तिलक नगर के सूर्य मार्ग स्थित सामुदायिक भवन प्रवचन मंडपम् में चातुर्मासिक प्रवचन

तिलक नगर के सूर्य मार्ग स्थित सामुदायिक भवन प्रवचन मंडपम् में चातुर्मासिक प्रवचन


जयपुर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 19 अगस्त तिलक नगर के सूर्य मार्ग स्थित सामुदायिक भवन प्रवचन मंडपम् में चातुर्मास के 42 वें दिन मंगलवार को प्रवचन में जैनाचार्य श्री विजयराज म.सा. ने मंगलाचरण के बाद भगवान महावीर के उत्तराध्ययन सूत्र के 31 वें अध्याय की चौथी गाथा का उपदेश देते हुए कहा है कि चरण विधि में आचरण की पद्धति, प्रक्रिया, प्रयोग और परिणाम बताए गए हैं।

चरण विधि नामक अध्ययन आवलंबन और आधार है, इसमें रहकर बहुत सारे जीव तिर गए और कुछ तिर रहे हैं। चौथी गाथा में दंड, शल्य और गर्व के बारे में बताया गया है। गर्व के तीन प्रकार रिद्धी (घमंड), गौरव और गारव हैं।

इनमें से सबसे बड़ा घमंड रिद्धी का, यानि भौतिकतावाद का है। सांसारिक जीव अपने धन, सम्पत्ति पर गर्व या घमंड करने लग जाता है। यह तीन जनों को होता है एक तो जिनके जीवन में विवेक नहीं होता, दूसरा जो अज्ञानी होते हैं, उन्हें घमंड हो जाता है और तीसरा जो व्यामोह यानि ठिकानेदारों में घमंड चलता है।

घमंड एक समस्या है और विवेक ही उसका समाधान है। विवेक के अभाव में रिद्धी का गर्व चलता है। विवेक की उपस्थिति में गर्व नहीं रहता है। उन्होंने मुहावरा कहकर कहा कि धन, यौवन और ठाकरी यह तीनों ही गर्व के कारण है।

इसमें अविवेक जुड़ जाए तो संसार में अनेकों अनर्थ होते हैं। अकेला धन, यौवन और ठाकरी कुछ नहीं कर सकता है। अगर इन चारों का मिलान हो जाए तो अनर्थों की खान खुल जाती है। इसलिए महापुरुष कहते हैं कि हमेशा विवेक को जाग्रत रखो। इसके जाग्रत होने पर अविवेक का कारण नहीं बनते।

संसारी जीव को बहुत बड़ा घमंड होता है। जो फुल हो तो सकता है मगर फैल और फल नहीं सकता है। इस संदर्भ में आचार्य श्री ने इंद्रभूति गौतम और भगवान महावीर का प्रसंग सुनाकर श्रावक-श्राविकाओं को सहज व सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया।

इंद्रभूति गौतम, जबकि भगवान महावीर से बड़े थे, लेकिन उन्होंने भगवान महावीर के चरणों में विवेक के जागने पर घमंड का त्याग कर समर्पण कर दिया। इससे वे बाद में वैराग्य को प्राप्त हुए।

वर्तमान में संतों के पास भी चार प्रकार का गर्व है-पहला परियार्य का, इसमें वे सोचते हैं कि मेरी दीक्षा को १० या ५० साल पूरे हो गए हैं। दूसरा संघ परिवार का, इसमें वे सोचते हैं कि मेरे हजारों में शिष्य-शिष्याएं, श्रावक-श्राविकाएं और साधु-संत हैं। तीसरा प्रभाव का, मेरा प्रभाव बहुत ज्यादा है, मेरे कहने पर करोड़ों का चंदा इक_ा हो जाएगा तथा चौथा पद का, मैं आचार्य हूं, मेरे पास सम्पूर्ण सत्ता है। मेरे कहने पर सब चलेंगे।

जहां साधु-संतों को तपा-तपा कर पद हासिल होता है, वहीं राजनीति के क्षेत्र में सता-सता कर सत्ता प्राप्त की जाती है।

किसी भी तरह का घमंड ना करें
आचार्य श्री ने कहा कि रिद्धी गर्व हमें गर्त में ले जाएगा। इसलिए सांसारिक जीव को इसे त्यागने का प्रयास लगातार करते रहना चाहिए। यह काम विवेक ही करेगा यानि त्यागने योग्य को त्यागने की प्रेरणा विवेक ही देता है।

अगर विवेक आ जाए तो यह नहीं होता है। धन का घमंड सांसारिक व्यक्ति में ज्यादा होता है। इस संदर्भ को लेकर उन्होंने भजन ये दुनिया मुसाफिर खाना…जो दुनिया के मालिक बन थे…उनके मरघट में आसन बिछे थे…सुनाकर प्रवचन मंडपम् को भक्तिमय बना दिया। उन्होंने समझाया कि यह दुनिया मुसाफिर खाना है, उसे फिर दो- चार दिन बाद अपने घर जाना ही पड़ेगा।

इसलिए अभी से चिंतन कर लो कि क्या लेकर आप आए हो और क्या लेकर जाओगे? किसी भी तरह का घमंड मत रखो। अगर रखते हो तो वक्त के साथ चाटा भी लगता है। तब ही पता चलता है कि इसका कितना बड़ा हश्र हुआ है। घर वाले भी घमंडी को पसंद नहीं करते हैं। जीवन में विनम्रता रखो, यह स्थाई व संस्कारवान है।

आचार्य श्री के प्रवचन से पहले संत श्री विनोद मुनि म.सा. ने भगवान महावीर द्वारा दिए गए उपदेश और जैन दर्शन के विभिन्न आयामों की विवेचना की। आचार्य श्री के प्रवचन के बाद विदूषी महासती श्री नेहा श्री म.सा. ने प्रवचन से संबंधित सवालों के जवाब पूछे, जिसे श्रावक और श्राविकाओं ने जवाब दिए।


तपस्या एवं प्रत्याख्यान
प्रत्याख्यानों की श्रृंखला में अन्य बियासन, एकासना, आयम्बिल, नीवीं, उपवास, बेले, तेलें, आदि प्रत्याख्यानों के साथ नन्ही बालिका तन्वी ढाबरिया सुपुत्री हनुवंत, नीतू ढाबरिया के 9 वां और यश का 5 वां उपवास गतिमान है।

एकासना, आयम्बिल, उपवास और तेले की लड़ी भी निरंतर जारी है। श्रावक श्राविकाओं सहित चारित्र आत्माओं की अन्य गुप्त तपस्याएं भी जारी है। धर्मसभा के अंत में संघ के महामंत्री नवीन लोढ़ा ने जानकारी दी कि पर्युषण पर्व 20 अगस्त बुधवार से नवरंगी के जप व तप शुरू होंगे।

तीन दिवसीय सामूहिक तेले भी 20 अगस्त से शुरू होंगे। शेयर प्रतियोगिता 7 सितंबर को होगी। उन्होंने सभी बाहर से आए हुए तथा सभा में उपस्थित श्रावक श्राविकाओं का आभार प्रकट किया।

धर्मसभा में देश-भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का क्रम लगातार बना हुआ है।जो महापर्व पर्यूषण की आठ दिनों तक साधना – आराधना करेंगे।पर्यूषण महापर्व पर सुबह 8:30 बजे से प्रवचन प्रारंभ होगा जो 11 बजे तक चलेगा।

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