पूना महाराष्ट्र (अमर छत्तीसगढ) ,19 अगस्त। मरूधरा मणि महासाध्वी जैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या सरलमना जिनशासन प्रभाविका वात्सल्यमूर्ति इन्दुप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ कात्रज दत्त नगर आनंद दरबार श्रीसंघ के तत्वावधान में आगम पर्व-2025 के तहत पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व की आठ दिवसीय आराधना बुधवार 20 अगस्त से शुरू होगी।
इसके तहत प्रतिदिन धर्म आराधना से ओतप्रोत कार्यक्रम होंगें। पर्युषण में सभी को अधिकाधिक तप,त्याग,जाप व स्वाध्याय करने की भावना रखनी है।
पर्युषण में प्रतिदिन सुबह 8.30 बजे से अंतगड़ सूत्र का वांचन, सुबह 9.30 बजे से प्रवचन एवं दोपहर 2 से 3 बजे तक कल्पसूत्र का वांचन होंगा। प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से विभिन्न प्रतियोगिताएं होगी।

सूर्यास्त से प्रतिक्रमण होगा। प्रतिदिन तप त्याग के साथ अलग-अलग विषय पर प्रवचन होंगे। इसके तहत 20 अगस्त को जैनों की पहचान, 21 अगस्त को सफल जीवन के सूत्र, 22 अगस्त को व्यस्त जीवन में धर्म कैसे करे, 23 अगस्त को खुशहाल परिवार जीवन का आधार, 24 अगस्त को आधुनिक नहीं आध्यात्मिक बने, 25 अगस्त को नशा नाश का कारण,अहंकार जीवन का नाश, 26 अगस्त को वाणी को मधुर कैसे बनाएं विषय पर प्रवचन होंगे। संवत्सरी पर 27 सितम्बर को मैत्री दिवस क्षमा पर्व विषय पर प्रवचन होंगे।
तप त्याग के तहत पर्युषण के पहले दिन उपवास, दूसरे दिन बियासना,तीसरे दिन आयंबिल, चौथे दिन एकासना,पांचवे दिन दया दिवस, छठे दिन निवी दिवस,सातवें दिन बियासना व आठवे दिन पौषध दिवस मनाया जाएगा।

इसी तरह प्रतिदिन प्रतियोगिता के तहत 20 अगस्त को आनुपूर्वी, 21 को 14 स्वप्न दमशेराज प्रतियोगिता, 22 को तीर्थ कर के नाम खोजो, 23 को तिखुत्तो हौजी प्रतियोगिता, 24 को जैन हौजी प्रतियोगिता, 25 को जैन लुडो प्रतियोगिता, 26 अगस्त को दिमागी एक्शन प्रतियोगिता होगी।
प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम,़िद्वतीय व तृतीय को पुरस्कृत किया जाएगा। पर्युषण महापर्व के समापन पर सामूहिक पारणे 28 अगस्त को होंगे। पर्युषण में प्रतिदिन एक सिल्वर कॉइन एवं पांच लक्की ड्रॉ निकाले जाएंगे।
पर्युषण पर्व के दौरान 51 सामायिक या एकासन की अठाई करने वाले को सिल्वर कूपन व 81 सामायिक या आयम्बिल की अठाई करने वाले को डायमंड कूपन दिए जाएंगे। इसी तरह 108 सामायिक या उपवास की अठाई करने वाले को डायमंड कूपन ओर प्रतिदिन एक ही आसन पर आठ सामायिक पौषध सहित अठाई करने वाले को प्लेटिनम कूपन दिया जाएगा।
पयुर्षण पर्व प्रारंभ होने से पूर्व मंगलवार को महासाध्वी इन्दुप्रभाजी म.सा. के सानिध्य में प्रवचन में तत्वचिन्तिका आगम रसिका डॉ. समीक्षाप्रभाजी म.सा. ने कहा कि हम जैनियों के सबसे बड़े पर्व पर्वाधिराज पर्युषण की आठ दिवसीय आराधना में सभी को अधिकाधिक तप त्याग व धर्म साधना कर अपने जीवन को पावन व निर्मल बनाना है।
आप सभी को आज धारणा करके कल से तपस्या से जुड़ना है। दया,उपवास,तेला,अठाई की लड़िया लगानी है। पर्युषण पर्व को धर्म का मेला बनाते हुए हर घर तप त्याग का माहौल बनाना है।
उन्होंने सुखविपाक सूत्र के तीसरे अध्याय का वाचन करते हुए कहा जीवन को सार्थक बनाना है तो अपनी भावना हमेशा निर्मल व पावन रखनी चाहिए ओर दूसरों के प्रति हितकारी भाव रखने चाहिए। हमेशा दूसरों का भला करने का सोच होना चाहिए। दूसरों के प्रति बुरे विचार रखकर हम स्वयं का नुकसान करते है ओर कर्मबंध करते है।
उन्होंने श्रावक के 12 व्रत में से छठे व्रत उपभोग परिभोग परिमाण व्रत के बारे में समझाते हुए हमारे उपभोग व परिभोग की सीमा तय होनी चाहिए। हम जब तक सांसारिक सुख साधना के उपभोग में लिप्त रहेंगे जीवन का लक्ष्य प्रापत नहीं कर पाएंगे।
धर्मसभा में सेवाभावी दीप्तिप्रभाजी म.सा. ने भजन की प्रस्तुति दी। धर्मसभा में रोचक व्याख्यानी दर्शनप्रभाजी म.सा.एवं विद्याभिलाषी हिरलप्रभाजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।
धर्मसभा में अतिथियों का स्वागत आनंद दरबार श्रीसंघ द्वारा किया गया। धर्मसभा का संचालन श्रीसंघ के सौरभ धोका ने किया। धर्मसभा में पूना व आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रावक-श्राविका मौजूद थे।
चातुर्मास सम्पर्क सूत्रः
श्री बाळासाहब धोका
संघपति, आनंद दरबार मो.9822039728
प्रस्तुतिः अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन,भीलवाड़ा

