रायपुर(अमर छत्तीसगढ) 24 अगस्त। पर्युषण पर्व के पावन अवसर पर रविवार को दादाबाड़ी में तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का भव्य जन्म वाचन आयोजित हुआ। प्रभु के जन्म वाचन का श्रवण कर श्रावक-श्राविकाओं ने पुण्य अर्जित किया और उत्साहपूर्वक इस अवसर का लाभ लिया।
परम पूज्य साध्वी हंसकीर्ति श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ यह आयोजन शहर भर के श्रावक-श्राविकाओं के लिए आध्यात्मिक आलोक लेकर आया।
माता त्रिशला के 14 स्वप्नों का वाचन तथा प्रभु वीर की पालना जी का चढ़ावा कार्यक्रम के विशेष आकर्षण रहे। जन्मोत्सव के दौरान पूरा परिसर भक्ति और उल्लास से गूंज उठा।

पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन भगवान महावीर का जन्म वाचन महोत्सव मनाया। दोपहर में कल्पसूत्र का वाचन प्रारंभ हुआ। इसके बाद भगवान महावीर की माता त्रिशला के चौदह स्वप्नों की बोली लगाई गई।
लाभार्थी परिवारों ने सभी स्वप्नों को उतारा। श्रद्धालुओं ने अक्षत उछाले और श्रीफल वधेर कर जन्म कल्याण के गीत गाए। महिलाओं ने भगवान महावीर का स्मरण करते हुए मंगल गीत गाया।
शाम को प्रतिक्रमण और भक्ति के कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिर में प्रभु का विशेष श्रृंगार किया गया।
श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट रायपुर एवं आत्मोत्थान समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सह परिवार समाजजन उपस्थित हुए। जन्मोत्सव के पश्चात साधर्मिक वात्सल्य का आयोजन भी संपन्न हुआ, जिसमें समाजबंधुओं ने एक साथ धर्मलाभ के साथ सामूहिक सौहार्द का अनुभव किया।
आत्मोत्थान चातुर्मास 2025 के अंतर्गत रविवार को पर्वाधिराज पर्युषण के पंचम प्रभात पर दादाबाड़ी में आयोजित प्रवचन में परम पूज्य हंसकीर्ति श्रीजी म.सा. ने कहा कि चातुर्मास का यह पावन काल केवल जप, तप और साधना के लिए ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि के लिए भी होता है।
इन चार महीनों में श्रावक-श्राविकाएं विविध प्रकार के तप करके भोजन का त्याग करते हैं, परंतु साथ ही साथ उन्हें यह भी संकल्प लेना चाहिए कि वे अपने भीतर छिपे दोषों को त्यागने का व्रत करें।
चातुर्मास की साधना तभी सार्थक होगी जब हम केवल आहार नहीं, बल्कि क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह जैसे आंतरिक विकारों का भी परित्याग करें। यही सच्चे अर्थों में तप और आत्मकल्याण का मार्ग है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली तथा आत्मोत्थान चातुर्मास समिति 2025 के अध्यक्ष अमित मुणोत ने जानकारी दी कि दादाबाड़ी में प्रतिदिन सुबह 8:45 से 9:45 बजे तक साध्वीजी के प्रवचन का आयोजन भी हो रहा है। समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर जिनवाणी का लाभ लें।

