बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 21 अगस्त। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व बिलासपुर में टिकरापारा, वैशाली नगर, तारबहार चोपड़ा भवन में प्रतिदिन प्रवचन, भक्ति, पूजा, आरती हो रही है। जिसमें समाज के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ ले रहे हैं ।

चोपड़ा भवन- श्वेतांबर समाज में पूजा एवं भक्ति
पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन सुबह तारबहार में स्थित चोपड़ा भवन में पूजन वेशभूषा धारण कर विधि विधान से पूजा अर्चना की गई । समाज के श्रावक श्राविकाओ द्वारा पक्षाल पूजा, प्रार्थना, जाप, इकतीसा का पाठ की गई। कल्प सूत्र का वाचन समाज की श्रीमती शोभा मेहता, श्रीमती ज्योति चोपड़ा द्वारा प्रतिदिन किया जा रहा। रात्रि में धार्मिक संगीत संध्या संपन्न हुवे ।

पर्युषण पर्व पर बोली का लाभ मिला…..
सुबह का शांतिकलश एवं आरती लाभार्थी हीरचंद चोपड़ा परिवार, पांच ज्ञान की बोली लाभार्थी सुभाष चंद्र श्रीश्रीमाल परिवार, पोथीजी को बैहराने की बोली लाभार्थी श्रीमती कचरी देवी गोलछा परिवार, शाम की
मूल नायक भगवानजी की आरती लाभार्थी सुभाष चंद श्रीश्रीमाल परिवार, मूलनायक भगवान जी का मंगल दीपक लाभार्थी अमरेश जैन परिवार, दादा गुरुदेव की आरती एवं मंगल दीपक लाभार्थी इंदर चंदजी बैद परिवार रहा ।
गुजराती जैन समाज टिकरापारा
श्री दशा श्रीमाली स्थानकवासी जैन संघ टिकरापारा में पर्युषण महापर्व का आज दूसरे दिन जैन धर्म का ग्रंथ आगम के विषय में रहा ।

आगम दर्शन कार्यक्रम में जैन समाज के सभी सदस्य आगम ग्रंथ का दर्शन किए एवं पूजन किया गया।

आगम दर्शन पहले समाज के सभी पुरुषों फिर समाज की महिलाओं द्वारा आगम ग्रंथ कि प्रदक्षिणा की एवं पूजन किया गया। आगम ग्रंथ में पहला पाठ नमस्कार महामंत्र का है ।

जिसका शुभ पठन करने से जीवन में सब मंगलमय होता है और पूरे दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रहता है । इसके बाद सभी ने सामूहिक वंदना की और अंत में मांगलिक किया गया।

आज के कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष भगवान दास भाई सुतारिया, दीपक गांधी, दीपक सुतारिया, गोपाल वेलाणी, मनीष शाह, राजू तेजाणी, हसमुख कोठारी, दिलीप तेजाणी, केतन सुतारिया, शरद दोषी, प्रवीण दामाणी, पारुल बेन सुतारिया, हेमा तेजाणी, अमित सुतारिया, नीता दामाणी, सुधा बेन गांधी, दीपिका बहन गांधी, मनीषा कपाड़िया, आरुषि सुतारिया, उर्मिला तेजाणी, समाज के सभी सदस्य उपस्थित थे।

वैशाली नगर- द्वितीय दिवस “स्वाध्याय दिवस”
पर्युषण का दूसरा दिन स्वाध्याय दिवस स्वयं की खोज के साथ स्वाध्याय का जन्म होता है । खुद के चरित्र निर्माण की दिशा में, कौन से उपाय काम में लेना चाहिए “मैं कौन हूँ ” यहीं विचार स्वाध्याय को उभारता है । मैं शुद्धात्मा हूँ इसका स्मरण कराये ये सही स्वाध्याय साधना है । स्वाध्याय लोक विजय के लिए ही होनी चाहिए । जो अध्ययन लोकोत्तर मार्ग को प्रकाशित करे वो सच्चा स्वाध्याय है ।

स्वाध्याय के तेज प्रकाश में भला बुरा अन्दर का कचरा सब दिख जाता है । 12 प्रकार के तप में एक तप है — स्वाध्याय, स्वाध्याय मुख्य 5 प्रकार के माने गए है वाचना- सत साहित्य का अनुशीलन करना । पृच्छना- ज्ञान वृद्धि के लिए जिज्ञासापूर्वक प्रश्नोत्तर करना । परिवर्तना- प्राप्त ज्ञान का बार-बार पुनरावर्तन करना, उसे दोहराना ।

अनुप्रेक्षा- तत्त्व का गहरा चिंतन, अनुचिंतन करना। धर्मकथा — धार्मिक विषयों पर चर्चा, उपदेश एवं प्रवचन करना । स्वाध्याय नियमित ब्रह्ममुहूर्त्त तथा शांत एकांत स्थान पर करें ।
स्वाध्याय दिवस के साथ आदिनाथ भगवान ऋषभ के जीवन चरित्र के बारे में जाना । उन्होंने किस रूप में अपना राज्य संचालन किया कैसे सभी को नव जीवन की जीवनशैली को आगे बढ़ाया जाए।

प्रवचन में सुरेन्द्र जैन मालू, चंद्र प्रकाश बोथरा, बिनोद लूनिया, प्रदीप दुग्गड़, हनुमान बोथरा, कन्हैया लाल बोथरा, भीखम दुग्गड़, मनोज धारीवाल, सुमित बोथरा, शीला छल्लानी , अंजू गोलछा, निकिता गोलछा, ललिका मालू, कुसुम लुनिआ, भावना बोथरा,सोनल नाहर, शांति दुग्गड़, कमला दुग्गड़,सोनिका नाहर, दीपक धारीवाल व समाज के अन्य सदस्य उपस्थित थे ।

