शिक्षा दीक्षा से गुरु चरणों में दिव्य साधना कर पन्ना गुरु दीप्तिमान रत्न बने – मुनि अमृत

शिक्षा दीक्षा से गुरु चरणों में दिव्य साधना कर पन्ना गुरु दीप्तिमान रत्न बने – मुनि अमृत

पुष्कर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 26 अगस्त।
(प्रकाश जैन वरिष्ठ पत्रकार)

श्री मरुधर केसरी रूप सुकन चातुर्मास समिति एवं श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में श्री मरुधर केसरी पारमार्थिक संस्थान के प्रांगण में आयोजित महापर्व पर्युषण के सातवें दिन जैन श्रमण संघ के प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने प्रवर्तक श्री पन्नालालजी महाराज के जन्म जयंती पर गुण गाथा गाते हुए कहा कि महामहिम प्रवर्तक श्री पन्नालालजी म.सा. ने भी सामाजिक अन्तर्विरोधों, अंधविश्वासों व रूढ़ियों का उन्मूलन कर स्वस्थ विचार-धारा व क्रान्तिकारी चिन्तन-पद्धति को जन्म दिया है।


जैन धर्म की इस दिव्य विभूति ने सम्पूर्ण समाज को सर्वप्रथम, स्वाध्याय के माध्यम से आत्म-साधना के मार्ग पर प्रतिष्ठितकर उसकी जीवन शैली को आदर्श रूप प्रदान किया, वहीं जैन-संस्कृति के रक्षण एवं संवर्द्धन का भी स्तुत्य प्रयास किया। कोई भी श्रमण समाज की अवरुद्ध गतिशीलता से आँखें मूंदकर स्वयं की साधना में तल्लीन नहीं बन सकता ।

अपनी पारम्परिक आचार-मर्यादा से परिवेष्टित रहकर उन्होंने रूढ़ियों, अंध-परम्पराओं व थोथी-मान्यताओं के विरुद्ध जन-विश्वास जागृत किया एवं प्रभु महावीर के शासन को आगे बढ़ाया ।

कितलसर का पन्ना जो बन गया जैन धर्म का प्राज्ञ मुनि- अमृत मुनि
उपप्रवर्तक अमृत मुनि महाराज ने कहा कि वयोवृद्ध प्रवर्तक श्री पन्नालालजी म.सा. के बारे में क्या कहना चाहिए कि उन्होंने तो भूतकालीन सन्तों की स्मृति ताजी कर दी । जैन सन्तों की यह खूबी रही है कि वे मानव की जाति को नहीं अपितु उसकी शुद्ध वृत्ति और प्रकृति को देखते हैं । गुण के पारखी जैन सन्त इधर-उधर भटकते हुए व्यक्ति को शाण पर चढ़ा के नगीना तैयार कर देते हैं ।

मुनिश्री के जीवन का भी यही वृत्त है । भाटी मालाकार जाति का लाल पं. मुनि श्री गजमलजी के सदुपदेश से आकृष्ट हुआ और मुनिश्री ने संयम-साधना की शान पर चढ़ाके बालक ‘पन्ना’ को 11 वर्ष की वय में दीक्षित कर लिया ।

आपके धर्मगुरु थे पूज्य मोतीलालजी म.सा. शिक्षा-दीक्षा के बाद आप गुरु चरणों में संयम की साधना कर दीप्तिमान् रत्न बन गये । ब्रह्म साधना से आपकी आकृति पर तेजस्विता के साथ सरलता, दयालुता, परदुःख वत्सलता स्पष्ट झलका करती थी ।

आपने समाज में शिक्षा, सुधार और स्वधर्मी-सहाय के क्षेत्र में बड़ा काम किया । जिसके नमूने नानक जैन छात्रालय, नानक जैन श्रावक समिति और स्वाध्यायी संघ आदि आज भी विद्यमान है ।
पन्ना गुरु की जयकारों से गूंज उठा समूचा क्षेत्र
संत महेश मुनि ने कहा कि समभाव सभी के लिए उपयोगी है, सभी को इसकी साधना करनी चाहिए।

इस अवसर पर डॉ वरुण मुनि ने अंतगड़ सूत्र के सातवें वर्ग में राजा श्रेणिक की नन्दा आदि तेरह रानियों के सन्यास जीवन का वर्णन किया तो वही पन्नालाल जी महाराज के जीवन वृत पर गहराई भरा उपदेश दिया।

वही अखिलेश मुनि महाराज ने कल्प सूत्र के माध्यम से भगवान पार्श्वनाथ से भगवान ऋषभ देव तक का वर्णन किया। चतुर्मासिक प्रवचन श्रखंला की धर्म सभा में भारी तादाद में श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं ने गहरे गोते लगाए।

इस मौके पर श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं ने पूरी श्रद्धा आस्था से पन्ना गुरु की एक स्वर में जयकारे लगाते हुए अपनी भक्ति का परिचय दिया साथ ही समूचे क्षेत्र को पन्ना गुरु की जय जयकारों से गूंजा दिया।

दो जोड़ो ने लिया आजीवन शील के प्रत्याख्यान
प्रवर्तक पन्नालाल जी महाराज की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में पुष्कर निवासी शोभागमल सुशीला देवी जी नाहर तथा बालासती निवासी बुधराज विजयलक्ष्मी लुणावत ने भरे प्रवचन सभा में ब्रह्मचर्य का महत्त्व समझते हुए आजीवन ब्रह्मचर्य के प्रत्याख्यान ग्रहण किये आपके त्याग की अनुमोदना श्री मरुधर केसरी रूप सुकन चातुर्मास समिति एवं श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ पुष्कर के तत्वावधान में भव्य स्वागत एवं अभिनंदन के रूप में हुआ।

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