पुष्कर(अमर छत्तीसगढ) , 21 अगस्त ।
(प्रकाश जैन) श्री मरुधर केसरी रूप सुकन चातुर्मास समिति एवं श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में श्री मरुधर केसरी पारमार्थिक संस्थान में आयोजित पर्वाधिराज महापर्व पर्युषण के द्वितीय दिन में धर्म सभा में जैन श्रमण संघ के प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने कहा कि शब्द ऐसा बोलना चाहिए, जो स्वयं बोलने वाले को तो शान्ति प्रदान करे ही साथ ही सुनने वालों के हृदय में ठंडे जल के समान शान्ति और शीतलता का संचार कर दे। उनके मन में हर्ष और आनन्द की लहरें उठें। वचन विवेक के सम्बन्ध में दशवेकालिक सूत्र में बड़ी सुन्दर प्रेरणाएँ दी गई हैं।

वहां कहा गया है कि लोह निर्मित काँटों से तो मुहूर्त मात्र ही दुःख होता है और वे आसानी से निकाले जा सकते हैं; किन्तु वैर को बढ़ाने वाले और महा भय को उत्पन्न करने वाले कठोर वचनों का हृदय से निकलना बहुत ही कठिन है।
वचन के बाण तीर से भी गहरे घाव देते हैं – अमृत मुनि
श्रमण संघ के उपप्रवर्तक अमृत मुनि महाराज ने कहा कि वचन के बाण लोहे काँटों से भी अधिक तीक्ष्ण एवम दुःखदाई होते हैं।
हमारी जीभ दो काम करती है; एक तो रस लेती है यानी वस्तुओं का स्वाद चखती है, खट्टा-मीठा, चरपरा, कषा यला, कड़वा आदि रसों का स्वाद आप इस जिभ्या से ही ग्रहण करते हैं; और इसका तो दूसरा काम है बोलना, वह बहुत ही महत्वपूर्ण है, यह रस भी उगल सकती है और विष भी ।

यदि मीठे और साताकारी वचन बोले तो रस उगलती है और यदि कहीं कड़वे, दूसरों को बुरे लगने वाले, अहितकर वचन बोलने लगे तो विष ही उगलने लगती है। ऐसा व्यक्ति निरादर और तिरस्कारपूर्वक घर से निकाल दिया है।
वचन-विवेक का अभिप्राय यह भी है कि मनुष्य को समय को पहचान कर उसके अनुकूल ही बोलना चाहिए। शादी के समय मर्सिया बेमौके होता है । उसे उस समय कोई सुनना नहीं चाहता।
समय को जानने वाला पंडित होता है =महेश मुनि
मधुर गायक संत महेश मुनि महाराज ने बताया कि भगवान महावीर के अनुसार क्षण को पहचानने वाला, समय को जानने वाला पंडित होता है। इंसान को समय की महत्ता को स्वीकारते हुए समय को व्यर्थ नहीं खोना चाहिए।
सत्य ही भगवान है – अखिलेश मुनि
अखिलेश मुनि महाराज ने सत्य को भगवान तुल्य बताते हुए कहा कि जिसने जीवन में सत्य धर्म का स्थापन किया वह व्यक्ति भगवान तुल्य आदर्श को प्राप्त हो जाता है।
देवकी माता का वर्णन श्रवण कर भावविभोर हुए श्रद्धालु.
इस अवसर पर संत डॉ वरुण मुनि ने अंतगड़ सूत्र के माध्यम से अनिकसेन आदि 6 भ्राता एवं देवकी माता के एक समान 8 पुत्रों के जन्म की भविष्यवाणी का वर्णन किया तो वही दोपहर को कल्प सूत्र द्वारा त्रिशला माता के स्वप्नों का पाठन किया। धर्म सभा में प्रदेश के विभिन्न भागों से भारी तादाद में श्रद्धालु श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थे।

