ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 23 अगस्त
(प्रकाश जैन,वरिष्ठ पत्रकार)
महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की परम विदुषी साध्वी श्री कीर्तिलता जी के पावन सान्निध्य में पर्युषण पर्व अध्यातम सप्ताह का चौथा दिवस वाणी संयम दिवस के रूप में मनाया गया। इस दिवस पर श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं ने अपने तप त्याग एवम धर्म ध्यान से अपने जीवन को कुंदन बनाने में पूरे समर्पण भावों से जुटे हुए है।

वाणी संयम यानी बोलने का संयम
आज के आयोजन के संयम दिवस का भव्य आगाज महिला मंडल के मंगलगीत की स्वर लहरियों से हुआ।महिला मंडल की प्रस्तुति ने समूचे क्षेत्र को अध्यात्म एवम धर्ममय बना दिया।। महासाध्वी श्री कीर्तिलताजी ने अपने ओजस्वी प्रवचन में कहा- माया दुखों की जननी है।

दुर्भाग्य व दुर्गति को बढ़ाने वाली है। कहते हैं कि किसी को यदि नाग काट ले तो आदमी बच सकता है। लेकिन नागिन किसी को काट ले तो उसका कोई भी उपचार नहीं होता । ऐसी ही है माया । आपने आगे कहा- मायावी व्यक्ति घर में कुटुम्ब जनों को छलती है। दुकान में ग्राहकों को छलती है। स्कूल में अध्यापकों को और उपाश्रय में धर्म गुरुओं को छलती है।

आपने तिर्यङ्च गति में जाने के चार कारणों में एक कारण माया को बताते हुए कहा कि माया जन्म जन्मान्तरों को बिगाड़ती है अतः जरूरी है सरल बनना । पर्युषण महापर्व हमें सरल बनने की प्रेरणा दे रहा है।

साध्वी पूनय प्रभाजी ने तीन कोटि के व्यक्तियों की चचर्चा करते हुए कहा जो बोलने से पहले सोचता है वह उच्च कोटि का होता है। बोलने के बाद सोचने वाळा मध्यम कोटि वाळा तथा जो न बोलने से पहले सोचता है और न बाद में सोचता है वह अधम कोटि बाळा होता है।

प्रश्न मंच में झलका अपार उत्साह
संघ अध्यक्ष समाज सेवी श्री धनराज रांका एवम महामंत्री युवा चेता श्री रमेश श्री एलश्रीमाल ने रात्रीकालीन कार्यक्रम में “प्रश्न हमारे उत्तर आपके” कार्यक्रम में परम गुरु श्रावक श्राविकाओं का उत्साह देखते ही बनता है।सबने अत्यन्त उत्साह के साथ भाग लिया।

इस आयोजन में सभी वर्गों का जबरदस्त उत्साह झलका। युवा समाज सेवी श्री मनीष रांका ने बताया की साध्वी मंडल के चातुर्मास से युवाओं का धर्म के प्रति गहरा रूझान बढ़ा है।


