सूरत गुजरात (अमर छत्तीसगढ)19 अगस्त। तीर्थंकर भगवान की वाणी सुन जो उसके रहस्य समझ लेता है वह जीवन में कहीं भी नहीं अटक सकता है। जिनवाणी श्रवण कर हम मोक्ष भी प्राप्त कर सकते है। शब्दों से नहीं भावों से वंदन करने से भी सौभाग्य का उपार्जन होता है। शुद्ध भावों से वंदन करने से अहंकार समाप्त होकर विनय गुण की प्राप्ति होती है। पापों की आलोचना करने से भी भाव शुद्धि होती है।

ये विचार श्रमण संघीय आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनिजी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी एवं राजस्थान प्रवर्तिनी साध्वी शिरोमणी परम पूज्या सद्गुरूवर्या श्री यशकंवरजी म.सा.,आध्यात्म साधिका समतामूर्ति परम पूज्या सद्गुरूवर्या श्री सिद्धकंवरजी म.सा. की सुशिष्या संयम साधिका श्री संयम प्रभाजी म.सा. ने मंगलवार को श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गोड़ादरा के तत्वावधान में महावीर भवन में आयोजित चातुर्मास ‘‘शुद्धता से सिद्धालय की ओर’ के तहत प्रवचन में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि पूज्य गुरूणी मैया श्री सिद्धकंवरजी म.सा. प्रतिदिन 24 तीर्थंकर भगवान को 108 बार वंदन भाव भक्ति सहित करते थे। उन्होंने बताया कि पर्युषण महापर्व की आठ दिवसीय आराधना 20 अगस्त बुधवार से शुरू होगी।

इस दौरान जप, तप व स्वाध्याय के साथ धार्मिक भावना से ओतपा्रेत कई कार्यक्रम होंगे। पर्युषण में अधिकाधिक तप त्याग, जाप, संवर,पौषध करने की भावना रखनी है। प्रतिदिन धर्म आराधना के साथ दया व्रत, एकासन, आयम्बिल, अठरंगी तप आदि करना है।
उन्होंने भजन ‘‘जीवन को शुद्ध बना लेना’’ की प्रस्तुति भी दी। धर्मसभा में मधुर व्याख्यानी श्री शशिप्रभाजी म.सा. ने कहा कि जिनवाणी श्रवण करने से भव-भव के कर्म क्षय होते है। मिथ्यात्व हटा आत्मा के स्वरूप को पहचानना है।

पर्व पर्युषण में जिनवाणी का बीज रोपण करने के लिए आत्मा की सफाई करनी होगी। संसार क्रोध,मान,माया, लोभ जैसे कषायों से भरा है आत्मा के गुणों को कोई छू भी नहीं सकता है। मानव भव मिलना दुर्लभ है इसलिए इसे धर्म करके सार्थक करे ओर मुक्ति के मार्ग पर आगे बढ़े।
चातुर्मास में स्वाध्यायशीला साध्वी श्री किरणप्रभाजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हो रहा है। महासाध्वी मण्डल के सानिध्य में गुरू वेणी अंबेश दरबार में जिनवाणी के साथ निरन्तर तप त्याग व धर्म ध्यान की गंगा प्रवाहित हो रही है।
सुश्रावक सुरेशकुमार चौधरी उपवास के सिद्धी तप की आराधना कर रहे है। एकासन, आयम्बिल व उपवास की लड़ी निरन्तर चल रही है। एकासन सिद्धि तप अनुष्ठान कर रहे तपस्वियों के 18वें दिन की आराधना रही। साध्वी मण्डल ने सभी तपस्वियों के प्रति मंगलभावना व्यक्त करते हुए मंगलपाठ सुनाया।

श्रीसंघ द्वारा जयकारों के साथ तपस्वियों की अनुमोदना की गई। भीलवाड़ा, मसूदा, नीमच, पाली, जयपुर, मेड़ता सिटी आदि स्थानों से पधारे अतिथियों का स्वागत बहुमान गोड़ादरा श्रीसंघ द्वारा किया गया। प्रश्नोत्तरी, लक्की ड्रॉ एवं प्रभावना के लाभार्थी चंदनमलजी कमलेशकुमारजी कोठारी परिवार (सहाड़ा वाले) रहा। संचालन श्रीसंघ के उपाध्यक्ष गौतमचंद संचेती ने किया।
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श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ,गोड़ादरा,लिम्बायत,सूरत
प्रस्तुतिः अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन,भीलवाड़ा

