेदना और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है।

हम वंचितों तक उच्च गुणवत्ता के वस्त्र पहुँचाकर न केवल उनकी ज़रूरतें पूरी कर रहे हैं बल्कि वस्त्र अपशिष्ट को भी कम कर रहे हैं, मिशन लाइफ़ के तहत सतत जीवनशैली को बढ़ावा दे रहे हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को सेवा और कौशल विकास से जोड़ रहे हैं।” उन्होंने कहा, “हर वस्त्र एक कहानी कहता है, और हम चाहते हैं कि यह कहानी उम्मीद देखभाल और एकता की हो।”

कार्यक्रम का स्वागत भाषण और वस्त्र संगम की अवधारणा पर प्रस्तुति डॉ. अर्चना यादव, एसोसिएट प्रोफेसर, सामाजिक कार्य विभाग द्वारा दी गई। भारतीय जैन संघठना के बारे में चैप्टर महिला शाखा अध्यक्ष सुनीता जैन ने जानकारी दी। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनीष श्रीवास्तव एसोसिएट प्रोफेसर, इंजीनियरिंग विभाग ने किया। संचालन डॉ. शालिनी मेनन, सहायक प्रोफेसर, शारीरिक शिक्षा विभाग ने किया।

इस अवसर पर जैन समाज के संरक्षक विमल चोपड़ा, बीजेएस प्रदेश सचिव अमरेश जैन, डाँ अंशुमन जैन, सुनीता जैन, संजय जैन, अजय जैन, शितेष बैद, अभिनव जैन, पराग जैन, प्रवीण जैन, प्रो. अमित जैन, प्रो. महावीर जैन, प्रो. सुनील जैन और डॉ. नेहा जैन की गरिमामयी उपस्थिति रही। डोनेशन ड्राइव के माध्यम से “वस्त्र संगम” का सफल शुभारंभ टीम के सदस्यों के अथक प्रयास से संभव हो पाया।

बीजेएस व सकल जैन समाज एवं जीजीवी के इस कार्य को उपस्थित अतिथियो ने भूरि भूरि प्रशंसा की गई। उन्होंने कहा अमूल्य योगदान से यह पहल न केवल सफल बनेगी, बल्कि समाज में मानवीय संवेदनाओं और सहयोग की मिसाल भी स्थापित करेगी।

स्वयंसेवक राखी, स्मृति, अरुणा, प्रिया और अस्मित (समाज कार्य विभाग) तथा अभिनंदन और मोनिश (फार्मेसी विभाग) ने अद्वितीय समर्पण और निःस्वार्थ सेवा का परिचय दिया। लाभार्थियों में विश्वविद्यालय निर्माण स्थल के श्रमिकों और हाउसकीपिंग कर्मचारियों ने वस्त्र संगम में खरीदारी का आनंद अनुभव किया।

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