रायपुर(अमर छत्तीसगढ) 31 अगस्त। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली मितानिन दीदियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 7 अगस्त से जारी है। राजधानी रायपुर में सोमवार को मितानिन दीदियों और NHM कार्यकर्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी तीन सूत्रीय मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आगामी 4 सितंबर को 75 हजार से अधिक मितानिनें राजधानी में जुटकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगी।
मितानिन दीदियां लंबे समय से मानदेय वृद्धि, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत मांगों को लेकर संघर्ष कर रही हैं। उनका कहना है कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली मितानिनें गांव-गांव में 24 घंटे सेवाएं देती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सम्मानजनक पारिश्रमिक और सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।
हड़ताल के चलते ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ रहा है। टीकाकरण, पोषण, प्राथमिक उपचार और गर्भवती महिलाओं की देखरेख जैसी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
कई गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव गहराता जा रहा है। मितानिन संगठन ने कहा कि सरकार यदि जल्द उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करती, तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
मितानिन दीदियों की प्रमुख मांगें
- मानदेय में वृद्धि और नियमित वेतनमान की व्यवस्था।
- नौकरी में स्थायीकरण (नियमितीकरण) की गारंटी।
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (पेंशन, बीमा आदि) का लाभ।
मितानिन संगठन का कहना है कि राज्यभर में 75 हजार से अधिक मितानिनें दिन-रात स्वास्थ्य सेवाओं में लगी रहती हैं, लेकिन उन्हें आज भी केवल प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) के सहारे काम करना पड़ रहा है।

