राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 21अगस्त। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि हमारे जीवन में जो तकलीफ है, वह पूर्व जन्म में हमने धर्म नहीं किया, इसकी वजह से है। उन्होंने कहा कि तकलीफ आने पर नवकार मंत्र का जाप करो तो तकलीफ को आसानी से पार कर जाओगे।
जैन बगीचे के नए हाल में आज मनी वीरभद्र ने कल्पसूत्र का वाचन किया। उन्होंने कहा कि कल्पसूत्र मैं साधुओं के आचार के बारे में बताया गया है। इसमें बताया गया कि साधुओं को अल्प मूल्य का श्वेत वस्त्र धारण करना चाहिए।
जिस साधु को दृश्य कर( ध्यान में रखकर) भोजन बनाया गया है, उसे उसे साधु द्वारा ग्रहण नहीं करना चाहिए। बिना किसी ध्यान के सामान्य तरीके से कोई भोजन बना हो तो उसे ग्रहण करना चाहिए। जहां ठहरे हैं वहां की 12 तरह की चीजों का उपयोग नहीं करना चाहिए। जहां साधु ठहरा है वहां उसके द्वारा किए गए तब का छठवां हिस्सा उस व्यक्ति को भी मिलता है।
मुनि वीरभद्र (विराग)ज़ी ने आगे कहा कि कल्पसूत्र में वंदन, महाव्रत के बारे में भी बताया गया है। उन्होंने कहा कि प्रथम और अंतिम क्रम के साधुओं को पांच प्रतिक्रमण अवश्य करना चाहिए। बीच के साधुओं के लिए दो प्रतिक्रमण आवश्यक है।
प्रथम एवं अंतिम क्रम के साधु किसी गांव में 1 माह रुके और उन्हें यदि किसी कारणवश और रुकना हो तो वे स्थान बदल दे। बीच के साधु 1 वर्ष तक रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस जीवन में जड़ता आ गई है, इसे दूर करें।
मुनि श्री वीरभद्र (विराग) ज़ी ने कहा कि सुपात्र दान का ज्यादा लाभ संयुक्त परिवार को मिलता है। पर्यूषण पर्व सर्वोत्तम है। कल्पसूत्र जिसने सुना उसे इसका लाभ अवश्य मिलता है। कल्पसूत्र सुनने के बाद उसे आचरण में लाना चाहिए।
धर्म का प्रभाव जीवन में अनुकूलता लाता है। हर समय मीठे बोल बोलना चाहिए। कटु शब्द जीवन में कड़वाहट लाते हैं, इसलिए मधुर शब्दों का उपयोग कर आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ने का प्रयास करें। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी।

