बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ) 24 अगस्त। श्री जैन श्वेतांबर समाज के द्वारा परम पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व 2025 का रविवार को बड़ी संख्या में समाज के लोग दोपहर भगवान महावीर जन्म वाचन को बड़े ही धूमधाम से मनाया। विशेष शांति कलश की पूजा, सामायिक, कल्प सूत्र, भक्ति हुए । शाम को प्रतिक्रमण एवं रात्रि में 108 दिए से महाआरती एवं भक्ति की गई ।

पर्युषण महापर्व के रविवार को चोपड़ा भवन में भगवान महावीर का जन्म वाचन दिवस मनाया गया । सुबह एवं रात्रि में विशेष पूजा हुई। उसके पश्चात 14 स्वप्नों की बोली लगाई गई । पूजन वेशभूषा धारण कर स्तवन कुलनायक पूजा, शांति कलश पूजा, मंगल दीपक सहित कई धार्मिक आयोजन संपन्न हुए ।
समाज की श्रीमति ज्योति चोपड़ा, श्रीमती शोभा मेहता द्वारा कल्प सूत्र का वाचन किया गया । उसके पश्चात रात्रि में जैन समाज के श्रावक एवं श्राविकाओं ने एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत कर पूरे माहौल को भक्ति मय बना दिया ।

महावीर जन्म वाचन महोत्सव मे लगी 14 स्वप्नों की बोली
पर्युषण महापर्व के पांचवे दिन चोपड़ा भवन तारबाहर में भगवान महावीर स्वामी के जन्म वाचन दिवस उत्सव मनाया गया। 14 स्वप्नों की बोली लगाई गई ।

जिसमें श्वेत हस्ती की बोली डॉ उषा शेंडे, श्री वृषभ की बोली सुभाष अनुराग श्रीश्रीमाल, श्री केसरी सिंह की बोली विमल वैभव विवेक चोपड़ा, श्री लक्ष्मी जी की बोली डॉ उषा शेंडे, श्री पुष्पमाला नितिन संघवी, श्री चंद्र मंडल बोली हीर चंद संजय संजीव चोपड़ा, श्री सूर्यमंडल रवीन्द्र जंदानी, श्री महाध्वजा हीरचंद संजय चोपड़ा, श्री स्वर्ण कलश कचरीबाई प्रवीण रूपेश गोलछा, श्री पदम सरोवर दिनेश मुनोत, प्रवीण कोचर, श्री क्षीरसागर इंदर चंद शितेश बैद, श्री देव विमान डॉ उषा शेंडे, श्री रत्नों की राशि नरेंद्र तुषार अमित मेहता ने बोली लगाई, निरधून अग्नि संजय कोठारी।
14 स्वप्नों के अलावा भगवान को पालने में बिठाने की बोली, डंका बजाने की बोली एवं अन्य बोली लेने वालों में जैनेंद्र डाकलिया, अंकित गिड़िया, अमरेश जैन है । कार्यक्रम का संचालन सुभाष श्रीश्रीमाल एवं सहयोग अमित गोलछा, अमित मेहता ने किया।

इस अवसर पर नरेंद्र मेहता, सुभाष श्रीश्रीमाल, इन्दर चंद बैद, संजय चोपड़ा, राजेश परसवानी, किरण चोपड़ा, मीनू मेहता, संजय छाजेड़, अमित तुषार मेहता, पुष्पा श्रीश्रीमाल, रूपेश गोलछा, अभिनव जैन, संजय जैन, अजय जैन, अपेक्षा चोपड़ा, राशि, पंखुड़ी, प्रखर सहित समाज के लोग उपस्थित थे।
तपस्या अठाई…
अतुल्या कोचर पिता प्रवीण कोचर का आज पांच की तपस्या चल रही, वह अठाई की ओर अग्रसर है ।

गुजराती जैन समाज टिकरापारा..
परम पूज्य भगवान श्री महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक दिवस को समाज के सभी लोगों ने उत्साह और उमंग के साथ मनाया । बच्चों ने भगवान के जन्म के समय को नाट्य द्वारा प्रस्तुत किया।

भगवान महावीर के माता त्रिशला जी के रूप में और भगवान का जन्म होने से पहले माता को 14 स्वप्न आए थे, उसका रूपांतरण एवं क्रियान्वयन समाज के महिला मंडल द्वारा किया गया। जिसमें समाज के बच्चों ने बढ़चढ कर हिस्सा लिया ।

आज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी राजकोट के पूर्व कुलपति प्रो नीलांबरी दवे उपस्थित हुए ।
उन्होंने भी समस्त कार्यक्रम का आनंद लिया और भगवान महावीर का आशीर्वाद प्राप्त किया। गुजराती जैन समाज उनके समाज में आने पर आभार व्यक्त किया गया एवं शॉल श्रीफल और प्रतीक चिन्ह देकर उनका सम्मान किया गया ।

भारतीय जैन संघठना और गुरु घसीदास यूनिवर्सिटी द्वारा वस्त्र संग्रह नाम से एक मिनी मॉल के रूप में यूनिवर्सिटी के अंदर शोरूम खोला गया है। जिसमें निर्धन, गरीब परिवार आकर अपने मनपसंद कपड़े ले जा सकते है ।

इसके लिए मैडम ने खूब-खूब धन्यवाद दिया। समाज के समस्त कार्यक्रम में समाज के गणमान्य सदस्यों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया एवं भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक मनाया।

तेरापंथ समाज वैशाली नगर…
पर्युषण पर्व का पांचवां दिन “व्रत चेतना दिवस”अणुव्रत चरित्र-निर्माण का आंदोलन है । कथनी-करनी की समानता तथा ज्ञान और आचरण की दुरी कम करने का नाम है। जीवन-विकास का प्रारम्भ है, शक्ति को जगाने का दिव्य मंत्र है। की आधारशिला संयम है । आचरण की शुद्धि का उपक्रम है इसलिए मानव धर्म है ।आवश्यकताओं का अल्पीकरण है ।
ऊंचाई की ओर बढ़ने का सरलतम मार्ग है । अहिंसा, शांति, पवित्रता और चरित्र का उदगम स्थल है । नाश के मार्ग से बचाकर व्यक्ति को सन्मार्ग पर स्थापित करता है । पतन के गड्ढ़े में गिरते मानव को ऊपर उठने का सशक्त माध्यम है । व्यसन मुक्त जीवन अणुव्रत का आदर्श है । व्रत का अणु भी व्यक्ति को अनेकविध बुराइयों से उबार लेता है ।

अणुव्रत के तीन कार्य है व्यक्ति का चरित्रवान बनाना, व्यवहार की शुद्धि करना, धर्म समन्वय करना । व्रत चेतना के साथ भगवान महावीर की जीवन यात्रा में उनके भव परम्परा में विश्वभूति व वासुदेव त्रिपृष्ट के जीवन के बारे में जाना कर्मों की कितनी विचित्रता हैं कैसे कर्म व कैसे बंधे जाते हैं।


