रायपुर(अमर छत्तीसगढ) 23 अगस्त। आत्मोत्थान चातुर्मास 2025 के अंतर्गत शनिवार को पर्वाधिराज पर्युषण के चतुर्थ प्रभात पर दादाबाड़ी में आयोजित प्रवचन में परम पूज्य हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. ने कहा कि भोग की दुनिया चाहे कितनी भी विशाल क्यों न लगे, उसका स्वरूप धर्म की दुनिया से बिल्कुल भिन्न है।
भोग हमें क्षणिक सुख का आभास तो कराता है, लेकिन आत्मा के कल्याण का मार्ग केवल धर्म ही प्रशस्त करता है। इसलिए आवश्यक है कि हम जीवन को केवल भोग और बाहरी सुख-सुविधाओं में न गँवाएँ, बल्कि ऐसा प्रयास करें जिससे आत्मिक शांति और कल्याण प्राप्त हो सके।

आज के समय में अधिकांश लोग केवल व्यापार और धन कमाने के लिए की गई मेहनत को ही श्रम मानते हैं। वे दिन-रात कार्य तो करते हैं, परंतु अपने शरीर की देखभाल के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। परिणामस्वरूप जब बीमारियाँ या मोटापा घर कर लेता है, तब उन्हें जिम और व्यायाम की याद आती है। जबकि सच्चाई यह है कि नियमित श्रम से ही शरीर स्वस्थ और निरोगी बना रह सकता है।
यदि हम अपने जीवन में धर्म और श्रम का संतुलन बना लें, तो न केवल शरीर सशक्त होगा बल्कि आत्मा भी प्रसन्न और शांत रहेगी। उदाहरणस्वरूप, सुबह उठकर श्रद्धा से प्रतिक्रमण करना एक ऐसा श्रेष्ठ अभ्यास है, जो न केवल मानसिक शुद्धि प्रदान करता है, बल्कि शरीर को दिनभर के लिए पूर्ण व्यायाम भी दे देता है। यही जीवन का सच्चा कल्याण है।

श्री ऋषभदेव जैन मंदिर ट्रस्ट और आत्मोत्थान वर्षावास समिति 2025 के तत्वावधान में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का शुभारंभ भक्ति और श्रद्धा के साथ हो चुका है। परम पूज्य साध्वी भगवंत श्री हंसकीर्ति श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा की पावन निश्रा में शुरू हुए इस महापर्व में सुबह प्रतिक्रमण, प्रवचन और कल्पसूत्र वाचन के साथ वातावरण धर्ममय बनता जा रहा है।
श्रद्धालु बड़ी संख्या में आराधना भवन, दादाबाड़ी और जिनालयों में एकत्र होकर आत्मकल्याण की भावना से सहभागी बन रहे हैं।
साथ ही प्रतिदिन रात्रि भक्ति के दौरान संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 22 अगस्त को गायक नरेन्द्र बागमार ने अपनी प्रस्तुति दी, जिनके लाभार्थी श्रीमती रंजनादेवी, संतोष कुमार, सचिनजी दुग्गड़ परिवार रहे।
सुबह 5:30 बजे राई प्रतिक्रमण और शाम 6:30 बजे दिवसीय प्रतिक्रमण के साथ दिन की शुरुआत और समापन का क्रम जारी रहेगा। श्रावकों का प्रतिक्रमण आराधना भवन, सदर बाजार में तथा श्राविकाओं का दादाबाड़ी, एम. जी. रोड पर हो रहा है। प्रतिदिन सुबह 8:45 बजे श्री जिनकुशल सूरी दादाबाड़ी में प्रवचन जारी है।
महापर्व के दौरान मोक्ष तप और नवकार तप की शुरुआत भी हो चुकी है। सात एकासना और एक उपवास की साधना के साथ अक्षयनिधि एवं समावशरण और विजयकषाय तप भी निरंतर चल रहा है। साधना और तपस्या से परिपूर्ण यह आयोजन श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि और संयम की ओर अग्रसर कर रहा है।
भगवान महावीर का जन्मवांचन आज
श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट रायपुर एवं आत्मोत्थान समिति के तत्वावधान में आगामी रविवार 24 अगस्त को भगवान महावीर स्वामी का जन्मवांचन बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन प्रातः 9 बजे से आरंभ होगा।
पावन निश्रा का लाभ परम पूज्य साध्वी हंसकीर्ति श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा की गरिमामयी उपस्थिति में प्राप्त होगा। इस अवसर पर माता त्रिशला के 14 स्वप्नों का वांचन एवं प्रभु वीर की पालना जी का चढ़ावा विशेष आकर्षण रहेगा।
कार्यक्रम के पश्चात साधर्मिक वात्सल्य का आयोजन भी रखा गया है, जिसमें समाजजन एक साथ धर्मलाभ एवं सामूहिक सौहार्द का अनुभव करेंगे।
समिति ने सभी श्रावक-श्राविकाओं से आग्रह किया है कि वे समय और स्थान का ध्यान रखते हुए प्रतिदिन के कार्यक्रमों में सपरिवार शामिल होकर इस पावन महापर्व का अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करें।
ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली तथा आत्मोत्थान चातुर्मास समिति 2025 के अध्यक्ष अमित मुणोत ने जानकारी दी कि दादाबाड़ी में प्रतिदिन सुबह 8:45 से 9:45 बजे तक साध्वीजी के प्रवचन का आयोजन भी हो रहा है। समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर जिनवाणी का लाभ लें।

