ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 28 अगस्त।
(प्रकाश जैन, वरिष्ठ पत्रकार)
महापर्व पर ब्यावर रंगा खमासना से..
जैन धर्म के सबसे बड़े महापर्व संवत्सरी पर्व के मौके पर बुधवार को ब्यावर शहर जैन धर्म की आस्था व अध्यात्म से सराबोर हो गया। सकल श्वेताम्बर जैन समाज के तत्वाधान में सवेरे 9.15 भव्य खमासना जुलूस निकाला गया। जिसमें समाज के हजारों श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाओं ने पूरी आस्था श्रद्धा ,भक्ति भावों के उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
पारणा महोत
जुलूस से पूर्व जैन पंचायती नोहरे में जैन खतर गच्छ संघ की वरिष्ठ साध्वियो की पावन निश्रा में सामूहिक क्षमापना आयोजन हुआ जिसमें ससंघ ने एक दूसरे से अपनी भूलो के लिए क्षमा मांगी।पर्युषण पर्व में तपस्या करने वाले साधकों का पारणा महोत्सव संघ अध्यक्ष बलवंत रांका एवम महामंत्री रिखब खटोड़ के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शिरकत कर अपने तप का पारणा किया।

ओसवाल पंचायती नोहरा से जय जयकारों के साथ जुलूस का हुआ आगाज
क्षमापना जुलूस का भव्य आगाज खजांची गली स्थित जैन पंचायती नोहरा से हुआ श्रद्धालु श्रावक भगवान महावीर स्वामी के जयकारों की स्वर लहरियों एवम जैन गीतो एवं भजनों को गूंजाते हुए चल रहे थे। “मिच्छामि दुक्कडम् व खमासना” के उद्घोषों से समूचा जुलूस मार्ग गुंजायमान हो गया पूरा शहर ‘क्षमा’ व शांति’ के दिव्य संदेश से सराबोर हो गया।

साधु-साध्वियों के चरणों में की सामूहिक क्षमा याचना
क्षमा याचनाजलसा ओसवाल पंचायती नोहरा, शांतिनाथ जैन मन्दिर, बिरद भवन, समता भवन, तेरापंथ सभा भवन, कांकरिया ढेलान, बांठिया भवन सहित विभिन्न धार्मिक स्थानकों एवम उपासरोंं पर पहुंचा।यहां विराजित साधु-साध्वियों के समक्ष समाजजनों ने सामूहिक रूप से क्षमा याचना की और आशीर्वचन एवम दिव्य मांगलिक लिया ।

भूलों के लिए मांगी क्षमा
श्रावक-श्राविकाओं ने एक-दूसरे के गले मिलकर,चरण स्पर्श कर,पांव छू कर विगत वर्षभर में हुई भूलों के लिए दिल से क्षमा मांगी। “मिच्छामि दुक्कडम्” का उच्चारण करते हुए सभी ने आपसी सौहार्द व धार्मिक एकता का संदेश दिया।
जुलूस के दौरान समाज के पुरुष, महिलाएं, युवा, वृद्ध और बालक-बालिकाएं सभी सफेद वेशभूषा में शांति, प्रेम और सौहार्द के सन्देश के साथ जुलूस के साक्षी बने। नगर का पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा व धार्मिक भावना से ओतप्रोत रहा।

संवत्सरी पर्व का महत्व
जैन धर्म में संवत्सरी पर्व को महापर्व माना गया। इस दिन आत्मशुद्धि व क्षमायाचना कर आत्मा को पवित्र,पावन बनाने का संकल्प लिया जाता है। खमासना ‘मिच्छामि दुक्कडम्’ कहकर परस्पर क्षमा मांगने की परंपरा ने समाज को नई चेतना नई उमंग सहित आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।
समाज की एकता झलकी
आज का आयोजन समाज की एकता व धार्मिक परंपरा का अद्भुत मिसाल बना है। इस मौके पर साधु-साध्वियों ने अपने संदेश में कहा कि क्षमा ही सच्चा धर्म है क्षमा से जीवन में शांति व सदभाव संभव है। भगवान महावीर के क्षमा वीरस्य भूषणम के दिव्य संदेश को आत्मसात करने की महत्ती आवश्यकता है।

